30 साल में डबल हो गए हैं ब्लड प्रेशर के मरीजः रिपोर्ट | विज्ञान | DW | 25.08.2021
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विज्ञान

30 साल में डबल हो गए हैं ब्लड प्रेशर के मरीजः रिपोर्ट

एक ताजा अध्ययन के मुताबिक 1990 के बाद से उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों की संख्या दोगुनी से अधिक हो गई है, जिसमें सभी पीड़ितों में से आधे से लगभग 72 करोड़ लोगों का इलाज 2019 में नहीं हो पाया.

उच्च रक्तचाप सीधे तौर पर हर साल 85 लाख से अधिक मौतों से जुड़ा हुआ है. और यह स्ट्रोक, हृदय और लिवर की बीमारी के लिए प्रमुख कारक है. यह पता लगाने के लिए कि पिछले 30 सालों में विश्व स्तर पर उच्च रक्तचाप की दर कैसे विकसित हुई है, गैर-संचारी रोग जोखिम कारक सहयोग (NCD-RisC) की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने दुनिया के लगभग हर देश को कवर करते हुए 1,200 से अधिक राष्ट्रीय अध्ययनों के आंकड़ों का विश्लेषण किया.

टीम ने आबादी में उच्च रक्तचाप की दर का अनुमान लगाने के लिए मॉडलिंग का इस्तेमाल किया, साथ ही इस स्थिति के लिए दवा लेने वाले लोगों की संख्या भी जानी. विश्लेषण में पाया गया कि 2019 में 62.6 करोड़ महिलाएं और 65.2 करोड़ पुरुष उच्च रक्तचाप से पीड़ित थे.

यह 1990 में अनुमानित 33.1 करोड़ महिलाओं और 31.7 करोड़ पुरुषों की तुलना में लगभग दोगुना है.

बीमारी से अनजान

विश्लेषण में पाया गया कि 41 प्रतिशत महिलाएं और 51 प्रतिशत पुरुष अपनी स्थिति से अनजान थे, जिसका मतलब है कि लाखों लोग प्रभावी उपचार से वंचित थे.

मुख्य शोधकर्ता, इंपीरियल कॉलेज लंदन के माजिद एज्जती के मुताबिक, "दशकों में चिकित्सा और औषधीय प्रगति के बावजूद उच्च रक्तचाप प्रबंधन में वैश्विक प्रगति धीमी रही है और उच्च रक्तचाप वाले अधिकांश लोग इलाज से वंचित रहते हैं."     

लांसेट मेडिकल जर्नल में प्रकाशित विश्लेषण में कहा गया है कि कनाडा और पेरू में वयस्कों के बीच उच्च रक्तचाप का अनुपात सबसे कम था, जिसमें लगभग चार में से एक इस स्थिति के साथ जी रहे थे.

ताइवान, दक्षिण कोरिया, जापान, स्विट्जरलैंड, स्पेन और ब्रिटेन में महिलाओं में उच्च रक्तचाप की दर 24 प्रतिशत से भी कम थी, जबकि इरीट्रिया, बांग्लादेश, इथियोपिया और सोलोमन द्वीप समूह में पुरुषों में 25 प्रतिशत से कम दर थी.

वीडियो देखें 07:38

तनाव का शरीर पर असर

कोरोना का भी असर

शोध के लेखकों ने कहा कि अध्ययन उच्च रक्तचाप के रोग-निर्णय और इलाज तक पहुंच को बढ़ावा देने की तत्काल आवश्यकता को दर्शाता है. वैश्विक स्तर पर चार में से एक महिला और पांच में से एक पुरुष का इलाज उनकी इस स्थिति के लिए किया जा रहा है.

शेफील्ड विश्वविद्यालय में कार्डियोलॉजी के प्रोफेसर रॉबर्ट स्टोरी कहते हैं कि कोविड-19 ने सरकारों को उच्च रक्तचाप की वास्तविकता से ध्यान हटा दिया है.

स्टोरी के मुताबिक, "रक्त संचारी रोग की महामारी को पिछले 18 महीनों में कम ध्यान दिया गया है. अस्वस्थ जीवनशैली, उच्च वसा, चीनी, नमक, शराब, धूम्रपान का सेवन और व्यायाम से बचना. यह दुनिया भर के रुझानों के संबंध को दर्शाता है."

स्टोरी खुद अध्ययन में शामिल नहीं थे. उन्होंने जोर देकर कहा कि यह जरूरी है कि हृदय रोग और स्ट्रोक के टाइम बम से बचने के लिए सभी देशों की सरकारों को एक नीति अपनानी चाहिए.

एए/वीके (एएफपी)

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