भारत में शनिवार से कोविड-19 टीकाकरण अभियान की शुरूआत | भारत | DW | 15.01.2021
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भारत

भारत में शनिवार से कोविड-19 टीकाकरण अभियान की शुरूआत

शनिवार से भारत में कोरोना के खिलाफ टीकाकरण अभियान शुरू होने जा रहा है. पहले चरण में स्वास्थ्यकर्मियों और अंग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों को टीका दिया जाएगा. इसी के साथ खास कोविन ऐप भी लॉन्च होगा.

भारत में कोरोना वायरस के खिलाफ टीकाकरण के अभियान की शुरूआत के पहले स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों को इससे जुड़े जरूरी दिशा निर्देश जारी किए हैं. दिशा निर्देशों के मुताबिक वैक्सीन के आपात इस्तेमाल की इजाजत 18 साल से अधिक उम्र के लोगों को ही दी गई है और गर्भवती और स्तनपान कराने वालीं महिलाओं को वैक्सीन नहीं लगवाने को कहा गया है. शनिवार को पहले चरण में करीब तीन लाख स्वास्थ्यकर्मियों को वैक्सीन की पहली खुराक दी जाएगी. पहले चरण में स्वास्थ्यकर्मियों और अंग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों का टीकाकरण हो रहा है.

टीकाकरण के लिए देशभर में तीन हजार से अधिक केंद्र बनाए गए हैं और यहां पहले चरण के तहत वैक्सीन दी जाएगी. देश में अगले कुछ महीनों में प्राथमिकता वाले तीन करोड़ लोगों को टीका लगाने की योजना है. स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशा निर्देशों में यह भी बताया गया है कि दूसरी खुराक का टीका दूसरी कंपनी का लगाया जा सकता है या नहीं. मतलब यह कि पहली बार अगर किसी को कोवैक्सीन लगी है तो दूसरी डोज में भी उसे कोवैक्सीन का ही टीका लगेगा. साथ ही कहा गया है कि किसी व्यक्ति को कोरोना के लक्षण हैं तो उस व्यक्ति को ठीक होने के 4-8 हफ्ते बाद टीका लगाया जाना चाहिए. 

वैक्सीन के इंटरचेंजिंग की मंजूरी नहीं है. पहली खुराक के 28वें दिन दूसरी खुराक दी जाएगी. साथ ही दिशा निर्देश में टीका लगाने के बाद होने वाली छोटी-मोटी दिक्कतों के बारे में भी बताया गया है. इन जानकारियों को टीकाकरण से जुड़े लोगों तक पहुंचाने को कहा गया है ताकि अगर कोई दिक्कत पेश आती है तो वे हर तरह की स्थिति से निपटने में सक्षम हो सकें. जिन लोगों को टीका लगना है उनके बारे में मेडिकल हिस्ट्री भी पता लगाने को कहा गया है.

प्रधानमंत्री करेंगे कार्यक्रम की शुरूआत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए देश भर में शुरू हो रहे टीकाकरण अभियान की शुरूआत करेंगे. कार्यक्रम के दौरान सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के तीन हजार के करीब केंद्र वर्चुअल रूप से जुड़ेंगे. पहले दिन हर केंद्र में लगभग 100 लाभार्थियों को टीका लगाया जाएगा. यह टीकाकरण कार्यक्रम प्राथमिकता वाले समूहों के सिद्धांत पर आधारित है. इस चरण के दौरान सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों के स्वास्थ्यकर्मियों को टीका लगाया जाएगा. टीकाकरण कार्यक्रम में कोविन डिजिटल मंच का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसे केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने विकसित किया है. कोविन वैक्सीन स्टॉक, भंडारण तापामान और कोविड-19 वैक्सीन के लाभार्थियों की व्यक्तिगत स्थिति की रियल टाइम जानकारी देगा. इस ऐप को खासतौर पर टीकाकरण अभियान के लिए तैयार किया गया है और इसको शनिवार को मोदी लॉन्च करेंगे. सरकार ने अभी इस ऐप को प्ले स्टोर पर जारी नहीं किया है और लोगों से इस तरह के किसी भी ऐप को डाउनलोड करने से आगाह किया है.

Corona-Impfung auf den Seychellen

देश में दो वैक्सीन को आपात इस्तेमाल की मंजूरी मिली है.

दिल्ली की तैयारी

दिल्ली सरकार ने भी टीकाकरण को लेकर तैयारी पूरी कर ली है. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के मुताबिक शनिवार से राजधानी के 81 केंद्रों पर टीका लगाया जाएगा. हफ्ते में चार दिन कोविड वैक्सीन लगाई जाएगी और बाकी दिनों पर दूसरी बीमारियों के लिए नियमित रूप से टीका लगाया जाना जारी रहेगा. दिल्ली में पहले चरण में स्वास्थ्यकर्मियों को टीका दिया जाएगा. इसके लिए 2 लाख 40 हजार स्वास्थ्यकर्मी अभी तक पंजीकरण करा चुके हैं. एक केंद्र पर एक दिन में करीब 100 लोगों को वैक्सीन दी जाएगी. पूरी दिल्ली में 81 केंद्रों पर प्रतिदिन 8,100 स्वास्थ्यकर्मियों को टीका लगाया जाएगा. दिल्ली सरकार के मुताबिक अगले कुछ दिनों में टीका केंद्रों की संख्या बढ़ाकर 175 कर दी जाएगी और फिर आगे इनकी संख्या एक हजार के करीब हो जाएगी.

दो वैक्सीन को मिली है मंजूरी

भारत सरकार ने 3 जनवरी को पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा बनाई गई ऑक्सफोर्ड-ऐस्ट्राजेनेका की वैक्सीन और हैदराबाद स्थित भारत-बायोटेक की वैक्सीन को मंजूरी दी थी. सीरम की वैक्सीन का नाम कोविशील्ड है और भारत बायोटेक की वैक्सीन का नाम कोवैक्सीन है. दोनों ही वैक्सीन को आपात इस्तेमाल के लिए मंजूरी मिली है. दोनों वैक्सीन 2 से 8 डिग्री सेल्सियस तापमान पर रखी जा सकती है. दोनों ही वैक्सीन दो डोज की हैं.

सरकार द्वारा खरीदे गए कोविशील्ड और कोवैक्सीन टीके की 1.65 करोड़ खुराकें उनके स्वास्थ्यकर्मियों के आंकड़ों के मुताबिक राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को बांटी गई हैं.

स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक 10 फीसदी टीकों को आरक्षित रखा जाए क्योंकि इतनी खुराकों का नुकसान टूट-फूट में हो सकता है.

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