रिटायर होकर भी क्यों काम करना चाहते हैं ये जापानी! | दुनिया | DW | 22.10.2021
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दुनिया

रिटायर होकर भी क्यों काम करना चाहते हैं ये जापानी!

जापान में कई लोग सेवानिवृत्ति के बाद आराम करने की बजाय अपने कौशल और ज्ञान का उपयोग अपने समाज के हित में करना पसंद करते हैं. ये लोग रिटायरमेंट के बाद फिर काम पर लौट जाते हैं ताकि मानसिक और शारीरिक रूप से फिट बने रहें.

अत्सुको कासा 68 साल की हैं. काफी तेज और ऊर्जावान हैं और जीवन की रफ्तार धीमी करने का उनका कोई इरादा भी नहीं है. कासा जापान के शहर योकोहामा में अपने घर के करीब सिल्वर जिनजई सेंटर में तब तक काम करना जारी रखने की योजना बना रही हैं, जब तक वो ऐसा कर सकती हैं.

वह मजाक में कहती हैं कि रिटायरमेंट की उम्र से वह अभी बहुत छोटी हैं. कासा दूसरों की मदद करना चाहती हैं.

कासा एक सौंदर्य प्रसाधन कंपनी के लेखा विभाग में काम करती थीं और वह उन बुजुर्ग जापानी नागरिकों में से एक हैं, जिन्होंने बागवानी, दोस्तों के साथ मिलने-जुलने और पोते-पोतियों की देखभाल करने जैसे पारंपरिक सेवानिवृत्ति शौक अपनाने की बजाय कार्यस्थल पर लौटने का विकल्प चुना है.

कुछ लोगों का तो मानना है कि रिटायरमेंट के बाद वे सिल्वर जिनजई संगठन के जरिए कुछ अतिरिक्त आय अर्जित करते हैं लेकिन ज्यादातर लोग यह काम सिर्फ पैसों के लिए ही नहीं करते. जापान में करीब सात लाख लोग इस देशव्यापी संगठन के साथ पंजीकृत हैं जिसकी शुरुआत साल 1975 में टोक्यो में हुई थी. इन बुजुर्ग लोगों का इसके पीछे मुख्य उद्देश्य खुद को व्यस्त रखना और समाजसेवा करना है.

वीडियो देखें 02:05

कोस्टा रिका के मस्त मौला बुजुर्ग

अन्य लोगों की मदद करना

डीडब्ल्यू से बातचीत में कासा कहती हैं, "जैसे-जैसे मैं बड़ी होने लगी, मुझे लगा कि मेरी दुनिया छोटी होती जा रही है. एक सार्थक जीवन जीने के लिए मैंने एक नौकरी शुरू करने का फैसला किया जहां मैं अन्य लोगों की मदद कर सकूं. मेरे पास कोई विशेष कौशल नहीं है लेकिन मैं हमेशा उदार मन से काम करती हूं.”

कासा योकोहामा में विकलांग लोगों के लिए एक सहायता समूह में काम करती हैं. वह एक कैफे में विशेष सुविधा में भोजन तैयार करने में मदद करती हैं. वह कहती हैं, "मैं ऐसी दुनिया में काम करने की चुनौतियों का सामना करना चाहती थी जिसका मैंने पहले कभी अनुभव न किया हो.”

कासा कहती हैं, "मैं इस नौकरी को पसंद करती हूं. लोग ईमानदार, साफ-सुथरे और दयालु हैं. दरअसल, मैं उनसे प्यार करती हूं. साथ ही, उन कर्मचारियों के साथ काम करना जो आपकी स्वतंत्रता का समर्थन करते हैं, मेरे जीवन को समृद्ध करते हैं, इसके लिए मैं उन लोगों की आभारी हूं.”

संगठन के अध्यक्ष ताकाओ ओकाडा कहते हैं कि योकोहामा सिल्वर जिनजई केंद्र के साथ काम करने के लिए लगभग दस हजार लोग पंजीकृत हैं और हाल के वर्षों में यह संख्या बढ़ रही है. कार्यालय के दस्तावेजों में सबसे वृद्ध व्यक्ति 100 वर्ष के हैं.

ओकाडा कहते हैं, "ऐसे लोगों की संख्या बढ़ रही है जो स्वस्थ हैं और काम करने के लिए बहुत उत्साहित हैं. हमारे सदस्य क्यों काम करना चाहते हैं इसके कई कारण हैं. निश्चित तौर पर, कुछ तो आर्थिक जरूरतों के लिए करते हैं लेकिन बहुत से लोग अपने स्वास्थ्य को बनाए रखना चाहते हैं जबकि कुछ अन्य लोग समाज में योगदान देना चाहते हैं या अपने अनुभव और कौशल का अधिकतम लाभ उठाना चाहते हैं.” 

रोजगार के अवसर

ओकाडा कहते हैं कि सिल्वर जिनजाई के कार्यकर्ता आमतौर पर सप्ताह में अधिकतम 20 घंटे काम करते हैं यानी करीब दो या तीन दिन. ये लोग आमतौर पर सुपरमार्केट में काम करते हैं जैसे क्लीनर, माली, रिसेप्शनिस्ट, बढ़ई या चाइल्ड केयर असिस्टेंट के रूप में या फिर बुजुर्ग लोगों की देखभाल करने में मदद करने जैसे काम करते हैं.

अन्य लोग कंप्यूटर एडेड डिजाइन में तकनीक का इस्तेमाल करते हैं या शहर की सड़कों पर कूड़ा उठाने में मदद करते हैं. ओकाडा कहते हैं कि विदेशी भाषा कौशल वाले लोगों की खासतौर पर मांग रहती है.

मेहनताने का भुगतान अलग-अलग दरों पर किया जाता है और वे देश भर में अलग-अलग होते हैं. लेकिन घरेलू कामों में सहायता से आमतौर पर सिल्वर जिन्जई कार्यकर्ता प्रति घंटे 870 येन यानी 6.70 यूरो तक कमा लेते हैं. इसके अलावा खिड़कियों की सफाई का मेहनताना 910 येन है और बागवानी का 1,040 येन है. उत्तरी प्रान्त में बर्फ साफ करने जैसे कठिन काम की मजदूरी 1,855 येन प्रति घंटा है.

अतिरिक्त आय प्रदान करने और देश की बुजुर्ग आबादी को काम में व्यस्त रखने के साथ-साथ यह योजना जापान में श्रमिकों की बढ़ती कमी को दूर करने में भी मदद कर रही है.

वीडियो देखें 03:49

100 साल के पार जिंदगी

जापान में श्रमिकों की भारी कमी

जापान में हालांकि देश में काम करने वालों की उम्र सीमा बढ़ रही है लेकिन जन्म दर गिर रही है और बड़ी संख्या में लोग वृद्धावस्था में जी रहे हैं.

मौजूदा समय में, चार में से एक जापानी व्यक्ति की उम्र 65 साल से अधिक है और यह अगले 15 वर्षों में तीन में से एक तक पहुंचने का अनुमान है. इसका मतलब यह हुआ कि जापान की जनसंख्या जर्मनी की तुलना में दोगुनी और फ्रांस की तुलना में चार गुना तेज गति से वृद्ध हो रही है.

सरकार ने इस प्रवृत्ति को बदलने के उपायों की शुरुआत की है, खासतौर पर अप्रैल में अनिवार्य सेवानिवृत्ति की आयु को 65 से 70 तक बढ़ाकर, लेकिन विश्लेषकों का सुझाव है कि जापान में साल 2030 तक 64.4 लाख श्रमिकों की संभावित कमी होगी.

और, हालांकि सिल्वर जिनजाई नेटवर्क मौजूदा श्रम की कमी में मदद कर रहा है लेकिन विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि भविष्य में इस कमी की पूर्ति होने की संभावना है, खासकर अगर बेहतर भुगतान विकल्प उपलब्ध हैं.

तोहोकू विश्वविद्यालय में बुजुर्ग लोगों और समाज पर शोध कर रहे प्रोफेसर हिरोशी योशिदा कहते हैं, "वापस लौटकर 1975 के दौर में आएं तो जब इसे पहली बार स्थापित किया गया था तब ज्यादा से ज्यादा बुजुर्ग लोग थे जो सेवानिवृत्ति के बाद काम करना चाहते थे क्योंकि उन्हें लगा कि यह उन्हें उम्र बढ़ने के साथ फिट रखेगा.”

वह कहते हैं, "हालांकि बुजुर्ग लोग आज पहले की तुलना में ज्यादा स्वस्थ और ऊर्जावान हैं और वह बस खुद को बहुत बूढ़ा नहीं मानते. संस्थान से जुड़े लोगों का समूह काम करना चाहता है लेकिन वे एक बेहतर वेतन भी चाहते हैं, इसलिए वे सिल्वर जिनजाई प्रणाली के बाहर नौकरियों की तलाश कर रहे हैं.”

वीडियो देखें 03:46

क्या यही है हमेशा जवान रहने की चाबी

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