भारत में हो सकते हैं यूरोप जैसे आईएस हमले | दुनिया | DW | 05.08.2016
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दुनिया

भारत में हो सकते हैं यूरोप जैसे आईएस हमले

भारत जैसे बड़े देश में कुछ सौ आईएस संदिग्धों का होना कोई बड़ी चिंता की बात नहीं होनी चाहिए फिर भी सरकार चिंतित है और हर हाल में इन संदिग्धों की पहचान कर स्थिति बिगड़ने को रोकना चाह रही है.

सऊदी अरब ने भारतीय युवाओं को अल कायदा और पाकिस्तानी आतंकी संगठनों के लिए भर्ती करने वाले एक संदिग्ध को गिरफ्तार कर लिया है. भारत सरकार की सुरक्षा एजेंसियां इस समय सऊदी अरब के साथ संदिग्ध शबील अहमद की पहचान तय करने में लगी हैं. उसकी गिरफ्तारी एक लुक आउट नोटिस जारी करने के बाद हुई है. संदिग्ध के बड़े भाई ने 2007 में ब्रिटेन के ग्लासगो में एक आत्मघाती हमला किया था जिसमें उसकी मौत हो गई थी.

भारत सरकार का दावा है कि आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट यानी आईएस ने भारत में बहुत कम युवकों को आकर्षित किया है. इसके बावजूद आईएस के प्रभाव को रोकने में सरकार कोई कोताही नहीं बरतना चाहती. आईएस लड़ाकों की आत्मघाती शैली से कुछ लोगों के द्वारा ही बड़ा नुकसान पहुंच सकता है, इस आशंका को देखते हुए सरकार सभी संदिग्धों की पहचान जुटाने में लगी हुई है.

जानें, क्या है आईएस

‘लोन वुल्फ अटैक' का खतरा

महाराष्ट्र के परभणी जिले से पिछले महीने आईएस के दो संदिग्धों की गिरफ्तारी और उनसे हुई पूछताछ में खुलासा हुआ है कि आईएस, मुंबई और देश के बड़े शहरों में ‘लोन वुल्फ अटैक' करने की योजना बना रहा है. ‘लोन वुल्फ' यानी कोई ऐसा व्यक्ति जो किसी धार्मिक आतंकवादी संगठन के विचारों से प्रभावित होकर किसी सरकार को सबक सिखाने के लिए अकेला ही निकल पड़े. ऐसी आशंका है कि आईएस, भारत में ऐसे कई ‘लोन वुल्फ' तैयार कर चुका है.

महाराष्ट्र एटीएस लगातार पूछताछ में परभणी से पकड़े गए नासेर बिन चाऊस ने बताया कि वह ‘लोन वुल्फ अटैक' करने वाला था. कुछ दिन पहले ही ‘लोन वुल्फ अटैक' की तर्ज पर ही फ्रांस में आतंकी हमला हुआ था, जहां एक आतंकवादी ने ट्रक से सैक़ड़ों लोगों को कुचल दिया.

तस्वीरों में देखें, कितना क्रूर है आईएस

सूचना और खुफिया तंत्र पर ध्यान

आईएस के बढ़ते खतरे और किसी संभावित हमले से निपटने के उपायों पर केंद्र की सरकार राज्य सरकारों के साथ लगातार संपर्क में है. आतंक के खाते से निपटने के लिए केंद्रीय और राज्यों के खुफिया तंत्र के बीच बेहतर तालमेल और सूचना प्रवाह को दुरुस्त करने पर ज़ोर दिया जा रहा है. निश्चित अंतराल में बैठक और समीक्षा पर जोर दिया जा रहा है. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, गृहमंत्रालय और राज्य पुलिस के बीच खुफिया सूचना के प्रवाह को गति देने और तालमेल बढ़ाने पर केंद्र सरकार जोर दे रही है. सुरक्षा और खुफिया तंत्र को मजबूत करने की सार्थक कोशिशें की गयी है. हालांकि इसमें हुई चूक के चलते देश को गंभीर परिणाम भी भुगतने पड़े हैं.
आतंकी मामलों की जांच के किए बनी एजेंसी एनआईए ना केवल सफलतापूर्वक काम कर रही है और आतंकी मॉड्यूल के साजिशों को नाकाम करने में कामयाब रही है. खुफिया सूचना के आदान प्रदान के लिए मल्टी एजेंसी सेंटर बेहतर तालमेल के साथ काम कर रहा है. नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड बनाने का काम भी चल रहा है. वैसे, नेशनल काउंटर टेररिज्म सेंटर बनाने का काम राजनैतिक वजहों से रुका पड़ा है.
आईएस के वैचारिक प्रभाव रोकने के लिए साइबर सेल को भी सक्रिय किया गया है. वह इंटरनेट व वेबसाइट्स पर आईएस की गतिविधियों पर बराबर नजर रख रही है जिसके चलते एनआईए को संदिग्धों तक पंहुचने में कामयाबी मिली है. आईएस एवं इस तरह के आतंक से लड़ने की कोशिश को मजबूती देने के लिए भारतीय एजेंसिया अमेरिका, रूस, फ़्रांस और अन्य मित्र देशों की एजेंसियों के साथ भी संपर्क में है.

एशियाई देशों से आईएस को मिले जिहादी

राज्य सरकारों के साथ समन्वय पर ज़ोर

संदिग्धों से पूछताछ और खुफिया जानकारी के मुताबिक, आईएस भारत में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए इंडियन मुजाहिदीन जैसे आतंकी गुटों की मदद लेने की कोशिश कर रहा है. केरल, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, असम, बिहार, तमिलनाडु, कर्नाटक, और जम्मू कश्मीर जैसे राज्यों के गरीब मुसलमान युवाओं पर आतंकी संगठन की नजर है. हालांकि अब तक पकड़े गए ज्यादातर युवा पढ़े लिखे हैं. सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक अब तक करीब 100 भारतीय आंतकी संगठन आईएस में शामिल हो गए हैं. इसके अलावा आईएस भटके हुए युवाओं को जोड़ने में की कवायद में भी सक्रिय है.

केंद्र सरकार, राज्यों की सरकारों के साथ मिल कर ऐसे युवाओं पर खास नजर रख रही हैं जो आतंक के शिकार हो सकते हैं. सरकार ऐसे लोगों की सोशल मीडिया की गतिविधियों पर नजर रख रही है जो आतंकी दुष्प्रचार का निशाना बन सकते हैं. साथ ही साथ उन्हें कल्याणकारी एवं रोजगार योजनाओं के जरिए मुख्यधारा में शामिल करने के लिए प्रयास भी किये जा रहे हैं. अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय अल्पसंख्यक समुदाय के युवाओं के लिए विभिन्न कल्याणकारी एवं रोजगार से जुड़ी योजनाएं पर काम कर रहा है. विशेषकर संवेदनशील इलाकों में इस तरह की योजनाएं शुरू करने पर जोर दिया जा रहा है. केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हंसराज अहीर का का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकारों ने युवकों को कट्टरपंथ से निकालने के लिए विभिन्न कार्यक्रम शुरू किए हैं.

आईएस की ओर से लड़ने की इच्छा रखने वाले भारतीयों की संख्य मुट्ठी भर ही है, इसके बावजूद सरकार की चिंता और और उन्हें रोकने का प्रयास जायज है. क्योंकि ये मुट्ठी भर लोग उन गरीब बेरोजगार या धार्मिक रूप से कट्टर युवाओं के लिए वायरस का काम कर सकते हैं जो स्वयं को किसी ना किसी रूप में अन्याय का शिकार मानते हैं.

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