टिक टॉक बंद हुआ तो क्या, हुनर कहीं और दिखाएंगे | भारत | DW | 04.07.2020
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भारत

टिक टॉक बंद हुआ तो क्या, हुनर कहीं और दिखाएंगे

टिक टॉक की खास बात यह थी कि उसने उन लोगों को सिलेब्रिटी बना था जिन्हें "आम लोगों" तक में नहीं गिना जाता. इन लोगों को बैन का दुख जरूर है लेकिन हुनर किसी एक प्लैटफॉर्म का मोहताज तो नहीं.

जम्मू में रहने वाले डीएसपी भंड्राल पेशे से कारोबारी हैं लेकिन अपनी तीन साल की बेटी शिवान्या की फैन फॉलोविंग को संभालने का काम भी करते हैं. हालांकि अब शायद यह बदल जाएगा. शिवान्या टिक टॉक पर कुकू के नाम से मशहूर थी और वहां उसके चालीस लाख से भी ज्यादा फॉलोवर थे. वह कभी फिल्मी डायलॉग, कभी डांस तो कभी अपने पिता के साथ बाते करते हुए वीडियो बनाती. और इस नन्हीं सी बच्ची के वीडियो का इंतजार रोज कितने लोगों को रहता, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुकू के हर वीडियो पर कई मिलियन व्यूज आते.

आंध्र प्रदेश के विशाखापट्नम में रहने वाले भार्गव चिप्पड़ा के 80 लाख से ज्यादा फॉलोवर थे. भार्गव पेशे से एक्टर हैं उनका कहना है कि ऐप से उन्हें स्पॉन्सरशिप के भी ऑफर आते थे, जिससे मिलने वाले पैसों से उनकी काफी मदद होती थी. भार्गव सिर्फ तेलेगू में बात करते हैं लेकिन टिक टॉक पर थोड़ी अंग्रेजी का इस्तेमाल कर वे ऐसे वीडियो बनाते थे जो कम अंग्रजी जानने वालों को भी समझ आ जाए.

टिक टॉक से मिली खूब सारी शोहरत

सिर्फ कुकू और भार्गव ही नहीं, शॉर्ट वीडियो शेयरिंग प्लैटफॉर्म टिक टॉक के जरिए ऐसे कई नए सितारे उभर कर आए थे जो अपने हुनर के दम पर और ऐप के तमाम फीचर्स का इस्तेमाल कर अपनी पहचान बना रहे थे. पांच करोड़ से भी ज्यादा इंटरनेट यूजर्स वाला भारत टिक टॉक के लिए सबसे बड़े बाजारों में से एक था. और 20 करोड़ एक्टिव यूजर्स के साथ टिक टॉक भारत में सबसे अधिक डाउनलोड किए जाने वाले ऐप में से एक था, जो टिक टॉक के कुल मार्केट शेयर का 44 फीसदी हिस्सा है.

भार्गव का कहना है कि टिक टॉक के कारण वे कई कंपनियों के ब्रैंड अम्बैसेडर बने और आज एक टीम के साथ कई वीडियो प्रोड्यूस करते हैं. वहीं डीएसपी भंड्राल बताते हैं कि जब वे अपनी तीन साल की बेटी को लेकर एक आरजे से मिलने पहुंचे, तो आरजे ने कुकू को पहचान कर उनसे ही फोटो की मांग कर डाली. भंड्राल का कहना है कि वे पैसों के लिए टिक टॉक का इस्तेमाल नहीं कर रहे थे. अपनी बेटी की बनती पहचान उनके लिए गर्व की बात है. उनका कहना है कि कुकू ने इतनी छोटी उमर से ही शीशे के सामने खड़े होकर रिहर्स करना शुरू कर दिया है कि वह बड़ी होकर मॉडल या एक्टर बनना चाहती है.

छोटे शहरों से निकले थे टिक टॉक हीरो

चीन के साथ बढ़ते सीमा तनाव के मद्देनजर भारत ने 29 जून को सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए टिक टॉक समेत 59 चीनी ऐप पर प्रतिबंध लगा दिया. सरकार का आरोप है कि ये ऐप भारतीय यूजर्स का डाटा चोरी कर इसे भारत के बाहर दूसरे सर्वर पर भेज रहे हैं. प्रतिबंधित ऐप को सीधे फोन से हटाना मुमकिन नहीं है लेकिन ये अब गूगल प्ले स्टोर या एप्पल ऐप स्टोर पर उपलब्ध नहीं हैं.

बैन की खबर आते ही कई टिक टॉक इन्फ्लुएंसर्स ने लोगों के लिए आखिरी वीडियो पोस्ट किए, तो किसी ने इंस्टाग्राम, यूट्यूब या अन्य माध्यमों के जरिए फॉलो करने की गुहार लगाई. पर कई लोगों का मानना है कि जैसा प्लैटफॉर्म टिक टॉक ने उन्हें दिया, वैसा किसी दूसरी ऐप पर मुमकिन नहीं. टिक टॉक के जरिए कई लोगों के सपने साकार हो रहे थे. अगर ऐप के ट्रेंड्स को देखें तो साफ है कि टिक टॉक का इस्तेमाल करने वाले लोगों में गांव ओर छोटे शहरों के लोगों की संख्या काफी बड़ी है. जहां फेसबुक, ट्विटर जैसे कई सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म बड़े शहरों में पहले मशहूर हुए और फिर गांवों तक पहुंचे, टिक टॉक के जरिए छोटे शहरों के लोगों ने पहले नाम कमाया. टिक टॉक इन्फ्लुएंसर बन कर कई लोगों ने पैसे और नाम दोनों कमाया.

हालांकि टिक टॉक पर लगे बैन के बाद कई भारतीय ऐप सामने आए हैं, जो टिक टॉक इन्फ्लुएंसर्स को लुभा कर बाजार में बनी खाली जगह को भरने की कोशिश में हैं. चिंगारी, मित्रों, रोपोसो जैसे कई ऐप लाखों लोगों ने डाउनलोड कर तो लिए हैं लेकिन ये टिक टॉक की जगह ले पाएंगे या नहीं, ये वक्त ही बताएगा. भंड्राल के अनुसार इन ऐप और टिक टॉक में काफी फर्क है, "टिक टॉक किसी भी दूसरे ऐप से ज्यादा एडवांस और फीचर्स से लैस था. टिक टॉक ने वीडियो बनाने और इफेक्ट्स जोड़ने को बेहद आसान कर दिया था."

अब नए प्लैटफॉर्म पर चमकने की तैयारी

भारत मोबाइल ऐप की दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा बाज़ार है. 2019 में ही कुल 19 अरब डाउनलोड इस बात को दर्शाते हैं कि भारत में ऐप की डिमांड कितनी बड़ी है. हालांकि अगर उपभोक्ताओं से होने वाली कमाई को देखा जाए, तो भारत का मार्केट शेयर सिर्फ 0.3 फीसदी है. कई जानकारों का मानना है कि चीनी ऐप पर लगे प्रतिबंध से शायद चीनी कंपिनियों की कमाई पर उतना असर ना पड़े जितने की उम्मीद है. हालांकि चीन के अखबार ग्लोबल टाइम्स में छपी एक खबर के मुताबिक टिक टॉक की पेरेंट कंपनी बाइट डांस का भारत में कारोबार बंद होने से 6 अरब डॉलर का घाटा होने की आशंका है.

टिक टॉक बंद होने से यूजर्स को झटका जरूर लगा है लेकिन कई लोगों का मानना है कि यह कदम सही है. भंड्राल कहते हैं, "जब आप पूरी मेहनत से रोज काम करते हैं, तो इसके जाने का बुरा तो लगता है लेकिन हम भारत सरकार के फैसले का समर्थन करते हैं." वहीं भार्गव का कहना है कि बैन से सिर्फ भारत में लोगों वीडियो पहुंचने बंद हुए हैं, दूसरे देशों में रहने वाले लोगों में अब भी उनके वीडियो वायरल हो रहे हैं. भंड्राल और भार्गव जैसे तमाम टिक टॉक यूजर अब दूसरे प्लैटफॉर्म्स पर अपनी पहचान बनाने की तैयारी में हैं.

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