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यूक्रेन में फंसे भारतीयों की मदद के लिए मंत्री तैनात

चारु कार्तिकेय
२८ फ़रवरी २०२२

यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों की मदद के लिए केंद्रीय मंत्रियों का एक समूह यूरोप जा कर पूरे अभियान का समन्वय करेगा. इन छात्रों के कई चिंताजनक वीडियो के सामने आने के बीच यह फैसला मोदी सरकार की एक आपात बैठक में लिया गया.

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Indien Neu-Delhi | Angehörige von Studenten in Ukraine vor russische Botschaft
तस्वीर: Manish Swarup/AP/picture alliance

यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों की कठिन परिस्थितियों के कई वीडियो सामने आने के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार सुबह एक उच्च स्तरीय बैठक की. कई मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि बैठक में इन छात्रों को सुरक्षित निकाल लेने के अभियान की देखरेख के लिए केंद्रीय मंत्रियों का एक समूह यूरोप जाएगा.

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी, ज्योतिरादित्य सिंधिया, किरेन रिजिजू और जनरल वीके सिंह को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है.

कठिन हालात

ये मंत्री भारत के विशेष राजदूतों के रूप में यूक्रेन के पड़ोसी देशों में जाएंगे और उन देशों की यूक्रेन से सटी सीमाओं के रास्ते भारतीय छात्रों को निकाल लेने की कोशिश करेंगे. इन देशों में पोलैंड, हंगरी, स्लोवाकिया, रोमानिया और मॉल्डोवा शामिल हैं.

इन छात्रों के कई वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं जिनमें उन्होंने कई कठिनाइयों का सामना करने के बारे में बताया है. इन खबरों को लेकर विपक्षी पार्टियां भी सरकार की आलोचना कर रही हैं.

 

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ऐसा ही एक वीडियो ट्वीट करते हुए कहा कि सरकार को तुरंत इन छात्रों को निकालने की योजना के बारे में उन्हें और उनके परिवारों को बताना चाहिए. वीडियो में वर्दी पहने लोग भारतीय छात्रों को धकेलते, घसीटते और उनके साथ मारपीट करते हुए दिखाई दे रहे हैं.

कई दूसरे वीडियो में भारतीय छात्रों ने आरोप लगाया है कि उन्हें यूक्रेन के सैनिक सीमा पार कर पड़ोसी देशों में जाने नहीं दे रहे हैं. कुछ छात्रों ने यह भी दावा किया है कि भारतीय दूतावास ने उन्हें निकालने का इंतजाम ठीक से नहीं किया है और वो कई घंटों से माइनस पांच डिग्री सेल्सियस तापमान में खुले में बिना खाने पीने और शौचालय की व्यवस्था की समय बिता रहे हैं.

उम्मीद की जा रही है कि केंद्रीय मंत्रियों के जाने से यह अभियान बेहतर तरीके से पूरा किया जा सकेगा और इन छात्रों को सुरक्षित वापस लाया जा सकेगा. विदेश मंत्रालय ने इस अभियान को ऑपरेशन गंगा नाम दिया है और इसके लिए एक समर्पित हेल्पलाइन और ट्विटर हैंडल भी बनाया है.

इस बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इन देशों के विदेश मंत्रियों से फोन पर बात कर पूरे अभियान की सफलता पर बातचीत की.

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