अब ड़्रोन में बैठकर इन्सान भी उड़ेंगे | मंथन | DW | 09.06.2016
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मंथन

अब ड़्रोन में बैठकर इन्सान भी उड़ेंगे

ड्रोन, पहले इनका इस्तेमाल सिर्फ सेना करती थी. अब शौकिया या पेशेवर वीडियोग्राफर भी इन्हें उड़ाने लगे हैं. ये मशीनें इतनी आसान हो चुकी हैं कि कुछ दिनों के अभ्यास के बाद इन्हें कोई भी उड़ा सकता है.

अलेक्जांडर सोज़ेल ने ड्रोन में इन्सान के उडऩे का सपना सच कर दिया है. स्पोर्ट पायलट के रूप में वे हमेशा इलेक्ट्रिक मल्टीकॉप्टर से सीधे हवा में उड़ान भरने के सपने देखते थे. सालों तक वे अपनी टीम के साथ इस सपने को पूरा करने के लिए हाथ पांव मारते रहे. लेकिन इंसान समेत ड्रोन जैसे भारी एक जहाज को हवा में उड़ाना आसान नहीं था. बल्कि शुरुआत में तो यह असंभव लग रहा था पर अलेक्जांडर सोज़ेल इसमें कामयाब रहे हैं.

अपनी तकनीकी दूरदर्शिता और उड़ान से प्यार के चलते उन्होंने आखिरकार इंसान को उड़ाने वाला ड्रोन बना दिया. वह उड़ने के अनुभव को कुछ यूं बयां करते हैं, “जब आप ऊपर हवा में होते हैं, तो आस पास कुछ भी नहीं दिखता. आप मुक्त महसूस करते हैं. और किसी चीज के बारे में नहीं सोचते. लेकिन आपका ध्यान फिर भी पूरी तरह केंद्रित होता है.”

सोजेल पूरी दुनिया में अकेले हैं जो इलेक्ट्रिक मोटर की मदद से विमान को सीधा उड़ाने में कामयाब रहे हैं. बहुत सी कंपनियां इस पर प्रोजेक्ट चला रही हैं जिनमें बड़ी हेलीकॉप्टर कंपनियां भी हैं. लेकिन अब तक वो कामयाब नहीं हो पाई हैं. उन्होंने जब अपना पहली उड़ान का वीडिया यूट्यूब पर डाला तो तहलका मच गया. उसे लाखों बार देखा गया है. पहली उड़ान सिर्फ पांच मिनट चली थी और उन्हें 15 मीटर से ऊंचा जाने की अनुमति नहीं थी. लेकिन यह अद्भुत अनुभव रहा.

सोजेल कहते हैं कि यह उड़ने वाली मशीन नहीं बल्कि एक तकनीकी कंस्ट्रक्शन है जिसके ऊपर हमने एक सीट रख दी है. इस परीक्षण के जरिये उन्होंने दिखाया है कि इलेक्ट्रिक मोटर के जरिये सीधी उड़ान भरी जा सकती है. अब वह एक और मशीन बना रहे हैं जिसके बारे में वह ज्यादा उत्साहती हैं. वह कहते हैं, “वह असल विमान होगा और स्वाभाविक रूप से उसमें सुरक्षा , सुविधा, आराम और हैंडलिंग के अलग मानक हैं, जिन्हें हम पूरा भी करना चाहते हैं.“

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सोजेल इस तरह से काम कर रहे हैं कि उनकी बनाई मशीन को बाजार हाथोंहाथ ले. योजना है कि 18 रोटर वाला ऐसा मल्टीकॉप्टर बनाया जाए जिसमें एक या दो लोगों के लिए केबिन हो. फायदा ये होगा कि एक दो मोटर यदि न भी चले तो इस मशीनी परिंदे को सुरक्षित नीचे उतारा जा सकेगा.

बैटरी के बोझ की भरपाई के लिए बॉडी एकदम हल्के कार्बन से बनाई जा रही है. इरादा है कि टू सीटर मल्टीकॉप्टर का भार सिर्फ 450 किलोग्राम हो ताकि वह एक घंटे तक उड़ सके.

आईबी/वीके

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