साइकिल पर पिता को बिठाकर बेटी ने किया 1,200 किलोमीटर का सफर | भारत | DW | 22.05.2020
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भारत

साइकिल पर पिता को बिठाकर बेटी ने किया 1,200 किलोमीटर का सफर

यह कहानी है उस बेटी की दृढ़ इच्छाशक्ति की जिसने 1,200 किलोमीटर का सफर साइकिल से तय किया और अपने जख्मी पिता को साइकिल पर बिठाकर गुरुग्राम से बिहार के दरभंगा तक पहुंचा दिया.

15 साल की ज्योति लॉकडाउन में अपने पिता मोहन पासवान को साइकिल पर बिठाकर 1,200 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी आठ दिन में तय करके गुरुग्राम से बिहार के दरभंगा पहुंची थी. ज्योति ने रोजाना 100 से 150 किमी साइकिल चलाई. ज्योति के पिता गुरुग्राम में ऑटोरिक्शा चलाते थे, दुर्घटना में पिता के घायल होने के बाद वह जनवरी महीने में अपनी मां और जीजा के साथ गुरुग्राम गई थी. इसके बाद वह पिता की देखभाल के लिए वहीं रुक गई.

इसी बीच कोरोना वायरस के कारण देशभर में लॉकडाउन की घोषणा हो गई और ज्योति के पिता का काम ठप्प पड़ गया. ऐसे में ज्योति ने पिता के साथ साइकिल पर वापस गांव का सफर तय करने का फैसला किया. अपने इस सफर के बारे में ज्योति कहती हैं कि वे रात को किसी पेट्रोल पंप के पास रुक जाती थी और फिर सुबह आगे का सफर शुरू करती थी. ज्योति कहती है कि उसे रास्ते में किसी तरह की परेशानी नहीं हुई. ज्योति की इच्छाशक्ति और संकल्प को देखते हुए लोग उसकी आर्थिक मदद भी कर रहे हैं. आर्थिक मदद पर ज्योति कहती हैं, "मैं इन पैसों का इस्तेमाल आगे की पढ़ाई के लिए करना चाहती हूं."

ज्योति को अब तक डॉ. प्रभात दास फाउंडेशन और सशस्त्र सीमा बल का दल भी सम्मानित कर चुका है. जिला प्रशासन ने भी ज्योति की प्रशंसा की है. इस बीच, मीडिया में आ रही रिपोर्ट के मुताबिक साइकिलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने भी ज्योति को अगले महीने होने वाली ट्रायल के लिए चुना है. ज्योति से जब इस बारे में पूछा गया तो उसने कहा, "अगर मौका मिलेगा तो जरूर जाऊंगी लेकिन अभी मेरा ध्यान आगे की पढ़ाई पर है. वैसे अभी मैं थकी हुई हूं." ज्योति कहती है कि वह लॉकडाउन के बाद दिल्ली जाकर ट्रायल देगी.

वह पढ़ाई के साथ-साथ साइकिलिंग भी करना चाहती है. ज्योति कहती है कि अगर मौका मिला तो वह साइकिलिंग में देश का प्रतिनिधित्व करना चाहती है. ज्योति की मदद के लिए कई राजनीतिक दल आर्थिक सहायता भी देने के लिए आगे आ रहे हैं.

एए/सीके(आईएएनएस)

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