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जर्मनी में बेरोजगारी ने तोड़ा 12 साल का रिकॉर्ड

विवेक कुमार रॉयटर्स, डीपीए
३१ जनवरी २०२६

नए आंकड़ों में बेरोजगारों की संख्या 30 लाख के पार पहुंचकर 12 साल के उच्च स्तर पर चली गई है.

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फरवरी 2025 में चुनाव जीतने के बाद फ्रीडरिष मैर्त्स
फ्रीडरिष मैर्त्स सरकार को एक साल पूरा होने वाला है.तस्वीर: Odd Andersen/AFP/Getty Images

जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने कहा है कि इस साल उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता अर्थव्यवस्था को गति देना होगी. उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब नए आंकड़ों में बेरोजगारों की संख्या 30 लाख के पार पहुंचकर 12 साल के उच्च स्तर पर चली गई.

मैर्त्स ने बीते दो साल की हल्की आर्थिक गिरावट के बाद यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को फिर से रफ्तार देने का वादा किया है. इसके लिए उन्होंने बुनियादी ढांचे और रक्षा खर्च में तेज वृद्धि का भरोसा दिलाया है. हालांकि समूची अर्थव्यवस्था अब पहले की तुलना में ज्यादा लचीली दिख रही है, लेकिन मैर्त्स के कदमों का असर जमीनी हालात में सुधार के रूप में आने में अपेक्षा से ज्यादा समय लग रहा है.

मैर्त्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "तीन मिलियन से ज्यादा बेरोजगारों की संख्या तक पहुंचना एक चेतावनी है.” उन्होंने कहा, "आर्थिक उछाल इस साल की केंद्रीय प्राथमिकता होना चाहिए.”

30 लाख के पार हुए बेरोजगार

लेबर ऑफिस के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी में दिसंबर की तुलना में 1,77,000 ज्यादा लोग बेरोजगार थे. इससे कुल बेरोजगारों की संख्या 30.8 लाख हो गई. बेरोजगारी दर भी 0.4 प्रतिशत बढकर 6.6 फीसदी पर पहुंच गई.

हालांकि तस्वीर का एक दूसरा पहलू भी सामने आया. चौथी तिमाही में जर्मनी की जीडीपी ग्रोथ पिछली तिमाही की तुलना में 0.3 फीसदी रही, जो 0.2 फीसदी के अनुमान से बेहतर है. सालाना आधार पर सांख्यिकी कार्यालय ने अपने शुरुआती अनुमान की पुष्टि की और 0.2 फीसदी वृद्धि दर्ज की.

इसी के साथ, अलग आंकड़ों में यह भी दिखा कि जनवरी में जर्मनी की मुद्रास्फीति अनुमान से थोड़ी बढ़ गई. आंकड़ों के अनुसार, जनवरी में मुद्रास्फीति सालाना आधार पर 2.1 फीसदी पर पहुंच गई, जबकि समाचार एजेंसी रॉयटर्स के सर्वे में शामिल विश्लेषकों का अनुमान था कि दिसंबर के 2 फीसदी स्तर पर ही यह स्थिर रहेगी. यह स्तर यूरोपीय केंद्रीय बैंक के 2 फीसदी लक्ष्य से हल्का ऊपर है.

मौसमी कारणों का असर

लेबर ऑफिस की निदेशक आंद्रिया नालेस ने कहा, "फिलहाल श्रम बाजार में बहुत कम गति है.” उन्होंने कहा, "साल की शुरुआत में मौसमी कारणों से बेरोजगारी में काफी वृद्धि हुई.” यानी जनवरी के आंकड़ों पर मौसम और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े प्रभाव भी हावी रहे.

जब इन्हीं आंकड़ों को मौसमी प्रवृत्तियों के हिसाब से समायोजित किया गया, तो तस्वीर कुछ बेहतर लगी. लेबर ऑफिस के मुताबिक, मौसमी समायोजन के बाद बेरोजगारों की संख्या में दिसंबर के मुकाबले कोई बदलाव नहीं हुआ और यह 29.76 लाख पर टिकी रही. इसी आधार पर बेरोजगारी दर भी 6.3 फीसदी पर स्थिर बताई गई. रॉयटर्स के एक सर्वे में विश्लेषकों और अर्थशास्त्रियों ने मौसमी समायोजित बेरोजगारों की संख्या में 4,000 की वृद्धि का अनुमान लगाया था, लेकिन आंकड़ा स्थिर रहा.

मौसमी समायोजन का मतलब है आंकड़ों से उन नियमित, हर साल दोहरने वाले मौसमी असर (जैसे सर्दियों में निर्माण कम होना, छुट्टियों के बाद भर्ती घटना) को अलग कर देना, ताकि असली रुझान साफ दिखें. इसका असर यह होता है कि बिना समायोजन वाले आंकड़े अचानक बहुत खराब या बहुत अच्छे लग सकते हैं, लेकिन समायोजित आंकडे बताते हैं कि बदलाव सच में अर्थव्यवस्था में है या सिर्फ मौसम का प्रभाव है.

अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता

जर्मनी की अर्थव्यवस्था को लेकर सरकार के भीतर भी आगे की दिशा पर चर्चा तेज हो रही है. अर्थव्यवस्था मंत्री काथेरिना राइषे ने कहा कि जर्मनी को नए "ग्रोथ इंजन” की तरफ मुड़ना होगा. उन्होंने तर्क दिया कि पारंपरिक निर्यात ताकतें "अब हमारे विकास को आगे नहीं ढो रहीं.”

आईएनजी बैंक के कार्स्टेन ब्रजेस्की ने घरेलू जोखिम पर चेतावनी देते हुए कहा ढांचागत सुधारों की जरूरत पर जोर दिया. जर्मनी ने बीते बुधवार को 2026 और 2027 के लिए अपने विकास अनुमान घटाए थे, क्योंकि वित्तीय नीति से जुड़े उपाय उतनी तेजी से असर नहीं दिखा रहे जितना पहले माना जा रहा था.

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कॉमर्त्सबैंक के मुख्य अर्थशास्त्री योएर्ग क्रेमर ने कहा कि जर्मन सरकार का बड़े वित्तीय पैकेज के "उपजाऊ जमीन पर गिरने की संभावना नहीं” दिखती, क्योंकि ज्यादातर कंपनियां आर्थिक नीति में बदलाव पर भरोसा नहीं कर रही हैं, जिसका लंबे समय से इंतजार था.

 

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