जर्मनी, यूरोपीय संघ और अमेरिका ने किया भारत की मदद का वादा | भारत | DW | 26.04.2021

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भारत

जर्मनी, यूरोपीय संघ और अमेरिका ने किया भारत की मदद का वादा

कोरोना की दूसरी और बेहद घातक लहर से जूझ रहे भारत की मदद के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय आगे आ रहा है. यूरोपीय संघ और अमेरिका ने भारत की मदद करने के लिए कदम उठाए हैं. जर्मनी और रूस समेत कई और देश भी मदद के लिए आगे आए हैं.

मैर्केल ने अपने प्रवक्ता स्टेफेन जाइबर्ट के जरिए ट्विटर पर पोस्ट किए एक संदेश में कहा, "कोविड-19 भारतीय समुदाय पर दोबारा जिस तरह का कहर बरपा रहा है, उसके लिए मैं भारत के लोगों के साथ सहानुभूति जताना चाहती हूं. इस महामारी के खिलाफ लड़ाई सबकी साझी है. जर्मनी भारत के साथ खड़ा है और मदद के लिए एक मिशन तुरंत तैयार कर रहा है.” जर्मनी के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि मोबाइल ऑक्सीजन जेनरेटर और अन्य मेडिकल साज-ओ-सामान उपलब्ध करवाने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं.

यूरोपीय आयोग की प्रमुख उर्सुला फॉन डेय लाएन ने कहा कि वह भारत की स्थिति से हतप्रभ हैं. उन्होंने ट्विटर पर लिखा,”भारत की मदद की अपील के जवाब में यूरोपीय संघ अपने संसाधन जमा कर रहा है. हम पूरी तरह भारत के लोगों के साथ हैं.”

कई देश मदद को आगे आए

अमेरिका ने भी भारत की फौरी मदद का फैसला किया है. जो बाइडेन सरकार ने वैक्सीन बनाने के लिए जरूरी कच्चा माल, टेस्ट, वेंटिलेटर और सुरक्षात्मक साज-ओ-सामान को तुरंत भारत भेजने का फैसला किया है. व्हाइट हाउस ने रविवार को एक बयान में कहा, "अमेरिका ने भारत में कोविशील्ड वैक्सीन के निर्माताओं की जरूरत के कच्चे माल की पहचान की है, जो फौरन उपलब्ध कराया जाएगा.”

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने ट्विटर पर कहा, "जब हमारे अस्पताल महामारी के कारण दबाव में थे, तब जिस तरह भारत ने अमेरिका की मदद की थी, वैसे ही हम भी जरूरत के इस समय में भारत की मदद के लिए प्रतिबद्ध हैं.”

भारत वैक्सीन के पेटेंट पर अस्थायी छूट की मांग कर रहा है ताकि अन्य देश भी इसे बना सकें और टीकाकरण में तेजी लाई जा सके. भारत के प्रतिद्वन्द्वी माने जाने वाले पाकिस्तान ने भी महामारी झेलते अपने पड़ोसी की मदद की पेशकश की है. पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने शनिवार को एक बयान में कहा, "कोविड-19 की मौजूदा लहर में भारत के लोगों से भाईचारे की भावना के तहत पाकिस्तान ने मदद की पेशकश की है, जिसमें वेंटिलेटर्स भी शामिल हैं.”

उधर ब्रिटेन ने मेडिकल साज-ओ-सामान की 600 यूनिट भारत को भेजने की बात कही है. इनमें वेंटिलेटर्स और ऑक्सीजन कॉन्सनट्रेटर्स शामिल हैं. ऐसी ही बात रूस और फ्रांस ने भी कही है.

भारत में क्या है स्थिति

डॉयेचे वेले की दिल्ली स्थित संवाददाता अमृता चीमा ने बताया है कि भारत की राजधानी में हालात बेहद नाजुक हैं. चीमा के मुताबिक दिल्ली सरकार को फौरी तौर पर 700 टन लिक्विड ऑक्सीजन की जरूरत है. भारत सरकार ने दिल्ली को ऑक्सीजन भिजवाने के लिए सैन्य विमान और ट्रेनों का इंतजाम किया है. रविवार को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरकार पूरी ताकत से इस संकट से लड़ रही है. अपने मासिक रेडियो संबोधन में उन्होंने कहा, "पहली लहर से सफलतापूर्वक निपटने के बाद हमारे हौसले बुलंद थे लेकिन इस तूफान ने देश को हिला दिया है.”

जनवरी में ही मोदी ने कोरोना पर जीत की घोषणा कर दी थी. आलोचक विशाल धार्मिक और राजनीतिक आयोजनों को लेकर सरकार की आलोचना कर रहे हैं. पहले से तैयारी ना करने को लेकर भी मोदी सरकार की आलोचना हो रही है. भारत में अब तक संक्रमण के कुल एक करोड़ 69 लाख मामले सामने आ चुके हैं, जो अमेरिका के बाद दुनिया में सबसे ज्यादा हैं. अब तक इस महामारी से देश में एक लाख 92 हजार 311 लोगों की जान जा चुकी है. हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि मरने वालों की संख्या इससे बहुत ज्यादा है.

वीके/एए (एएफपी, डीपीए, रॉयटर्स)

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