फेसबुक पर गाली देने वालों से छुटकारा कैसे मिले! | दुनिया | DW | 20.05.2016
  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

फेसबुक पर गाली देने वालों से छुटकारा कैसे मिले!

फेसबुक पर आपकी पोस्ट पर कोई गालियां देना शुरू कर दे तो आप क्या करते हैं? परेशान होते हैं? प्रताड़ित होते हैं? कानून-व्यवस्था से उम्मीद करते हैं? आखिरी ऑप्शन तो भूल ही जाएं.

सोशल मीडिया पर दो तरह के लोग सक्रिय हैं. एक जो लिखते हैं और दूसरे जो बकते हैं. लिखने वाले लोग अच्छा भी लिखते हैं और बुरा भी. लेकिन बकने वाले लोग बस बकते हैं. और जो वे बकते हैं, उनमें सबसे ज्यादा स्थान मां और बहन को दिया जाता है. अब कोई कहे कि जिस देश में महिलाओं को संसद में सिर्फ 30 फीसदी आरक्षण दिलाने के लिए दो दशक से लड़ाई हो रही है और अब तक इस मुद्दे पर सहमति हासिल न कर पाने के कारण नाकाम रही है, वहां ये अजब संयोग नहीं है कि ये बकने वाले मां और बहनों को इतना स्थान दे रहे हैं.

लेकिन महिलाएं इस बात को लेकर कतई खुश नहीं हैं. उन्हें यह स्थान नहीं चाहिए. इन महिलाओं के लिए पहली बार एक आधिकारिक आवाज उठी जिसे उसी वक्त आधिकारिक तौर पर दबा दिया गया है. केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने इन बकने वालों पर जिन्हें सोशल मीडिया ट्रॉल्स कहते हैं, नियंत्रण की जरूरत की बात कही है. लेकिन एक अन्य और ज्यादा ताकतवर केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि सहन करना सीखो.

ये बकने वाले काफी लोकतांत्रिक और समदर्शी हैं. ये गाली बकते वक्त नहीं देखते कि सामने पुरुष है या महिला. अब पुरुष तो अक्सर पलट कर गाली दे देते हैं लेकिन महिलाएं सिर्फ खून का घूंट पीकर रह जाती हैं क्योंकि मां-बहन का जिक्र आएगा तो उन पर खुद पर ही गाली लगेगी ना. और ऐसा सबसे ज्यादा महिला पत्रकारों के साथ होता है.

ऑनलाइन होने वाले इन हमलों को मेनका गांधी यौन हिंसा मानती हैं. भारतीय टीवी चैनल एनडीवी से बातचीत में उन्होंने कहा कि महिला समानता और अधिकार के लिए सरकार के नए एजेंडे में इस बात पर गंभीरता से विचार हो रहा है कि इंटरनेट पर महिलाओं के खिलाफ होने वाली इस क्रूरता से कैसे निपटा जाए. उन्होंने कहा कि ऑनलाइन गाली-गलौज को हिंसा ही माना जाना चाहिए.

लेकिन सरकार का आधिकारिक रूख है कि लोगों को सहन करना आना चाहिए, नजरअंदाज करना आना चाहिए. सरकार चाहती है कि आपके फेसबुक पोस्ट पर कोई गाली दे तो उसे नजरअंदाज करें. केंद्रीय वित्त और सूचना प्रसारण मंत्री अरुण जेटली ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा, “अगर आप मुझसे पूछें कि ट्रॉलिंग पर नियंत्रण संभव है या नहीं तो मैं कहूंगा कि इस तरह की सेंसरशिप संभव नहीं है.”

एक आम समझ है कि गाली-गलौज करने वाले वाले ज्यादातर बीजेपी के समर्थक होते हैं. यह समझ गलत भी हो सकती है लेकिन बीजेपी को इस सवाल का कई बार जवाब देना पड़ा है और उसका जवाब यही होता है कि हमारा इन लोगों से कोई लेना-देना नहीं. जेटली ने कहा, “ट्रॉलिंग तो लोग करते हैं. पार्टी का ऐसी गतिविधियों से कोई लेना-देना नहीं है. पार्टी अपने चुने हुए पदासीन लोगों और सदस्यों को ऐसा करने से रोक सकती है लेकिन ट्रॉलिंग लोग व्यक्तिगत स्तर पर करते हैं. और मुझे नहीं लगता कि इनमें से ज्यादातर लोग पार्टी के अनुशासन से बंधे हैं.”

जेटली ने कहा कि हमें इस सबके साथ जीना सीखना होगा. उन्होंने कहा, “हमें इन्हें नजरअंदाज करना होगा. इन्हें सहन करना होगा. हमें अपने स्तर पर ही कुछ रणनीति बनानी होगी.”

संदेश साफ है, अपने आप निपटिए फेसबुकिया बकैतों से.

विवेक कुमार

संबंधित सामग्री

विज्ञापन