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तस्वीर: picture-alliance/AP Photo/A. Qadri
समाज

सुप्रीम कोर्ट का आदेश, सभी थानों में लगे सीसीटीवी

आमिर अंसारी
३ दिसम्बर २०२०

सु्प्रीम कोर्ट ने एक अहम आदेश में कहा है कि सभी राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश अपनी सीमा क्षेत्र के सभी थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाना सुनिश्चित करें. रिकॉर्डिंग को कम से कम एक साल तक के लिए सुरक्षित रखने को कहा.

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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अपने आदेश में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि वे सुनिश्चित करें कि हर पुलिस स्टेशन के सभी प्रवेश और निकास बिंदुओं, मुख्य द्वार, लॉकअप, गलियारों, लॉबी और रिसेप्शन पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं. साथ ही बाहर के क्षेत्र के लॉकअप कमरों को कवर किया जाए जिससे कोई भी हिस्सा कैमरे की जद से बाहर न होने पाए. इसी के साथ कोर्ट ने केंद्र सरकार से सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी), डायरेक्ट्रेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलीजेंस (डीआरआई) और सीरियस फ्रॉड इनवेस्टीगेशन ऑफिस (एसएफआईओ) के कार्यालयों समेत ऐसी जांच एजेंसियों के दफ्तर में सीसीटीवी और रिकॉर्डिंग उपकरण लगाने को कहा है जिनके पास पूछताछ और गिरफ्तारी की शक्ति है.

जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की एक बेंच ने थानों में सीसीटीवी लगाने का अपना फैसला परमवीर सिंह सैनी की याचिका पर दिया है. सैनी ने अपनी याचिका में गवाहों की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को लेकर कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही कहा है कि थानों के बाहरी हिस्से में लगने वाले सीसीटीवी कैमरे नाइट विजन वाले होने चाहिए और साथ ही सरकार से कहा है कि जिन थानों में बिजली और इंटरनेट नहीं वहां वे यह सुविधा उपलब्ध कराएं. कोर्ट ने कहा सौर/पवन ऊर्जा समेत बिजली मुहैया कराने के किसी भी तरीके का उपयोग करके जितनी जल्दी हो सके बिजली दी जाए.

बेंच ने अपने आदेश में कहा, "हिरासत में पूछताछ के दौरान आरोपी के घायल होने या मौत होने पर पीड़ित पक्ष को शिकायत करने का अधिकार है. सीसीटीवी फुटेज से ऐसी शिकायतों की जांच में आसानी होगी."

सीसीटीवी कैमरे से प्रताड़ना पर रोक

सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत में प्रताड़ना से जुड़े एक मामले के निपटारे के दौरान इस साल जुलाई में 2017 के एक केस पर ध्यान दिया था जिसमें उसने सभी पुलिस स्टेशनों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का आदेश दिया था जिससे मानवाधिकारों के हनन की जांच की जा सके. साथ ही घटनास्थल की वीडियोग्राफी कराई जा सके. इसी के साथ कोर्ट ने हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को इसके लिए एक समिति बनाने को भी कहा था.

कोर्ट ने राज्यों को छह सप्ताह के भीतर कैमरे लगाने का समय देते हुए, एक्शन टेकन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है. साथ ही कोर्ट ने कहा है कि व्यक्ति का अधिकार है कि उसके मानवाधिकारों की रक्षा हो.

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