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तस्वीर: AFP/Getty Images/J. Lago
समाज

जीपीएस लैस घड़ी से परेशान कर्मचारी

१८ मार्च २०२०

नगर निगम के कर्मचारी की क्षमता और उनपर नजर रखने के लिए जीपीएस घड़ी का इस्तेमाल हो रहा है. कर्मचारी इसे अपमानित करने वाला बता रहे हैं.

https://www.dw.com/hi/feature-under-watch-indian-city-workers-protest-digital-surveillance/a-52820528

अनिल शर्मा हर शाम काम खत्म होने के बाद चंडीगढ़ में रैली मैदान में अन्य कर्मचारियों के साथ इकट्ठा होते हैं. यह लोग स्थानीय प्रशासन द्वारा जीपीएस घड़ी के इस्तेमाल का विरोध कर रहे हैं. जीपीएस घड़ी कर्मचारियों के ड्यूटी का डाटा जमा करती है.

अनिल शर्मा नगरपालिका में बतौर माली का काम करते हैं. स्थानीय प्रशासन ने शर्मा जैसे कर्मचारियों को जीपीएस वाली घड़ी पहनने को कहा है जिससे उनकी दक्षता को ट्रैक करने में सहायता मिलेगी. शर्मा इसे "अपमानजनक" और "अनैतिक" बताते हैं. थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन से शर्मा कहते हैं, "मैंने इस शहर को सुंदर बनाने के लिए 25 साल काम किया. अब वह मुझे एक बंधुआ मजदूर बनाना चाहते हैं और मुझे अपमानित करना चाहते हैं." फोन पर दिए गए इंटरव्यू में शर्मा कहते हैं, "इसके अलावा, हमारे पास सुपरवाइजर हैं जो हमारे काम पर निगरानी रखते हैं. हमें इस तरह की निगरानी के लिए हमें मजबूर नहीं किया जा सकता है. यह अनैतिक है.”

भारत में 100 बड़े शहरों को स्मार्ट सिटी में तब्दील करने की योजना चल रही है. राज्य सरकारें जीपीएस घड़ी जैसी तकनीकों का इस्तेमाल डाटा इकट्ठा करने के लिए कर रही हैं जिसकी मदद से कार्यक्षमता और बजट को बेहतर बनाया जा सके. लेकिन नगरपालिका कर्मचारी, नागरिकों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले कार्यकर्ता और तकनीक विशेषज्ञ निजता और डाटा के दुरुपयोग पर चिंता जता रहे हैं.

साथ ही जीपीएस घड़ी के बंद होने या फिर घड़ी का जीपीएस से संपर्क टूट जाने को लेकर भी आशंकित हैं. पिछले तीन महीने से शर्मा और उनके साथी अन्य विभाग के कई कर्मचारियों के साथ मिलकर जीपीएस घड़ी के इस्तेमाल को बंद करने की मांग कर रहे हैं. चंडीगढ़ में माली, सफाई कर्मचारी और स्वास्थ्यकर्मी प्रशासन से जीपीएस घड़ी के इस्तेमाल को बंद करने की मांग कर रहे हैं.

देश के दर्जनों शहरों में नगरपालिका कर्मचारी सर्विलांस डाटा को कार्यक्षमता और वेतन से जोड़ने का विरोध कर रहे हैं. चंडीगढ़ में लॉन्च हुई प्रोजेक्ट के तहत कर्मचारी के लिए ड्यूटी के समय में जीपीएस घड़ी पहनना अनिवार्य है. कर्मचारी जो घड़ी पहनते हैं वह सेंट्रल रूम में डाटा भेजती है, सेंट्रल रूम में बैठा अफसर हर एक कर्मचारी की हलचल पर नजर रखता है. अगर कर्मचारी अपने हाथ से घड़ी उतार देता है तो उस पर जुर्माना लगाया जाता है, हालांकि यह आंकड़े मौजूद नहीं है कि कितने कर्मचारियों को अब तक जुर्माना देना पड़ा या फिर कितना जुर्माना लगा. बेंगलुरू स्थित गैर लाभकारी संगठन आईटी फॉर चेंज की डिप्टी डायरेक्टर नंदन चामी कहती हैं, "कर्मचारी और नियोक्ता के जैसे रिश्ते होते हैं उसमें हमें यह जानना जरूरी है कि इस तरह की निगरानी की सीमाएं क्या हैं और कर्मचारियों के क्या-क्या अधिकार हैं."

चंडीगढ़ के नगर निगम कमिश्नर के के यादव कहते हैं, "हमारे कर्मचारी ड्यूटी पर काम कर रहे हैं या नहीं यह जानने का यह एक कारगर जरिया है." उनका कहना है कि वह भी ऐसी ही एक घड़ी पहनते हैं. यादव कहते हैं, "इस ट्रैकर से उनकी सैलरी जुड़ जाएगी और पूरा डाटा पब्लिक डोमेन में डाला जाएगा ताकि उनकी जवाबदेही बढ़ाई जा सके."

एए/सीके (थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन)

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