जापान का 2050 तक शून्य उत्सर्जन, कार्बन न्यूट्रल समाज का लक्ष्य | दुनिया | DW | 26.10.2020
  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages
विज्ञापन

दुनिया

जापान का 2050 तक शून्य उत्सर्जन, कार्बन न्यूट्रल समाज का लक्ष्य

जापान ने 2050 तक ग्रीनहाउस गैसों को शून्य करने और कार्बन-तटस्थ समाज बनने का लक्ष्य रखा है. सोमवार को प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा ने जलवायु परिवर्तन पर अपने देश की स्थिति में एक बड़े बदलाव की रणनीति पेश की.

इससे पहले जापान ने कहा था तय तारीख के बजाय वह जल्द ही कार्बन न्यूट्रल देश होगा लेकिन अब उसने 2050 तक अपना लक्ष्य तय कर लिया है. यह लक्ष्य यूरोप से भी मेल खाता है. गौरतलब है कि पिछले साल यूरोपीय संघ ने समझौता किया था कि साल 2050 तक यूरोपीय संघ के सदस्य देश कार्बन न्यूट्रल हो जाएंगे. इस डील के मुताबिक अर्थव्यवस्था की कायापलट कर 2050 तक कार्बन उत्सर्जन को शून्य करने का लक्ष्य था. ईयू का 2050 के लिए तय किया गया लक्ष्य 2015 में हुए पेरिस जलवायु समझौते के तहत है.

प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार संसद को अपनी नीतियों के बारे में बताते हुए सुगा ने कहा, "जलवायु परिवर्तन पर प्रतिक्रिया देना अब आर्थिक विकास में अड़चन नहीं है. हमें अपनी सोच को उस नजरिये से बदलने की जरूरत है कि जलवायु के खिलाफ मुखर उपायों से परिवर्तन को बढ़ावा मिलेगा और औद्योगिक संरचना और अर्थव्यवस्था में विकास होगा."

जापान दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन करने वाला देश है और अब वहां नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं साथ ही कोयले से बिजली बनाने के नए प्लांट भी खोलने की योजना बन रही है. सुगा का कहना है कि इन लक्ष्यों को हासिल करने करने नए सौर सेल्स और कार्बन रिसाइक्लिंग अहम भूमिका निभाएंगे और जापान इस क्षेत्र में रिसर्च और डेवलेपमेंट में जोर देगा. शिंजो आबे की जगह लेने के बाद वे समाज को डीजिटल करने के भी लक्ष्य पर भी काम कर रहे हैं.

पड़ोसी देश चीन के साथ जापान के गहरे आर्थिक संबंधों पर बोलते हुए सुगा ने कहा कि एक स्थिर द्विक्षीय संबंध जरूरी है. लेकिन उन्होंने साथ ही कहा, "जापान समान विचारधारा वाले देशों के साथ स्वतंत्र और खुले प्रशांत महासागर के लिए संपर्क बनाए रखेगा."

पिछले हफ्ते ही सुगा पद संभालने के बाद पहली बार वियतनाम और इंडोनेशिया के दौरे पर गए थे, ऐसा उन्होंने दक्षिणपू्र्व एशियाई देशों के साथ संबंध बेहतर बनाने के इरादे से किया था. दक्षिण चीन सागर में चल रहे विवाद को लेकर भी सुगा पहले से ही सतर्क हैं. अपनी चार-दिवसीय यात्रा के दौरान सुगा ने वियतनाम के प्रधानमंत्री न्यूएन श्वान फुक और इंडोनेशिया में राष्ट्रपति जोको विडोडो उर्फ जोकोवी से मुलाकात की थी. संसद को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "हम उच्च स्तरीय अवसरों का इस्तेमाल निर्णायक रूप से अपनी बात कहने के लिए करेंगे और आम सहमति वाले मुद्दों पर संपर्क बनाए रखेंगे."

एए/सीके (रॉयटर्स)

DW.COM

संबंधित सामग्री

विज्ञापन