कतर की महिला अधिकार कार्यकर्ता की हत्या की आशंका क्यों | दुनिया | DW | 16.12.2021

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दुनिया

कतर की महिला अधिकार कार्यकर्ता की हत्या की आशंका क्यों

कतर की महिला अधिकार कार्यकर्ता नूफ अल-मादीद ने कहा था कि अगर वह सोशल मीडिया पर नहीं लिख रही हैं, तो वह मर चुकी हैं. नूफ ने अपने परिवार से खतरा जताया था. 13 अक्टूबर, 2021 के बाद से ही नूफ ने कोई पोस्ट नहीं डाली है.

"मैंने जिंदगी जी. खुद को कत्ल होने से बचाने के लिए जो हो सकता था, किया."

"कतर लौट आने का मुझे अब भी कोई पछतावा नहीं है. मुझे अच्छी तरह पता था कि ऐसा हो सकता है."

ये पंक्तियां कतर की महिला अधिकार कार्यकर्ता नूफ अल-मादीद के कुछ आखिरी ट्वीटों का हिस्सा हैं. नूफ सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय और मुखर रहती थीं. वह कतर में महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव की आलोचक थीं. महिला अधिकारों के लिए संघर्ष करती थीं. अपनी सोशल मीडिया पोस्टों में उन्होंने कई बार आशंका जताई थी कि उनकी हत्या की जा सकती है.

यह आरोप भी लगाया था कि उनका परिवार पहले भी तीन बार उन्हें मारने की कोशिश कर चुका है. नूफ ने यह भी कहा था कि अगर वह सोशल मीडिया पर नहीं लिख रही हैं, तो इसका मतलब है वह मर चुकी हैं. 13 अक्टूबर की शाम से ही नूफ के सोशल मीडिया अकाउंट मौन हैं.

ऐसी थीं पैगंबर मोहम्मद की बीवी

इस चुप्पी के चलते मानवाधिकार संगठन नूफ के लिए आशंकित हैं. इनमें से ही एक संस्था है, गल्फ सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स (जीसीएचआर). यह गैर-सरकारी संगठन खाड़ी देशों में मानवाधिकार उल्लंघन के मामले दर्ज करता है. जीसीएचआर का कहना है कि उसे मिली खबरों के मुताबिक, नूफ की या तो हत्या कर दी गई है या फिर उन्हें बंदी बना लिया गया है.

क्या है नूफ की कहानी?

नूफ 23 साल की हैं. घर में उनपर काफी बंदिशें थीं. मार्च 2021 में 'ह्यूमन राइट्स वॉच' (एचआरडब्ल्यू) को दिए एक इंटरव्यू में नूर ने अपनी आपबीती सुनाई थी, "सालों तक घर में मेरा उत्पीड़न होता रहा. मेरे कहीं आने-जाने पर पाबंदी थी. मुझे सिर्फ स्कूल जाने की इजाजत थी. वहां से सीधे घर लौटना होता था. मैं हुक्म न मानती, तो मुझे मार पड़ती."

नूफ ने बताया था कि एक समय ऐसा आया, जब उन्हें अपनी जिंदगी और शारीरिक गरिमा पर खतरा महसूस होने लगा. वह घर छोड़कर जाना चाहती थीं. मगर कतर के कानून में महिलाओं पर कई तरह के प्रतिबंध हैं. 25 साल से कम की कुंआरी लड़कियां अपने पुरुष अभिभावक (पिता, भाई, चाचा, दादा) की इजाजत के बिना देश से बाहर नहीं जा सकती हैं. शादीशुदा महिलाएं अपने पति की इजाजत बिना बाहर तो जा सकती हैं. लेकिन पति चाहे, तो अदालत में अर्जी देकर पत्नी की यात्रा बैन करवा सकता है.

घर से भाग गईं नूफ

12 नवंबर, 2019 को 21 साल की नूफ ने चुपके से अपने पिता का मोबाइल चुराया. इस मोबाइल से उन्होंने 'मैटरश ऐप' खोला. यह कतर के मिनिस्ट्री ऑफ इंटीरियर का ऐप है. गाड़ी चलाने के लाइसेंस से लेकर चालान भरने तक, दो सौ से भी ज्यादा सेवाएं इस ऐप से जुड़ी हैं. नूफ ने पिता के मोबाइल से यह ऐप खोला और अपनी विदेश यात्रा के लिए जरूरी उनकी रजामंदी को खुद ही प्रॉसेस कर दिया. फिर वह बेडरूम की खिड़की फांदकर एयरपोर्ट पर पहुंची. यहां से वह पहले यूक्रेन और फिर ब्रिटेन गईं. नूफ ने ब्रिटेन में शरण मांगी.

घर छोड़कर जाने के करीब दो साल बाद 30 सितंबर, 2021 को नूफ कतर लौटने के लिए ब्रिटेन से निकलीं. उन्होंने ब्रिटेन में शरण के लिए दी गई अपनी अर्जी भी वापस ले ली. इसकी वजह बताते हुए नूफ ने एक वीडियो में कहा कि कतरी प्रशासन ने उन्हें जरूरी सुरक्षा मुहैया करने का वादा किया है. यह आश्वासन भी दिया है कि लौटने के बाद उनके मानवाधिकारों का भी सम्मान किया जाएगा.

लौटने के बाद क्या हुआ?

नूफ के मुताबिक, कतर लौट आने के बाद उन्हें जान से मारने की धमकियां मिलने लगीं. उन्होंने अधिकारियों से सुरक्षा मांगी. नूफ ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्हें मदद नहीं मिल रही है. नूफ ने आशंका जताई कि उनकी हत्या हो सकती है. ट्विटर पर डाले गए एक वीडियो में उन्होंने आरोप लगाया कि परिवार ने तीन बार उनकी जान लेने की कोशिश की है.

नूफ के मुताबिक, उनका उत्पीड़न करने वालों में उनके पिता मुख्य थे. उन्हीं की वजह से वह घर छोड़कर भागी थीं. लेकिन कतर लौटने के बाद वह जिस होटल में ठहरी हुई थीं, उनके पिता वहां भी पहुंच गए. नूफ ने अपने ट्वीट में कतर के शासक तमीम बिन हमद अल थानी से भी मदद मांगी थी. नूफ ने लिखा था, "शेख तमीम ही मेरी जान पर मंडरा रहे इस खतरे से मुझे बचा सकते हैं."

रोजाना कई पोस्ट करने वाली नूफ ने 13 अक्टूबर, 2021 के बाद से ही कोई पोस्ट नहीं डाली है. इसके पहले उन्होंने अपने फॉलोअरों से कहा था कि अगर वह सोशल मीडिया पर चुप हो जाती हैं, तो वे उनकी परवाह करें. उनके लिए आवाज उठाएं. इसीलिए उनके समर्थकों ने सोशल मीडिया पर नूफ के लिए लिखना शुरू किया. #whereisNoof हैशटैग लगाकर वे सवाल करने लगे कि नूफ सुरक्षित हैं या नहीं.

15 अक्टूबर को एचआरडब्ल्यू ने भी नूफ का मुद्दा उठाते हुए उनकी सुरक्षा के लिए चिंता जताई. एचआरडब्ल्यू की वरिष्ठ महिला अधिकार शोधकर्ता रोथना बेगम ने न्यूज एजेंसी एएफपी से कहा, "वह खतरे में हैं."

मारे जाने की आशंका

अब जीसीएचआर ने दावा किया है कि उन्हें मिली जानकारियों के मुताबिक, नूफ या तो मारी जा चुकी हैं या कैद में हैं. 14 दिसंबर को संगठन ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया कि उच्च अधिकारियों ने नूफ को मिली पुलिस सुरक्षा हटवा दी थी. पुलिस को यह निर्देश भी दिया गया कि वे नूफ को उसके परिवार के हवाले कर दें. जीसीएचआर ने आशंका जताई कि 13 अक्टूबर की शाम परिवार ने नूफ को अगवा कर लिया. शायद इसी रात परिवार के सदस्यों ने नूफ को मार दिया.

यह डर भी जताया जा रहा है कि अगर हत्या की खबर सही न भी हो, तो भी नूफ को कैद में रखने की आशंका बनी हुई है. हो सकता है उन्हें अलग-थलग रखा गया हो. सोशल मीडिया तक उनकी पहुंच रोक दी गई हो. उनसे अभिव्यक्ति की आजादी छीन ली गई हो. जीसीएचआर के मुताबिक, उन्होंने इन खबरों का सच जानने की कोशिश की. लेकिन सरकार ने इस मुद्दे पर कोई भी आधिकारिक बयान देने से इनकार कर दिया.

प्रशासन की ओर से मीडिया को दी गई जानकारी में कहा गया है कि नूफ सुरक्षित हैं. सेहतमंद हैं. मगर प्रशासन ने इन दावों की पुष्टि से जुड़ा कोई सबूत नहीं दिया है.

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