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तस्वीर: Nathalie Bertrams

'हमारी जिंदगी इसी कचरे के ढेर पर कट जाएगी' 

१९ नवम्बर २०२१

जॉर्जिया स्थित गोनियो लैंडफिल से काला सागर की हवा, मिट्टी और पानी सभी प्रदूषित हो रही है. सरकार ने इसे बंद करने की योजना बनाई है जिसके बाद कचरा चुनने वाले कई लोग अपने भविष्य को लेकर चिंतित हो गए हैं. 

https://www.dw.com/hi/georgias-largest-garbage-dump/a-59871676

गोनियो लैंडफिल औद्योगिक और घरेलू कचरे का पहाड़ बन चुका है. इस लैंडफिल पर चलते हुए गोचा दुम्बात्से कहते हैं, "देखो, हमने अपनी धरती के साथ क्या किया है.” यहां हर दिन सैकड़ों ट्रक बचे हुए खाने से भरी थैलियां, प्लास्टिक, स्क्रैप, इंजन ऑयल, और टूटे हुए कांच डंप करते हैं. जगह-जगह पर आग लगने की वजह से हमेशा धुंआ निकलता रहता है. हवा जलते हुए कचरे की बदबू से भरी हुई है. गायों का झुंड प्लास्टिक की थैलियां चबाती नजर आती हैं.  

यह लैंडफिल, जॉर्जिया के दूसरे सबसे बड़े शहर बटुमी से करीब 10 किलोमीटर दूर है. बटुमी काला सागर के किनारे स्थित है जहां काफी ज्यादा कसीनो हैं. इसलिए, इस शहर को दूसरा लास वेगस भी कहा जाता है. 1960 के दशक में यह इलाका सोवियत संघ के कब्जे में था. उसी समय इस जगह पर कचरा डंप करने की शुरुआत हुई थी. अब यह लैंडफिल करीब 74 एकड़ में फैल चुका है. इसकी ऊंचाई करीब 50 फीट हो गई है.  

दुम्बात्से की उम्र 34 साल है. वह दिहाड़ी मजदूर हैं. साथ ही, सामुदायिक कार्यकर्ता के तौर पर भी काम करते हैं. वह लैंडफिल के पास ही कचरे के ढेर पर मिले सामान से बनाई गई झोपड़ी में रहते हैं. उनके जैसे ही 20 अन्य परिवार भी यहां रहते हैं. सभी इस लैंडफिल पर कचरा बीन कर गुजर-बसर करते हैं. यहां रहने वाले अधिकांश लोग या तो काफी ज्यादा गरीब हैं या जुए की लत की वजह से कर्ज में डूबे हुए हैं. कई ऐसे लोग भी हैं जो अबखासिया से भागकर आए हैं और यहां रह रहे हैं.   

अबखासिया 1930 के दशक से सोवियत संघ के गणराज्य जॉर्जिया का हिस्सा था. सोवियत संघ के विघटन के बाद 1991 में जॉर्जिया ने सोवियत संघ से आजादी का ऐलान किया. इसके बाद, अबखासिया में भी लोगों ने अपने देश को जॉर्जिया से अलग आजाद देश बनाने के लिए विद्रोह कर दिया. इससे देश में गृह युद्ध छिड़ गया और हालात आज तक सामान्य नहीं हुए हैं. इस देश ने खुद को आजाद मुल्क घोषित कर दिया है, लेकिन सिर्फ पांच देशों ने ही इसे मान्यता दी है.  

दुम्बात्से ने एक हरे तालाब की ओर इशारा करते हुए कहा कि यह पारिस्थितिक आपदा है. वे लोग इसी तालाब की पानी का इस्तेमाल करते हैं. उनका मानना है कि लैंडफिल की वजह से ही यहां के जल स्रोत प्रदूषित हो गए हैं. यहां के बच्चे अक्सर बीमार रहते हैं. 

हवा, मिट्टी और समुद्र हो रहा प्रदूषित 

देश में सालाना 11 लाख 17 हजार 396 मीट्रिक टन कचरा उत्पन्न होता है. यह कचरा 33 लैंडफिल और 1,100 अवैध और अनियमित डंप साइटों के बीच डंप कर दिया जाता है. पिछले साल अदजारा के आसपास के दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र से 83,838 टन कचरा गोनियो पर डंप किया गया था. यह काम बटुमी नगरपालिका की देख-रेख में किया जाता है.  

विश्व बैंक के अनुसार, गोनियो वर्तमान में जॉर्जिया में सबसे बड़ा और सबसे खतरनाक डंपसाइट है. यहां न तो कचरे का उचित प्रबंधन किया जाता है और न ही यह यूरोपीय संघ के स्वच्छता मानकों के अनुरूप है. 

कुछ दशक पहले, 70 वर्षीय नतेला बेरिद्से और उनके पति गाय पालते थे और खेती करते थे. जब से लोगों ने गोनियो पर कचरा डालना शुरू किया, खेती होनी बंद हो गई. जमीन और पानी, दोनों जहरीला हो गये. बेरिद्से कहती हैं, "किसी ने हमारी मदद नहीं की. हमने जिंदगी जीने के लिए मजबूरन कचरा बीनने का काम शुरू किया.” 

स्वतंत्र पारिस्थितिकीविद् और अपशिष्ट प्रबंधन विशेषज्ञ काखा गुचमानिद्से कहते हैं, "गोनियो लैंडफिल इस इलाके के मुख्य प्रदूषकों में से एक है. यह हवा, मिट्टी, और समुद्र को प्रदूषित करता है. यहां कचरे के निपटारे के लिए कभी भी उचित प्रबंधन नहीं किया गया. यहां तक कि बाड़ भी नहीं लगाई गई.” 

इस इलाके के पास ही चोरोखी डेल्टा मौजूद है. यह डेल्टा प्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र है. काला सागर के जरिए दूसरे जगहों पर जाने वाले समुद्री जीवों का ठिकाना है लेकिन यहां भी जहरीला पानी रिसता हुआ पाया गया है.  

उचित प्रबंधन नहीं होने की वजह से लैंडफिल जलवायु पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं. कार्बनिक अपशिष्ट के विघटित होने पर उत्पन्न गैस में 40-60% मीथेन होता है. यह कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में ग्लोबल वॉर्मिंग के लिए काफी अधिक हानिकारक है. संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के अनुसार, जैविक कचरे का विघटन वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में लगभग 5% का योगदान देता है.

घरों से साल भर में कितना कचरा निकलता है?

पैसे के लिए कचरा बीनना 

लैंडफिल सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी चिंता का भी विषय है. सैकड़ों लोग लैंडफिल पर दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करते हैं. उनके पास न तो किसी तरह का सुरक्षा उपकरण होता है और न ही स्वास्थ्य बीमा.  

मिर्जा इस लैंडफिल पर बोतलें, धातु, एल्यूमीनियम, और तांबे खोजते हैं. वह इन कचरों को बटुमी में रीसाइक्लिंग कंपनी को 5.45 यूरो (करीब 458 रुपया) प्रति बैग के हिसाब से बेचते हैं. वह कहते हैं, "यह बहुत ही खतरनाक काम है.” यहां काम करने वाले कई लोग अक्सर जहरीले कचरे से जख्मी हो जाते हैं. उनकी तबीयत काफी खराब हो जाती है. 

अदजारा के वित्त और अर्थव्यवस्था मामलों के उप-मंत्री टॉर्निके कुचावा ने कहा, "लैंडफिल पर स्वच्छता से जुड़े किसी मानक का पालन नहीं किया जाता है. इसे जल्द से जल्द बंद करना काफी जरूरी है.” उन्होंने पुष्टि की कि काला सागर में जहरीला पानी रिस रहा है और खाने वाले सामान भी जहरीले हो सकते हैं. 

यूनिसेफ ने 2019 में बताया कि अदजारा क्षेत्र के 80% बच्चों के खून में खतरनाक रूप से लेड का स्तर बढ़ गया है. इसके पीछे की वजह देश में लैंडफिल जैसी खतरनाक साइटें बताई गई थीं.  

सरकार के वादे 

2009 में अदजारा की सरकार ने गोनियो डंपसाइट को बंद करने की योजना की घोषणा की. 2015 में, इसके पुनर्निर्माण और विकास के लिए यूरोपीय बैंक से 3 मिलियन यूरो और स्वीडिश अंतर्राष्ट्रीय विकास सहयोग एजेंसी से 4 मिलियन यूरो प्राप्त हुआ, ताकि कचरे के निपटारे के लिए ठोस व्यवस्था बनाई जा सके.  

कुचावा के अनुसार, बटुमी से लगभग 45 किलोमीटर उत्तर में त्सत्स्खलौरी में नई साइट निर्माणाधीन है और 2022 में खुलेगी. वहां यूरोपीय संघ के मानकों का पालन किया जाएगा. जैसे, मीथेन गैस को संग्रहित करने के लिए अलग से इकाई तैयार की जाएगी. 

कचरा प्रबंधन केंद्र सरकार के हरित विकास के वादे का महत्वपूर्ण हिस्सा है. जॉर्जिया ने प्रतिबद्धता जताई है कि वह यूरोपीय संघ के लक्ष्यों की तरह ही 2025 तक 50 प्रतिशत प्लास्टिक कचरों को रिसाइक्लिंग करने लगेगा और 2030 तक 80 प्रतिशत प्लास्टिक कचरों को. 

2019 के बाद से, जॉर्जिया में सभी नगर पालिकाओं के लिए अलग-अलग तरह के कचरे को अलग-अलग जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है. हालांकि, पारिस्थितिक विज्ञानी गुचमानिद्से के मुताबिक, अभी यह बात सिर्फ कागजों में है. जमीन पर इसका पालन नहीं हो रहा है. वह कहते हैं, "कचरे का बेहतर तरीके से प्रबंधन करने के लिए, नियमों में लगातार बदलाव होते रहना चाहिए. तब जाकर बेहतर समाधान हो पाएगा.” 

वहीं, मिर्जा को लगता है कि रीसाइक्लिंग से ज्यादा लाभ है. उन्हें डर है कि नए लैंडफिल के चालू होने से उनकी आय खत्म हो जाएगी क्योंकि नया लैंडफिल मौजूदा जगह से काफी दूर है. वह खतरनाक होने के बावजूद लैंडफिल पर काम करते रहना चाहते हैं.  

दुम्बात्से को भी आधिकारिक वादों पर काफी कम भरोसा है. वह कहते हैं कि कोई भी इस लैंडफिल पर काम करने वालों से बात करने नहीं आया है. अदजारा में वित्त और अर्थव्यवस्था मंत्रालय के एक प्रवक्ता के मुताबिक, गोनियो लैंडफिल पर रहने वाले दुम्बात्से जैसे लोग सरकारी योजनाओं में शामिल नहीं हैं या मुआवजे के हकदार नहीं हैं. 

कचरे के ढेर पर जगह-जगह आग लगी हुई है. बदबूदार धुंआ निकल रहा है. उसी कचरे के ढेर पर मिर्जा के बगल में मौजूद दुम्बात्से कहते हैं, "हम बिना किसी सुविधा के अपनी जिंदगी जीते रहेंगे. इसी कूड़े के ढेर पर जिंदगी गुजार लेंगे.” 

रिपोर्टः होली यंग

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