जर्मनी को क्यों है प्रवासी महिलाओं की जरूरत
जर्मनी में कामगारों की बड़ी कमी है. यह कमी देश को आर्थिक रूप से बड़ा नुकसान पहुंचा रही है. क्या प्रवासी महिलाएं इस कमी को भरने में मदद कर सकती हैं?

लघु-मध्यम कंपनियां, जर्मन इकोनॉमी का बड़ा आधार
जर्मनी में लघु और मध्यम आकार की कंपनियां, अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी हैं. समूचे कर्मचारियों का तकरीबन 60 फीसदी हिस्सा इनमें भी काम पाता है. मगर, प्रशिक्षित और योग्य कामगारों का संकट इन्हें नुकसान पहुंचा रहा है. नतीजतन, जर्मन अर्थव्यवस्था और आर्थिक उत्पादन पर असर पड़ रहा है.
कामगारों की कमी भरने में महिलाओं की भूमिका
जर्मन इकोनॉमिक इंस्टिट्यूट (आईडब्ल्यू) एक कारोबार समर्थक थिंक टैंक है. इसकी एक नई स्टडी के मुताबिक, प्रवासी महिलाएं जर्मनी में प्रशिक्षित कामगारों की कमी को कम करने में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं.
किसने की है स्टडी
यह स्टडी आईडब्ल्यू की स्किल्स यूनिट (केओएएफ) ने की है. 'दी कंपीटेंस सेंटर फॉर सिक्योरिंग ए स्किल्ड वर्कफोर्स' के जर्मन भाषी नाम का संक्षिप्त रूप है, केओएएफ. यह लघु और मध्यम आकार की कंपनियों की मदद करता है, ताकि उन्हें प्रशिक्षित कामगार मिलें.
बड़ी संख्या में बेरोजगार हैं महिलाएं
माइग्रेंट महिलाओं की श्रेणी में अनुमानित संख्या पांच लाख से ज्यादा है. स्टडी की लेखिका लुडिया मालिन बताती हैं कि इन महिलाओं को जल्द श्रम बाजार से जोड़ना चाहिए. रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2024 में जर्मनी में करीब 13 लाख महिलाएं बेरोजगार थीं.
किन सेक्टरों में संभावनाएं
मालिन ने अपनी स्टडी में रेखांकित किया कि स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा जैसे सेक्टरों में जहां प्रशिक्षित कामगारों की बेहद कमी है, वहां प्रवासी महिलाओं को लाने से काफी संभावना बन सकती हैं.
कामकाजी महिलाओं की बड़ी संख्या किन क्षेत्रों में है
स्टडी के मुताबिक, साल 2024 के आंकड़े देखें तो जर्मनी में कामकाजी महिलाओं में 40 प्रतिशत से ज्यादा ऐसे सेक्टरों में काम कर रही थीं जो प्रशिक्षित लोगों की कमी से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं.
कंपनियां क्या कर सकती हैं?
स्टडी में अनुशंसा की गई है कि कंपनियां भर्ती करते समय विदेशी महिलाओं को लक्ष्य करें. कंपनियां उन्हें काम के लचीले घंटे, बच्चों की देखभाल में मदद मुहैया कराना और पार्ट-टाइम काम करने जैसी सुविधाओं की पेशकश कर सकती हैं. स्टडी के मुताबिक, बेरोजगार महिलाओं में करीब एक तिहाई ऐसी थीं जिन्होंने पारिवारिक कारणों से काम के घंटे कम करने की इच्छा जताई.
नौकरी खोजते समय क्या दिक्कतें आती हैं
स्टडी में यह भी पाया गया कि बहुत सी विदेशी महिलाओं ने ऐसी नौकरियां भी देखीं, जिनके लिए उनकी योग्यता ज्यादा थी. बहुतों ने कोई प्रोफेशनल या अकैडमिक कोर्स किया. नौकरी ना करने के कारणों में सर्टिफिकेट का मान्यता प्राप्त ना होना शामिल है. साथ ही, बहुत सी ऐसी महिलाएं भी हैं जो अपनी फील्ड में ऐसी नौकरी करना चाहती हैं, जहां काम के साथ-साथ पारिवारिक जिम्मेदारियां भी निभा सकें.
ट्रेनिंग देकर नौकरी के लिए तैयार किया जा सकता है?
लुडिया मालिन मानती हैं कि माइग्रेंट महिलाएं ऐसी जगहों पर काम कर सकती हैं, जहां कामगारों की कमी है. नौकरी देने वालों से अपील की गई है कि वो इस संभावना को खंगालें कि क्या बिना शैक्षणिक योग्यता ना रखने वाली महिलाओं को ट्रेनिंग देकर नौकरी पर रखा जा सकता है.