कैसे बनते हैं जर्मनी में पत्रकार | दुनिया | DW | 12.10.2016
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दुनिया

कैसे बनते हैं जर्मनी में पत्रकार

हेनरी नानेन जर्नलिस्ट स्कूल जर्मनी का नामी पत्रकारिता स्कूल है. इस साल 1800 आवेदकों में से 16 चुने गए हैं. एडमिशन कमिटी का कहना है कि अब तक कोई सभी सवालों के सही जवाब नहीं दे पाया है.

हैम्बर्ग में स्थित इस पत्रकारिता संस्थान में दाखिले की प्रक्रिया अत्यत कठिन है. दाखिले के बाद ट्रेनिंग बहुत ही सख्त और व्यापक है. इसीलिए इसे देश का सबसे प्रतिष्ठित पत्रकारिता कॉलेज माना जाता है. जर्मनी के प्रमुख प्रकाशनगृह ग्रुनर+यार, श्पीगेल और साइट इसे चलाते हैं. ट्रेनिंग 18 महीने की होती है और इस दौरान चुने गए 16 उम्मीदवारों को प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए पत्रकारिता का हुनर सिखाया जाता है.

इस स्कूल में दाखिला पाने की संभावना इतनी कम होती है कि चुने जाने के लिए उम्मीदवारों का खास होना जरूरी है. इसलिए उन्हें अपने आवेदन के साथ एक टेक्स्ट लिखकर भेजना होता है. और टेक्स्ट और बाकी बायोडाटा के आधार पर चुने जाते हैं उनमें से 70 लोग. असल परीक्षा तो इनकी होती है, तीन दिन का टेस्ट और 72 घंटे का तनाव.

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पिछले सालों में टेस्ट के परिणामों में बहुत बदलाव नहीं आया है. जर्नलिस्ट स्कूल के डायरेक्टर आंद्रेयास वोल्फर्स का कहना है कि ज्यादातर उम्मीदवार 40 से 70 प्रतिशत के बीच मार्क्स पाते हैं. पिछले दशकों में अब तक कोई भी सारे सवालों का जवाब नहीं दे पाया है. वोल्फर्स का मानना है कि ऐसा संभव भी नहीं है क्योंकि सवाल विभिन्न इलाकों से पूछे जाते हैं. किसी के लिए भी हर सवाल का उत्तर जानना संभव नहीं.

तीन दिनों के टेस्ट के दौरान उम्मीदवारों की सामान्य ज्ञान की परीक्षा ली जाती है. सामान्य ज्ञान के टेस्ट में उनसे विभिन्न सवाल पूछे जाते हैं, वाक्यों को पूरा करने के लिए कहा जाता है, बयानों की पुष्टि के लिए कहा जाता है. इस सेक्शन में इस साल 64 सवाल पूछे गए. टेस्टों में तस्वीरों का टेस्ट भी शामिल है जिसमें उम्मीदवारों से यह अपेक्षा की जाती है कि उन्हें तस्वीरों पर दिखाने वाले लोगों या घटनाओं की जानकारी हो. और अंतिम टेस्ट होता है रिपोर्ट बनाने का. जो जितनी क्षमता दिखा पाए, उसका उतना ही फायदा.

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तीन दिन के टेस्ट के बाद चुने जाते हैं जर्मनी के सबसे अच्छे पत्रकारिता के कैंडिडेट. उन्हें 18 महीने की ट्रेनिंग मिलती है प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पत्रकारिता के हुनर में. ट्रेनिंग दो हिस्सों में होती है, सेमिनार ब्लॉक के रूप में सैद्धांतिक ट्रेनिंग और उसके बाद जर्नलिस्ट स्कूल से जुड़े विभिन्न मीडिया हाउसेस के किसी विभाग में व्यवहारिक ट्रेनिंग ताकि सेमिनार में सीखी गई कारीगरी को व्यवहार में परखा जा सके और तराशा जा सके. ट्रेनिंग मुफ्त है और ट्रेनी को महीने में करीब 764 यूरो की स्कॉलरशिप मिलती है.

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