ब्लैक मार्केट से इंसुलिन खरीदने को मजबूर अमेरिकी मरीज | दुनिया | DW | 31.01.2020
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दुनिया

ब्लैक मार्केट से इंसुलिन खरीदने को मजबूर अमेरिकी मरीज

अमेरिकी दवा कंपनियां डायबिटीज की दवाई इंसुलिन कनाडा से 13 गुना महंगी बेच रही हैं. बेहद महंगे इंसुलिन को देखते हुए कई लोग फेसबुक के जरिए जुड़कर आपस में एक दूसरे को इंसुलिन मुहैया करा रहे हैं, वो भी गैरकानूनी तरीके से.

अमेरिका के मिनियापोलिस में जनवरी की ठंड में ऐबिगेल हांसमेयर शॉपिंग मॉल के बाहर अपनी कार को पार्क करती हैं. अपने पर्स से भूरे रंग का थैला निकालती हैं. बैग में एक शीशी और सिरिंज है. इस बैग को वह खरीददार को दे देती हैं. तकनीकी रूप से ऐसा आदान प्रदान गैरकानूनी है लेकिन भूरे थैले में रखी दवाईयां प्रतिबंधित या गैरकानूनी नहीं हैं. ये दवाई है इंसुलिन. सन 1920 में खोजी गई इंसुलिन ने जानलेवा डायबिटीज को अब ऐसा बना दिया है कि दुनिया भर के करोड़ों लोग सालों साल इस बीमारी के साथ जी सकते हैं. पिछले 10 सालों में अमेरिका में इंसुलिन के दाम आसमान छूने लगे हैं. यह दवा आम लोगों की पहुंच से बाहर होती जा रही है. ऐसे में जिन लोगों के पास इंसुलिन दवा पर्याप्त मात्रा से ज्यादा है, वो जरूरतमंद लोगों को इसे मुफ्त बांट रहे हैं.

ऐबिगेल हांसमेयर को शुक्रिया कहती हुई 52 साल की एनेट जेंटिल बैग ले लेती हैं. फिर जल्दी से दवा को गिनते हुए कहती हैं, "यकिन मानिए बीते कुछ दिन जीवन के बेहद कठिन दिनों में से थे." जेंटिल का शुगर लेवल कुछ दिनों से काफी ज्यादा था. जेंटिल अमेरिका के गरीब तबके में नहीं आती. उन्हें हर महीने 1200 डॉलर सरकार की ओर से स्वास्थ्य बीमा के तौर पर मिलता है लेकिन यह बीमा उनकी दवाओं का खर्चा नहीं उठाता.

जेंटिल ने हांसमेयर से जो इंसुलिन का पैकेट खरीदा है वही पैकेट उन्हें फार्मेसी की दुकान में हजारों डॉलर का मिलता. 29 साल की हांसमेयर बेरोजगार हैं. उन्हें टाइप वन डायबिटीज है. ये ऐसा डायबिटीज है जिसमें अग्न्याशय खुद इंसुलिन नहीं बना पाता जो कि शरीर के लिए बेहद जरूरी है. कई मरीजों को एक दिन में कई बार बाहर से इंसुलिन लेना पड़ता है, कई बार पूरे जीवन. ये दोनों महिलाएं एक दूसरे को सोशल मीडिया साइट फेसबुक के जरिए मिलीं. दोनों ने अपनी समस्याओं को साझा किया. हांसमेयर ने उन्हें मुफ्त में इंसुलिन देने का ऑफर किया. इंसुलिन का कोड वर्ड भी रखा गया है. नाम है "लाइफ वॉटर".

आसमान छूती इंसुलिन की कीमत

ज्यादातर इंसुलिन का स्टॉक उन लोगों के परिवार वालों से आता है जिनके घर में डायबिटीज के मरीज अब जीवित नहीं हैं लेकिन अपने पीछे इंसुलिन की कई डोज छोड़ गए हैं. अमेरिका में फार्मा कंपनी दवाओं को ऊंची कीमत पर बेचते हैं. हांसमेयर कहती हैं, "हम गरीब नहीं हैं." उनके पति कंपनी में काम के साथ छोटा सा व्यवसाय करते हैं. हांसमेयर के पास अपनी कार और घर है. उनके पति की कंपनी उन्हें स्वास्थ्य बीमा पर सब्सिडी नहीं देती हैं. वह राज्य के नियम के मुताबिक गरीब नहीं है लेकिन इंसुलिन जैसी महंगी दवाएं खरीदने लायक अमीर भी नहीं हैं.

हांसमेयर जैसे ही अमेरिका में करीब दो करोड़ लोग हैं जिनको स्वास्थ्य बीमा में सब्सिडी नहीं मिलती. समाचार एजेंसी एएफपी से बातचीत में हांसमेयर कहती हैं, "मेरा पूरा जीवन इंसुलिन को किसी भी तरह से सस्ते दामों में पाने में चला गया है." कुछ साल पहले उन्होनें बीमाकर्ता के खिलाफ इंसुलिन पंप की लड़ाई जीती. जिससे अब वह कम्प्यूटरीकृत उपकरण का प्रयोग कर रही हैं जो लगातार हार्मोन की सही मात्रा जारी करता है. हांसमेयर अपने इलाके में डायबिटिक मरीजों से जुड़ी रहती हैं. जिसको भी इंसुलिन की जरूरत होती है उसके लिए वह तुरंत मदद देने के लिए हाजिर रहती हैं.

फार्मा कंपनियों के खिलाफ

एक अन्य अमेरिकी निकोल स्मिथ हॉल्टइंसुलिन की बड़ी मात्रा अपने बड़े से घर के बेसमेंट के फ्रिज में रखती हैं. निकोल की मानें तो उनके फ्रिज में करीब 50 हजार डॉलर की इंसुलिन की शीशी, सिंरिंज रखी हैं. स्मिथ हॉल्ट मानती हैं कि ऐसी दवाओं को इतनी बड़ी मात्रा में घर पर रखना गैरकानूनी है लेकिन उनके लिए यह लड़ाई निजी है. स्मिथ हॉल्टकहती हैं, "हम निक की तरह किसी और को खोना नहीं चाहते. " उनका बेटा निक डायबिटीज का मरीज था. जिसकी 2017 में इंसुलिन की कमी से मौत हो गई. वह होटल में नौकरी करता था लेकिन उसका वेतन इंसुलिन के खर्चे उठाने के लिए काफी नहीं थी. इंसुलिन की कमी से अपने बेटे को खोने के बाद स्मिथ हॉल्ट समाजसेवी बन गई हैं. उन्होंने फार्मा कंपनियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. वह कहती हैं, "मुझे लगता है कहीं ना कहीं मै भी अपने बेटे की मौत की जिम्मेदार हूं. काश वो मुझसे मदद मांग लेता."

वहीं कई लोग सस्ते दामों में इंसुलिन लेने के लिए कनाडा भी जा रहे हैं. 47 साल के ट्रेविस पॉलसन हर तीन महीने में 2 घंटे गाड़ी चलाकर उत्तरी मिनेसोटा से कनाडा के फोर्ट फ्रांसिस जाते हैं. पॉलसन को कस्टम विभाग भी तब तक दवाईयां लाने से मना नहीं करता जब तक कि वो सिर्फ तीन महीने की लेकर आते हैं. वो कहते हैं "नोवोलॉग" नाम की कंपनी अमेरिका में इंसुलिन 345 डॉलर में बेचती है. कनाडा में "नोवोरैपिड" नाम की फार्मा कंपनी वही इंसुलिन 25 डॉलर की बेचती है. गणित बहुत साफ है. पॉलसन के मुताबिक, "यह फार्मा कंपनियों का लालच है और कुछ नहीं."

एसबी/आरपी (एएफपी )

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