अपने घरों को बचाने के लिए लोग अपनी जान जोखिम में क्यों डालते हैं? | विज्ञान | DW | 26.07.2021
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विज्ञान

अपने घरों को बचाने के लिए लोग अपनी जान जोखिम में क्यों डालते हैं?

निकासी के आदेशों के बावजूद अक्सर ऐसा देखने में आता है कि लोग मौसम की प्रतिकूल दशाओं के दौरान अपने घर में रहने और वहीं रहकर बचाव करने का विकल्प चुनते हैं. वे ऐसा क्यों करते हैं?

दिसंबर 2019 में जैक एगन ने ऑस्ट्रेलियाई समुद्र तट पर अपने घर को आग की लपटों में घिरते हुए देखा. अधिकारियों के घर खाली करने के आदेश के बावजूद, उन्होंने और उनके साथी कैथ ने वहीं रहने और अपने घर को आग से बचाने का फैसला किया. एगन को जंगल की आग को नजदीक से देखने का कुछ अनुभव था और उन्होंने सोचा कि अपनी संपत्ति को बचाया जा सकता है.

डीडब्ल्यू से बातचीत में एगन ने बताया, "वहां रुकने का मतलब है कि निश्चित तौर पर यह जोखिम आपको खुद ही उठाना है. किसी और से मदद की अपेक्षा आप न करें." अग्निशामक पंप और नली का उपयोग करके घर में रहने और बचाव करने का निर्णय एगन की योजना का हिस्सा था. लेकिन जब उनका घर आग की चपेट में आ गया, तो उन्हें अपने पड़ोसी के घर पर जाकर रहना पड़ा जो कि अपेक्षाकृत अधिक अग्निरोधक और सुरक्षित था.

एगन कहते हैं, "मुझे वास्तव में अग्निशमन शब्द पसंद नहीं है क्योंकि ऐसा लगता है कि आप इससे लड़ सकते हैं. आप केवल अपने अस्तित्व का प्रबंधन कर सकते हैं और यदि आपके पास बुलडोजर है तो आग का रास्ता बदल सकते हैं." बाढ़, तूफान और जंगल की आग जैसी चरम मौसम की घटनाओं में कुछ लोग निकासी चेतावनियों के बावजूद अपने घरों की रक्षा के लिए रुकेंगे. भविष्य में ऐसा और भी ज्यादा देखने को मिलेगा क्योंकि ग्लोबल वॉर्मिंग के चलते ऐसी घटनाएं और ज्यादा देखने को मिलेंगी.

अमेरिका के नॉक्स कॉलेज में साइकोलॉजी के प्रोफेसर फ्रैंक मैकएंड्रयू कहते हैं, "हमारे घर वास्तव में हमारी पहचान बताते हैं कि हम कौन हैं. यह दुनिया का एकमात्र स्थान है जिस पर हमारा नियंत्रण माना जाता है. यहां हमारी इजाजत के बिना कोई और अंदर भी नहीं आ सकता."

कई लोगों के लिए घर एक आश्रय स्थल से बढ़कर है. यह उनका सुरक्षित स्थान है. एक ऐसी जगह जिसे उन्होंने अपना बनाया है, उन वस्तुओं से भरा हुआ है जो उन्हें उनके अतीत से जोड़ती हैं और जहां से उनकी यादें जुड़ी रहती हैं. मैकएंड्रूयू कहते हैं, "यह उन सभी चीजों का भंडार है जो आपको वह बनाती हैं जो आप हैं."

खतरे से खेलने का मनोविज्ञान

ऐसे कई कारण हैं जिनकी वजह से कोई व्यक्ति अपने जीवन को गंभीर जोखिम के बावजूद घर छोड़ नहीं पाता. कुछ लोगों की पूरी रोजी-रोटी घरों में बंधी हुई है. चरम मौसम की घटनाओं के कारण होने वाले नुकसान के लिए बीमा कुछ लोगों के लिए बहुत महंगा हो सकता है, जबकि जोखिम वाले क्षेत्रों में रहने वाले अन्य लोगों के लिए अपनी संपत्ति का बीमा करने वाली कंपनी को ढूंढना मुश्किल और कभी-कभी असंभव भी हो सकता है.

तूफान कैटरीना से एक सबक सीखा गया है. यह श्रेणी 5 का तूफान था जिसने साल 2005 में अमेरिका में कहर ढाया और 1,800 से अधिक लोगों की जान गई. उस स्थिति में भी कुछ लोग ऐसे थे जो अपने पालतू जानवरों को भी पीछे छोड़ने को तैयार नहीं थे. इस घटना के बाद निकासी क्षेत्रों का निर्माण हुआ, खासतौर से जानवरों के लिए.

उत्तरी यूरोप में जुलाई में आई बाढ़ के दौरान खतरे की चेतावनी इतनी देर से आई कि जब तक लोग निर्णय लेते तब तक आपदा उनके दरवाजे पर दस्तक दे चुकी थी. अमेरिका में कृषि विभाग के अंतर्गत रॉकी माउंटेन रिसर्च स्टेशन में काम करने वाले एक समाजविज्ञानी सार्क मैककैफ्रे कहते हैं कि इन स्थितियों में लोगों का घरों के भीतर रहना कहीं ज्यादा सुरक्षित होता है. कुछ लोग इसलिए रहते हैं क्योंकि उनके पास एक व्यवसाय है जिसे वे बचाना चाहते हैं या उनका मानना है कि वे अपने घर की रक्षा कर सकते हैं.

इसी तरह की चिंताओं को बांग्लादेश में तीन चक्रवात के दौरान तटीय स्थलों में रहने वाले लोगों में भी देखा गया. साल 2007 में चक्रवात सिड्र ने जब माजर चार द्वीप में दस्तक दी तो कुछ लोग अपना घर और सामान पीछे छोड़ सकते थे क्योंकि चक्रवात ने उनकी खाद्य सुरक्षा को प्रभावित नहीं किया था.

लेकिन दूसरों ने महसूस किया कि संपत्ति के इस नुकसान से उनके अस्तित्व को खतरा होगा क्योंकि वे अपने परिवारों के लिए भोजन उपलब्ध नहीं करा पाएंगे. अमेरिका में शोध छात्र अयूब कार्लसन कहते हैं, "एक मछुआरा जिसने अपने जीवन भर की बचत मछली पकड़ने वाले जाल और नाव को खरीदने में लगा दी हो, वो शायद यह महसूस न करे कि वह इसे छोड़ने में सक्षम है."

अनिश्चितता का सामना

कोविड महामारी शुरू होने के बाद से डेढ़ साल में लोगों को किसी न किसी तरह की अनिश्चितता का सामना करना पड़ा ही है. चाहे वो कोविड संक्रमण का जोखिम रहा हो, अस्पताल में बीमारी से जूझ रहे प्रियजनों के रूप में खड़े होने का हो या फिर यह सोचकर कि आपको अपने देश लौटने की अनुमति कब दी जाएगी.

समाजशास्त्री मैककैफ्रे कहते हैं कि इस अनिश्चितता से निपटने का सबसे सही तरीका यही है कि ज्यादा से ज्यादा जानकारी जुटाकर अनिश्चितता की भयावहता को कम किया जाए. मैककैफ्रे कहते हैं, "हालांकि ऐसा लग सकता है कि लोग अधिकारियों की चेतावनियों को नहीं सुनते हैं, लोग आधिकारिक संकेतों पर ध्यान देते हैं. बात बस इतनी सी है कि कुछ लोग ऐसा फैसला अपने दिमाग से लेते हैं."

चरम मौसम की घटनाओं में लोगों के निर्णय उनकी जोखिम धारणा से प्रेरित होते हैं. ये व्यक्तिपरक निर्णय होते हैं जिसमें वे इस बारे में निर्णय लेते हैं कि ऐसा होने की कितनी संभावना है और यह कितना बुरा हो सकता है.

मैककैफ्री रिस्क एनालिसिस जर्नल में साल 2017 में प्रकाशित एक अध्ययन के प्रमुख लेखक हैं. इस अध्ययन में यह पाया गया कि जंगल की आग के लिए अधिकारियों के निकासी आदेशों का जवाब देने के लिए किसी व्यक्ति के निर्णय पर क्या प्रभाव पड़ता है. अध्ययन में पाया गया कि जहां अधिकांश लोग कार्रवाई करने के लिए निकासी आदेश जैसे आधिकारिक संकेतों पर निर्भर थे, वहीं बड़ी संख्या में लोगों ने निर्णय लेने से पहले आधिकारिक और भौतिक संकेतों के संयोजन पर भरोसा किया, जैसे कि जंगल की आग की लपटें देखना.

जीवन के लिए क्या जरूरी है?

मैककैफ्रे कोलोराडो में रहते हैं. 2020 में वहां भीषण आग लगी. एक बुजुर्ग दंपति ने आग के बावजूद यहीं रहने का फैसला किया क्योंकि यहां उन्होंने सपनों का घर बनाया था. आग की वजह से दोनों की मौत हो गई. मैककैफ्रे कहते हैं, "उनके बच्चों को यह कहते हुए सुनना बड़ा दर्दनाक था कि 'हमें अपने मां-बाप को खोने का इसलिए बहुत अफसोस है कि उन्होंने उस घर में दम तोड़ दिया जिसे बड़े शौक से अपना जीवन बिताने के लिए बनवाया था.' वो घर उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण था."

एगन कहते हैं कि आग ने उन्हें अपना पेशा बदलने पर मजबूर कर दिया. आग लगने के तीन महीने बाद उन्होंने फैसला किया कि वे अपनी नौकरी छोड़ कर जलवायु कार्यकर्ता के तौर पर काम करेंगे. उनका कहना है कि चरम मौसम की घटना के जोखिम वाले क्षेत्रों में रहने वालों के लिए एक सम्यक योजना का होना आवश्यक है, "जब ऐसी आपदा आप पर आती है, जब ऐसा वास्तव में होता है, तो आप साफ साफ कुछ भी सोचने की हालत में नहीं रह जाते हैं."

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