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जापान के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा

चारु कार्तिकेय
१८ मार्च २०२२

जापान के प्रधानमंत्री फूमियो किशिदा दो दिन की यात्रा पर भारत आ रहे हैं. वो 14वें सालाना भारत-जापान शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे.

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फूमियो किशिदा
फूमियो किशिदातस्वीर: Kyodo via REUTERS

भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान में बताया किशिदा प्रधानमंत्री के निमंत्रण पर सम्मेलन में हिस्सा लेने आ रहे हैं. सम्मेलन शनिवार 19 मार्च को होगा जिस दिन किशिदा भारत पहुंचेंगे. किशिदा अक्टूबर 2021 में ही प्रधानमंत्री बने थे और इस भूमिका में उनकी मोदी से यह पहली मुलाकात होगी.

हालांकि, राजनीति में वो नया चेहरा नहीं हैं. वो एक राजनीतिक परिवार से आते हैं और वो खुद इसके पहले जापान के विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री रह चुके हैं. पिछला सम्मेलन 2018 में टोक्यो में हुआ था और उसके बाद अलग अलग कारणों से यह रद्द होता रहा.

(पढ़ें: क्वाड को लेकर अमेरिका पर बिफरा चीन)

भारत-प्रशांत इलाके में साझेदारी

2019 में सम्मेलन असम के गुवाहाटी में मोदी और तत्कालीन जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे के बीच होना था, लेकिन उस समय नए नागरिकता कानून के खिलाफ असम में चल रहे भारी प्रदर्शनों की वजह से सम्मेलन को रद्द करना पड़ा था.

वॉशिंगटन
सितंबर 2021 में वॉशिंगटन में क्वॉड की बैठकतस्वीर: Evan Vucci/AP/dpa/picture alliance

2020 और 2021 में सम्मेलन मुख्य रूप से कोविड-19 महामारी की वजह से नहीं हो पाया. 2021 जापान में नेतृत्व के बदलाव का साल भी था. माना जा रहा है कि इस बार सम्मेलन में दोनों नेता भारत-प्रशांत इलाके में अपनी साझेदारी और मजबूत करने पर चर्चा करेंगे.

द्विपक्षीय रिश्तों के अलावा दोनों देश अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के साथ क्वॉड समूह के भी सदस्य हैं जो इस इलाके में चीन के बढ़ते कदमों को रोकने की कोशिश कर रहा है. हालांकि, इस समय यूक्रेन युद्ध की वजह से रूस को लेकर दोनों देशों ने अलग अलग रुख अपनाया हुआ है.

(पढ़ें: क्वॉडः एक चीन विरोधी संगठन या भू-राजनीति को बदलने का केंद्र)

जापान ने पश्चिम के देशों की ही तरह रूस को अलग थलग करने के लिए व्यापक वित्तीय प्रतिबंध लगा दिए हैं. इनमें सेमिकंडक्टरों और दूसरे उच्च तकनीक के उत्पादों के निर्यात पर लगाम शामिल है. लेकिन भारत ने सावधानी भरा रुख अपनाया है जिससे पश्चिम के देश संतुष्ट नहीं हैं.

यूक्रेन युद्ध की छाया

भारत ने इन देशों की तरह रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की आलोचना नहीं की है और संयुक्त राष्ट्र में भी रूस के खिलाफ मतदान से खुद को बाहर रखा है. अमेरिका और यूरोपीय देशों की सरकारें बार बार भारत से अपना रुख बदलने की अपील कर रही हैं.

क्वॉड देशों की नौसेनाएं
नवंबर 2020 में क्वॉड देशों की नौ सेनाओं की 'मलाबार एक्सरसाइज'तस्वीर: AP Photo/picture alliance

ब्रिटेन ने तो खुल कर कह दिया है कि वो भारत से निराश है. देखना होगा कि मोदी और किशिदा की मुलाकात में रूस पर क्या बात होती है. दोनों देशों के बीच आपसी व्यापार और सहयोग अच्छे स्तर पर है.

(पढ़ें: अमेरिका के साथ भारत और जापान भी एसपीआर में हाथ डालेंगे)

2019-20 में दोनों देशों के बीच व्यापार 11.87 अरब डॉलर को पार कर गया. भारत ने उस साल जापान से 7.93 अरब डॉलर मूल्य का सामान खरीदा और 3.94 अरब डॉलर मूल्य का सम्मान निर्यात किया.

2000 से 2019 के बीच भारत में जापान ने भारत में कुल 32 अरब डॉलर का निवेश किया. यह निवेश मुख्य रूप से ऑटोमोबाइल, बिजली के उपकरण, संचार, रसायन, बीमा और दवा क्षेत्रों में हुआ. भारत के कई बड़ी परियोजनाओं में जापान ने निवेश किया हुआ है.

(एपी से जानकारी के साथ)

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