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तस्वीर: picture-alliance/dpa/STR

लौटा लिए गए तीनों कृषि कानून

चारु कार्तिकेय
२९ नवम्बर २०२१

तीनों विवादास्पद कृषि कानूनों को निरस्त करने वाले विधेयक को सरकार ने संसद के दोनों सदनों से पास करवा लिया है. विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने एक बार फिर संसदीय मर्यादा के खिलाफ काम किया है.

https://www.dw.com/hi/fresh-controversy-over-repeal-of-farm-laws/a-59967124

तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा पर अमल करते हुए केंद्र सरकार ने संसद के शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन इन कानूनों को वापस ले लिया. तीनों कानूनों को कृषि विधि निरसन विधेयक, 2021 के जरिए निरस्त कराया जाना है.

सरकार ने एक ही दिन में विधेयक को संसद के दोनों सदनों से पारित करवा लिया. लोक सभा में तो विधेयक बिना किसी चर्चा के मिनटों में पास हो गया. राज्य सभा में छोटी सी चर्च हुई. लेकिन विपक्ष के सांसदों ने विस्तृत चर्चा ना कराने का विरोध किया और सरकार पर संसदीय परंपरा ना निभाने का आरोप लगाया.

सवाल लोकतंत्र का

तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओब्रायन ने एक ट्वीट में कहा कि सरकार अब खुले तौर पर लोकतंत्र की अवमानना कर रही है.

पूर्व राजनयिक के सी सिंह ने भी ट्विटर पर लिखा कि संसद को "रबड़ की मुहर" में बदल दिया गया है.

सितंबर 2020 में जब सरकार ने तीनों कानूनों को संसद से पारित करवाया था तब भी सरकार पर ऐसे ही आरोप लगे थे. कानूनों को सबसे पहले जून 2020 में कोविड-19 महामारी के मद्देनजर पूरे देश में लगी तालाबंदी के बीच अध्यादेशों की शक्ल में लाया गया था.

किसानों ने तुरंत अध्यादेशों का विरोध शुरू कर दिया था. सितंबर आते आते तक तो इस विरोध ने व्यापक रूप ले लिया था और विपक्षी पार्टियां भी किसानों की मांगों का समर्थन करने लगी थीं. यहां तक कि इनके विरोध में अकाली दल ने एनडीए से अपना दशकों पुराना गठबंधन तोड़ लिया था.

लेकिन सरकार फिर भी पीछे नहीं हटी. सितंबर में अध्यादेशों को बाकायदा कानूनी जामा पहनाने के लिए उन्हें संसद के मॉनसून सत्र में विधेयक के रूप में लाया गया. उसके बाद भी विपक्ष ने मांग की कि इन्हें संसदीय समिति के पास भेज दिया जाए ताकि इनका बेहतर निरीक्षण हो सके.

दरकिनार होता विपक्ष

लेकिन सरकार ने इस मांग को भी स्वीकार नहीं किया और बिल किसी समिति को नहीं भेजे गए. फिर दोनों सदनों में बिलों को पारित करने के समय विपक्ष ने डिवीजन यानि बटन दबा कर मत डालने की मांग की लेकिन बिलों को दोनों सदनों में ध्वनि मत से पारित करा लिया गया.

कृषि कानूनों को निरस्त करने के लिए लाए गए विधेयक पर जब विपक्ष ने चर्चा की मांग की तो सरकार ने कहा कि ऐसी कोई परंपरा नहीं है. लेकिन राज्य सभा में कांग्रेस पार्टी के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने पत्रकारों को बताया कि किसी कानून को निरस्त कराने वाले विधेयक पर भी बीत दशकों में कम से कम 17 बार चर्चा हो चुकी है.

इस बीच सत्र के पहले दिन ही राज्य सभा से विपक्ष के 12 सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित भी कर दिया गया. मॉनसून सत्र के दौरान पेगासस जासूसी विवाद पर सदन में सरकार और विपक्ष के सांसदों के बीच झड़प हो गई थी.

विपक्ष के इन सांसदों को उसी दौरान किए गए उनके व्यवहार के लिए निलंबित किया गया है. निलंबन का प्रस्ताव संसदीय कार्य मंत्री प्रल्हाद जोशी लेकर आए और उसे ध्वनि मत से पारित करा लिया गया. इन सांसदों में कांग्रेस के छह, तृणमूल कांग्रेस के दो, शिव सेना के दो, सीपीआई का एक और सीपीएम का एक सांसद शामिल हैं.

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