हांग कांग में लोकतंत्र समर्थक अखबार के दफ्तर में घुसे पांच सौ पुलिसकर्मी | दुनिया | DW | 18.06.2021
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दुनिया

हांग कांग में लोकतंत्र समर्थक अखबार के दफ्तर में घुसे पांच सौ पुलिसकर्मी

हांग कांग में लोकतंत्र समर्थक अखबार एप्पल डेली के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई है. पांच सौ पुलिसकर्मियों ने अखबार के दफ्तर पर छापा मारा और चीन की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए पत्रकारों की सामग्री जब्त कर ली.

बाद में पुलिस ने पांच अधिकारियों को भी गिरफ्तार किया है, जिनमें एप्पल डेली के मुख्य संपादक शामिल हैं. अखबार से जुड़ी तीन कंपनियों की लगभग 1.8 करोड़ हांग कांग डॉलर यानी करीब 17 करोड़ रुपये की संपत्ति भी जब्त कर ली गई. यह दूसरी बार है जब अखबार के दफ्तर पर छापा मारा गया है. पिछले साल ही अखबार चलाने वाली कंपनी नेक्स्ट डिजिटल के मालिक जिमी लाई को गिरफ्तार किया गया था. जिमी लाई एक लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ता और चीन के कट्टर आलोचक हैं.

अखबार पर खतरा

गुरुवार के छापे के बाद अखबार ने शुक्रवार को आम तौर पर छपने वाली 80 हजार से बढ़ाकर पांच लाख प्रतियां छापी हैं क्योंकि 75 लाख लोगों के शहर में इनकी मांग बढ़ने की उम्मीद जताई गई थी. पिछले साल अगस्त में लाई की गिरफ्तारी के बाद भी अखबार ने ऐसा ही किया था.

अखबार के एक पाठक सांग ने बताया कि वह आधी रात को ही अखबार की दो-तीन प्रति खरीद लाए थे. उन्होंने कहा, "पता नहीं यह अखबार कब मर जाएगा. हांग कांग निवासी होने के नाते हमें इतिहास को सहेजने की जरूरत है. जब तक हो सके, टिके रहना है. हालांकि रास्ता मुश्किल है फिर हमें इसी पर चलना है. कोई और रास्ता तो है नहीं.”

शुक्रवार को अखबार ने छापे को अपनी मुख्य खबर बनाया है. अखबार ने लिखा है कि पुलिस ने 44 हार्ड डिस्क जब्त कर ली हैं. 2020 में लोकतंत्र समर्थकों द्वारा चीन विरोधी प्रदर्शनों के बाद से यह पहली बार है जबकि अधिकारियों ने पत्रकारों के लेखों को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून का उल्लंघन करने वाला बताया है.

हांग कांग के सुरक्षा मंत्री जॉन ली ने अखबार के दफ्तर को ‘क्राइम सीन' बताया. उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई उन लोगों के खिलाफ थी, जो पत्रकारिता को राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ एक औजार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं.

दुनिया भर में प्रतिक्रिया

चीन की इस कार्रवाई की दुनिया के कई देशों ने आलोचना की है. यूरोपीय संघ और ब्रिटेन ने कहा है कि छापे दिखाते हैं कि चीन कानून का इस्तेमाल असहमति की आवाजों को दबाने के लिए कर रहा है. यूरोपीय संघ की प्रवक्ता नाबिला मसाराली ने एक बयान में कहा कि ये छापे "फिर दिखाते हैं कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को हांग कांग में मीडिया की आजादी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है.” उन्होंने कहा, "यह जरूरी है कि हांग कांग के लोगों के अधिकारों और आजादियों की सुरक्षा की जाए. मीडिया और प्रकाशन की स्वतंत्रता समेत.”

ब्रिटेन क विदेश मंत्री डॉमिनिक राब ने कहा कि यह असहमति को दबाने की कार्रवाई है. चीन के साथ हांग कांग को लेकर हुए समझौते का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "मीडिया की स्वतंत्रता उन अधिकारों में से एक है, जिनका साझा घोषणा में चीन ने वादा किया था. इसकी रक्षा होनी चाहिए.”

ब्रिटेन ने 1997 में हांग कांग को चीन को सौंपा था. तब दोनों देशों ने एक साझा ऐलान किया था जिसके तहत इस शहर को विशेष अधिकार दिए गए थे. ‘एक देश, दो व्यवस्थाएं' का यह सिद्धांत 1984 में चीन और ब्रिटेन के बीच हुए समझौते पर आधारित है. लेकिन ब्रिटेन और उसके सहयोगी कहते हैं कि चीन राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के इस्तेमाल के जरिए इस सिद्धांत का उल्लंघन कर रहा है.

चीन हालांकि इसे अपना अंदरूनी मामला बताता है. वह कई बार ब्रिटेन और अमेरिका समेत पश्चिमी देशों को उसके अंदरूनी मामलों में दखलअंदाजी ना करने को कह चुका है.

वीके/एए (रॉयटर्स, एएफपी)

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