इस्राएल, यूएई और बहरीन ने संबंधों को बहाल करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए | दुनिया | DW | 16.09.2020

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दुनिया

इस्राएल, यूएई और बहरीन ने संबंधों को बहाल करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए

दुनिया के तीन प्रमुख एकेश्वरवादी धर्मों के शीर्ष प्रतिनिधियों ने ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. इस्राएल, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन ने राजनयिक संबंधों को बहाल करने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाया है.

व्हाइट हाउस में ऐतिहासिक शांति समझौते पर दस्तखत के बाद इस्राएल के प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू ने कहा है कि रिश्ते सामान्य करने वाले समझौते से "अरब-इस्राएल विवाद" हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा. इस ऐतिहासिक समझौते के लिए मंगलवार को व्हाइट हाउस में भव्य समारोह आयोजित किया गया, जिसकी मेजबानी अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने की और लगभग 700 लोग इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने.

ट्रंप ने समझौते पर हस्ताक्षर समारोह के दौरान कहा कि यह मध्य पूर्व के लिए नया सवेरा है. तीनों देशों के बीच इस समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए इस्राएल के प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू, यूएई की तरफ से विदेश मंत्री अब्दुल्ला बिन जायद और बहरीन की ओर से विदेश मंत्री अब्दुल लतीफ अल जयानी शामिल हुए. इन देशों के अलावा कुछ और अहम लोग भी इस घटना के गवाह बने. ट्रंप ने इस समझौते के लिए कुछ डेमोक्रैट्स को भी आमंत्रित किया था जिन्होंने इस समझौते का चुपचाप समर्थन किया था. मिस्र, जॉर्डन के बाद यूएई और बहरीन ऐसे अरब देश हैं जिन्होंने इस्राएल को मान्यता दी है.

ट्रंप ने समझौते पर हस्ताक्षर के बाद कहा, "दशकों के विभाजन और संघर्ष के बाद हमने एक नए मध्य पूर्व की शुरुआत की है. इस्राएल, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन के लोगों को बधाई." कोरोना वायरस महामारी के बावजूद जुटी भीड़ को संबोधित करते हुए नेतन्याहू ने कहा, "आज का दिन इतिहास के करवट का दिन है. यह शांति की नई सुबह लेकर आएगा." उन्होंने उम्मीद जताई की आगे अन्य अरब देश भी इसमें शामिल होंगे.

यूएई के विदेश मंत्री अब्दुल्ला बिन जायद ने निजी तौर पर नेतन्याहू का "शांति के चुनाव और फलिस्तीन क्षेत्र को शामिल करने के कार्यक्रम को रोकने" पर शुक्रिया अदा किया. लेकिन कुछ जानकारों का कहना है कि समझौते की वास्तविक उपलब्धियां मामूली है, उनका कहना है कि इन तीनों की दिलचस्पी क्षेत्र में ईरान के प्रभाव को चुनौती देने की है.

जब व्हाइट हाउस में समझौते पर हस्ताक्षर किए जा रहे थे उसी दौरान हमास के नियंत्रण वाले गाजा पट्टी से दक्षिण इस्राएल में रॉकेट दागे गए. इसके बाद बुधवार की सुबह इस्राएल ने गाजा पर हवाई हमले किए.

समझौता सीधे तौर पर दशकों पुराने इस्राएल-फिलिस्तीनी संघर्ष को संबोधित नहीं करता है, हालांकि इस्राएल ने वेस्ट बैंक पर अपना अधिकार जमाने की योजना को ठंडे बस्ते में डालने का वादा किया है. 

ट्रंप के दामाद और सलाहकार जैरेड कुशनर, जिन्होंने वार्ता का नेतृत्व भी किया है, ने कहा, "समझौते में शामिल देशों के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है. इसने क्षेत्र में आशा की एक जबरदस्त भावना पैदा की है. अतीत के संघर्षों पर ध्यान देने की जगह हमें अंतहीन संभावनाओं के साथ एक गतिशील भविष्य पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है." उन्होंने लोगों से अतीत से निकलकर आगे बढ़ने की अपील की.  

फिलिस्तीन नाराज 

फिलिस्तीन के अधिकारियों ने इस समझौते को अस्वीकार किया है और कहा है कि अरब के साथियों ने पीठ पर खंजर मारा है. फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने एक बयान में कहा कि समझौते से क्षेत्र में शांति बहाली नहीं होगी. उन्होंने कहा, "इस क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता तब तक हासिल नहीं होगी जब तक कि इस्राएल का कब्जा खत्म नहीं हो जाता. मुख्य समस्या उन देशों के बीच नहीं है, जिन्होंने समझौते पर दस्तखत किए हैं, इस्राएल के कब्जे के कारण फिलिस्तीनी लोग समस्या झेल रहे हैं."

एए/सीके (डीपीए, एएफपी, एपी)

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