समाज में मौजूद घटिया सोच से बनता है ″ब्वॉयज लॉकर रूम″ | भारत | DW | 05.05.2020
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भारत

समाज में मौजूद घटिया सोच से बनता है "ब्वॉयज लॉकर रूम"

इंस्टाग्राम पर एक ग्रुप के सदस्यों ने अपने साथ पढ़ने वाली लड़कियों के बारे में भद्दी और अश्लील टिप्पणियां की, उनकी शारीरिक बनावट पर टिप्पणी की. मामले पर शोर के बाद पुलिस हरकत में आई है.

इंस्टाग्राम पर वैसे तो लोग अपनी तस्वीरों के साथ कहानी साझा करते हैं लेकिन कुछ युवा हैं जो किशोरियों की तस्वीरों पर अभद्र टिप्पणी करना और बलात्कार जैसी गंभीर वारदात पर बात करना सामान्य मानते हैं. किसी की तस्वीर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करना कानूनी कार्रवाई के दायरे में आता है. इंस्टाग्राम पर राजधानी दिल्ली के नामी स्कूल के कुछ छात्र ऐसा ग्रुप बनाकर चैट कर रहे थे जिसमें नाबालिग लड़कियों के बारे में अश्लील बातें की जाती थीं, तस्वीरें साझा की जाती थीं और मीडिया रिपोर्ट की मानें तो उनके साथ बलात्कार जैसी वीभत्स वारदात के बारे में भी बातें की जाती थीं.

3 मई को ट्विटर पर एक युवती ने इस ग्रुप से जुड़े कुछ स्क्रीनशॉट साझा किए. इसके बाद कई और लोगों ने भी "ब्वॉयज लॉकर रूम" के चैट के स्कीनशॉट साझा किए. 11वीं और 12वीं में पढ़ने वाले कुछ छात्रों की अपने साथ पढ़ने वाली और दोस्त लड़कियों को लेकर जिस तरह की भद्दी और अश्लील टिप्पणियां की गईं उससे मामला तेजी से सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कई बार लड़कों ने इस चैट ग्रुप में बलात्कार जैसी वारदात की योजना भी साझा की. मामले के तूल पकड़ने के बाद दिल्ली पुलिस के साइबर सेल ने खुद से संज्ञान लिया और मामला दर्ज किया. दिल्ली पुलिस ने इस मामले में एक नाबालिग छात्र को भी पकड़ा है और ग्रुप से जुड़े 21 लड़कों की पहचान भी कर ली है और उन सभी से साइबर सेल पूछताछ करेगी.

आईपीसी की धारा 354सी और आईटी अधिनियम की धारा 66 ई के तहत तस्वीरों से छेड़छाड़ करना और निजी अंगों की तस्वीरें शेयर करना अपराध है. वकील और साइबर एक्सपर्ट पवन दुग्गल डीडब्ल्यू से कहते हैं,"चाइल्ड पोर्नोग्राफी एक दंडनीय अपराध है. ब्वॉयज लॉकर रूम मामले में आरोप है कि ये लोग नाबालिग लड़कियों की तस्वीरें साझा करते थे, ये लोग लड़कियों की छवि को नकारात्मक रूप से पेश करते थे. मामले की जांच होगी अगर आरोपी नाबालिग हुए तो जुवेनाइल एक्ट के तहत मामला चलेगा और अगर आरोपी नाबालिग नहीं हैं तो केस सामान्य कानून के हिसाब से चलेगा."

सेंटर फॉर सोशल रिसर्च (सीएसआर) की निदेशक डॉक्टर रंजना कुमारी डीडब्ल्यू से कहती हैं, "ये बच्चे दिल्ली के अच्छे घरों के हैं, ये तथाकथित पैसे वालों के घरों के बच्चे हैं. बड़े स्कूलों में पढ़ते हैं जहां आम तौर पर लोग अपने बच्चों का दाखिला कराने के लिए दौड़ भाग करते हैं. उन स्कूलों में बच्चों को क्या मूल्य मिले, घरों में उन्हें क्या मूल्य मिले यह काफी अहमियत रखता है. ये बच्चे तो नहीं कहे जाएंगे क्योंकि इतनी छोटी उम्र में ही इस तरह की मानसिकता है जो कि आगे अपराध की तरफ ले जाएगी."

रंजना कुमारी कहती हैं कि लड़कियों की तस्वीरें पोस्ट कर रेप की बात करना समाज के भीतर मौजूद गहरी बीमारी को दर्शाता है. उनके मुताबिक, "हम लड़कों को इतनी छूट दे देते हैं कि उनको लगता है कि वह कुछ भी करें सब माफ है. इसी का नतीजा है कि वे कभी सड़क पर सोए लोगों को महंगी गाड़ी से दबाकर चले जाते हैं. समाज के भीतर भारी गंदगी पनप रही है. इस पर मां-बाप को चेतना होगा."

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने इस चैट ग्रुप पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए एक वीडियो संदेश जारी कर कहा है कि इस ग्रुप में शामिल सभी लोगों की गिरफ्तारी होनी चाहिए.

रंजना कुमारी बताती हैं कि उनकी संस्था सेंटर फॉर सोशल रिसर्च फेसबुक के साथ मिलकर बच्चे ऑनलाइन सुरक्षित कैसे रहें, इस पर तौर तरीकों को सिखाने के लिए कार्यक्रम चलाती हैं, लेकिन उनका कहना है कि स्कूल सिर्फ किताबी बातों को ही रट्टा लगाने में लगे रहते हैं. साथ ही वह कहती हैं कि अब जमाना डिजिटल हो गया है तो पैरेंटिंग भी डिजिटल करनी पड़ेगी. वह कहती हैं, "मां-बाप को डिजिटल पैरेंटिंग जाननी पड़ेगी. नर्सरी के बच्चो के लिए स्कूल में ऑनलाइन कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं. हर रोज छोटे बच्चे दो-तीन घंटे स्क्रीन देखते हैं और फिर आप उसके हाथ से स्क्रीन नहीं छीन सकते हैं. बच्चा कार्टून देखना चाहेगा, वीडियो देखना चाहेगा. ऑनलाइन एक्सपोजर बहुत ज्यादा है और इसलिए डिजिटल पैरेंटिंग भी जरूरी है."

राष्ट्रीय महिला आयोग के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल में साइबर अपराध की 54 शिकायतें मिलीं जबकि मार्च में 37 और फरवरी में 21 शिकायतें मिली थी.

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