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पांच देशों के दौरे पर जर्मनी के विदेश मंत्री

विवेक कुमार डीपीए, एपी
१ फ़रवरी २०२६

जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल दक्षिण पूर्व एशिया और प्रशांत क्षेत्र की पांच दिन की यात्रा पर सिंगापुर, न्यूजीलैंड, टोंगा, ऑस्ट्रेलिया और ब्रुनेई जा रहे हैं.

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जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल
जर्मनी अब अपनी साझेदारियां बढ़ाने की कोशिश में है.तस्वीर: Simon Wohlfahrt/AFP/Getty Images

जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल दक्षिण पूर्व एशिया और प्रशांत क्षेत्र की पांच दिन की यात्रा पर जा रहे हैं. इस यात्रा का मकसद ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों के साथ गठबंधन और साझेदारी को और गहरा करना है, ताकि अमेरिका और चीन के प्रभुत्व को संतुलित किया जा सके.

विदेश मंत्री ने लंबी यात्रा शुरू करने से पहले कहा कि ऐसे समय में जब ताकत की राजनीति कानून की ताकत की जगह लेने का खतरा पैदा कर रही है, "हमें अपने मुख्य हितों के अनुरूप मजबूत साझेदारियों का वैश्विक नेटवर्क बढ़ाना होगा.” उनका संकेत इस बात की ओर था कि जर्मनी अपनी विदेश नीति में साझेदार देशों के साथ संबंधों को व्यापक और मजबूत बनाना चाहता है.

वाडेफुल सोमवार को सिंगापुर से अपनी यात्रा की शुरुआत करेंगे. इसके बाद वह न्यूजीलैंड, टोंगा, ऑस्ट्रेलिया और ब्रुनेई जाएंगे. इन सभी देशों के साथ जर्मनी की बातचीत का जोर उन मुद्दों पर रहेगा जिनमें क्षेत्रीय स्थिरता, अंतरराष्ट्रीय नियम आधारित व्यवस्था और बहुपक्षीय सहयोग शामिल हैं.

जर्मन साझेदारियों का विस्तार

विदेश मंत्री ने कहा कि ये पांचों देश एक स्थिर अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था चाहते हैं और जर्मनी की बहुपक्षीयता के प्रति प्रतिबद्धता को साझा करते हैं. वाडेफुल ने यह भी संकेत दिया कि ताइवान स्ट्रेट या दक्षिण चीन सागर में क्या होता है, उसके वैश्विक प्रभाव पड़ते हैं. उन्होंने चीन का नाम सीधे नहीं लिया, लेकिन जर्मनी कहता रहा है कि चीन इस क्षेत्र में नीतियों को अधिक आक्रामक तरीके से आगे बढ़ा रहा है और उसने स्वशासित ताइवान पर नियंत्रण की धमकी भी दी है. वाडेफुल का कहना था कि ऐसे इलाकों में तनाव का असर सिर्फ स्थानीय नहीं रहता, बल्कि वह वैश्विक स्तर पर व्यापार, सप्लाई और सुरक्षा से जुड़ जाता है.

इस यात्रा का एक उद्देश्य क्षेत्रीय संगठनों के साथ संपर्क बढ़ाना भी है. वाडेफुल दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन आसियान और पैसिफिक आईलैंड्स फोरम के साथ संबंधों को तेज करना चाहते हैं. इस फोरम की स्थापना 1971 में हुई थी. ब्रुनेई फिलहाल आसियान और यूरोपीय संघ के बीच संबंधों के समन्वय की जिम्मेदारी संभाल रहा है. इस वजह से ब्रुनेई यात्रा में इस समन्वय और व्यापक सहयोग पर चर्चा की संभावना है.

सुरक्षा परिषद की सीट

वाडेफुल का एक और लक्ष्य जर्मनी की उस कोशिश को समर्थन दिलाना है जिसके तहत वह अगले साल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की गैर-स्थायी सीट के लिए उम्मीदवार है. इसके लिए जर्मनी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन जुटाना होगा, और इस क्षेत्र में साझेदार देशों की भूमिका भी उसके लिए महत्वपूर्ण हो सकती है.

जर्मनी के अस्पतालों में भारतीय नर्सों का सफर

विदेश मंत्री ने इंडो पैसिफिक को रणनीतिक रूप से अहम क्षेत्र बताया. उन्होंने कहा कि यह इलाका रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कच्चे माल की खरीद के संदर्भ में भी जरूरी है. जर्मनी अपनी सप्लाई चेन को विविध बनाना चाहता है और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निर्भरता कम करना चाहता है. यानी जर्मनी यह प्रयास कर रहा है कि जरूरी कच्चे माल और संसाधनों के लिए वह किसी एक या सीमित स्रोत पर निर्भर न रहे.

वाडेफुल ने यह भी कहा कि यह क्षेत्र समुद्री मार्गों की सुरक्षा, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और आर्थिक विकास को सुनिश्चित करने में निर्णायक भूमिका निभाता है. उनके अनुसार, समुद्री रास्ते सुरक्षित रहेंगे तो व्यापार और सप्लाई चेन सुचारू रहेंगी, और इसका असर दुनियाभर की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा.