चीनी विदेश मंत्री से मुलाकात में जर्मनी ने उठाया हांगकांग और उइगुरों का मुद्दा | दुनिया | DW | 01.09.2020
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दुनिया

चीनी विदेश मंत्री से मुलाकात में जर्मनी ने उठाया हांगकांग और उइगुरों का मुद्दा

कोरोना महामारी शुरु होने के बाद से पहली बार चीनी विदेश मंत्री वांग यी विदेश यात्रा पर हैं. जर्मन विदेश मंत्री हाइको मास ने बातचीत में हांगकांग के सुरक्षा कानून से लेकर और उइगुरों तक के मुद्दे उठाए.

Bildkombo Nathan Law und Heiko Maas

हांगकांग के एक्टिविस्ट नेथन लॉ (बाएं) और जर्मन विदेश मंत्री हाइको मास (दाएं).

चीन के विदेश मंत्री वांग यी को जर्मन राजधानी बर्लिन में चीन की हांग कांग नीति को लेकर प्रदर्शनकारियों का विरोध झेलना पड़ा. मंगलवार को बर्लिन के बाहर स्थित विला बोर्सिग में जहां उन्होंने जर्मनी के विदेश मंत्री हाइको मास से मुलाकात की, उसके सामने बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी चीन का विरोध जताने के लिए इकट्ठा हुए. हाइको मास ने शिनजियांग में, जहां मुस्लिम उइगुरों को कैंपों में रखे जाने के आरोप हैं, एक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक दल भेजे जाने की मांग की. जर्मन विदेश मंत्री ने उनसे हांगकांग में चुनाव जल्द ही कराए जाने के अलावा और हांगकांग के सुरक्षा कानून को वापस लिए जाने की भी मांग की. जर्मन विदेश मंत्री ने अपने चीनी विदेश मंत्री के साथ बातचीत में उइगुरों के हालात को लेकर "गहरी चिंता" भी जताई.

यूरोपीय संघ की ओर से जिन मुद्दों की सबसे ज्यादा आलोचना होती आई है, वे हैं चीन में अल्पसंख्यक उइगुर मुसलमान समुदाय के साथ उसका बर्ताव और इसी साल हांगकांग में एक नया सुरक्षा कानून लागू करना. इस नए सुरक्षा कानून के विरोध में हांगकांग में बहुत बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला चला था. इस सिलसिले में तमाम गिरफ्तारियां हुईं और हांगकांग में सितंबर में होने वाले चुनावों को भी स्थगित करने का फैसला किया गया. हांगकांग प्रशासन चुनाव स्थगित करने का कारण वहां फिर से सिर उठाते कोरोना के संक्रमण के खतरे को बता रहा है जबकि विपक्ष इसे सिर्फ एक बहाना मानता है.

विदेश मंत्रियों की मुलाकात वाली जगह के अलावा, बर्लिन के केंद्र में स्थित जर्मन विदेश मंत्रालय के सामने भी विरोध प्रदर्शन हुआ जहां सैकड़ों की तादाद में जुटे प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व हांगकांग के एक्टिविस्ट नेथन लॉ ने किया. जर्मन विदेश मंत्री का आह्वान करते हुए एक्टिविस्ट लॉ ने कहा कि उन्हें विशेष नियमों के अंतर्गत संचालित हांगकांग में स्वतंत्रता और मानवाधिकार के मुद्दे को उठाना चाहिए.

नेथन लॉ ब्रिटेन में अज्ञातवास में रहते हैं. चीनी मंत्री की बर्लिन यात्रा से दो दिन पहले ही उन्होंने जर्मन विदेश मंत्री मास को एक पत्र भी लिखा. इस पत्र में लॉ ने जर्मन सरकार से भावनात्मक अपील करते हुए लिखा कि वह हांगकांग के लोगों के अधिकारों और आजादी का समर्थन करें. केवल 23 साल की उम्र में लॉ हांगकांग के इतिहास में चुने गए सबसे युवा विधायक थे लेकिन कार्यभार संभालते ही उन्हें महात्मा गांधी के एक उद्धरण का इस्तेमाल करने के कारण अयोग्य घोषित कर पद से हटा दिया गया.  

निवेश के लिए हो मानवाधिकार सुरक्षा की शर्तें

वांग की यात्रा से पहले ही जर्मनी के सत्ताधारी गठबंधन की पार्टियों और विपक्षी दलों ने मांग रखी कि जर्मन सरकार यह साफ करे कि वह चीन की हांगकांग नीतियों के खिलाफ है. ग्रीन पार्टी की प्रमुख आनालेना बेयरबॉक ने कहा कि यूरोपीय संघ और चीन के बीच होने वाले भविष्य के सभी निवेश संबंधी समझौतों को चीन की ओर से मानवाधिकार की गारंटी से जोड़ा जाना चाहिए. निवेश संबंधी यह समझौता इसलिए किया जाना है ताकि यूरोपीय कंपनियों का सामान और आसानी से चीनी बाजारों में पहुंचाया जा सके और उसका निवेश सुरक्षित होने की गारंटी हो.

इस सिलसिले में कोरोना महामारी शुरु होने के बाद से चीनी विदेश मंत्री वांग अपनी पहली विदेश यात्रा पर यूरोप में है. अपनी एक हफ्ते लंबी विदेश यात्रा में वांग जर्मनी से पहले इटली, फ्रांस, नॉर्वे और नीदरलैंड्स जा चुके हैं. रविवार की मुलाकात में जब फ्रांसीसी विदेश मंत्री ने चीनी मंत्री के सामने हांगकांग और शिनजियांग में मानवाधिकारों को लेकर चिंता जताई, तो वांग यी ने इन दोनों को चीन का आंतरिक मुद्दा बताते हुए बाकी देशों को इसमें हस्तक्षेप ना करने को कह दिया था.

Hongkong Sicherheitsgesetz (Reuters/T. Siu)

नए सुरक्षा कानून के बारे में हांगकांग में लगे सरकारी विज्ञापन.

सुरक्षा कानून पर भड़का था विवाद

भारत की ही तरह हांगकांग खुद भी एक ब्रिटिश उपनिवेश रह चुका है, जिसे 23 साल पहले ब्रिटेन ने चीन को सौंप दिया था. 30 जून, 2020 से हांगकांग में एक नया सुरक्षा कानून लागू है. नेथन लॉ ने इस कानून के खिलाफ आवाज उठाते हुए आरोप लगाया था कि यह हांगकांग के लोगों की अभिव्यक्ति की आजादी से लेकर प्रेस और अकादमिक स्वतंत्रता तक के लिए खतरा है. इसे हांगकांग की स्वायत्तता के लिए खतरा बताते हुए लॉ ने अपने पत्र में लिखा कि यह उस संयुक्त घोषणा का भी उल्लंघन है जो 1997 में ब्रिटेन और चीन ने की थी, जो कि 2047 तक वैध होनी चाहिए.

आलोचक लंबे समय से चीन पर आरोप लगाते रहे हैं कि वह हांगकांग की सब तरह की आजादियों को धीरे धीरे खत्म करता रहा है. इस सुरक्षा कानून के लागू होने के पहले भी यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र ने इस पर चिंता जताई थी कि चीन इसका इस्तेमाल अपनी आलोचना के खात्मे के लिए करना चाहता है. इसके लागू होने के बाद हुई बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया में अमेरिका ने चीनी अधिकारियों के खिलाफ नए प्रतिबंध लगाए, वहीं कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे देशों ने हांगकांग के साथ अपनी प्रत्यर्पण संधि को रद्द कर दिया ताकि चीन उसका लाभ ना उठा सके. जुलाई में यूरोपीय संघ ने हांगकांग में उन उत्पादों का निर्यात भी रोक दिया जिनका इस्तेमाल शासन द्वारा नागरिकों की निगरानी और दमन के लिए किया जा सकता है.

आरपी/एमजे (डीपीए, एएफपी)

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