ईयू सम्मेलन: अनिश्चितता के गहरे बादल | NRS-Import | DW | 16.09.2016
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ईयू सम्मेलन: अनिश्चितता के गहरे बादल

ब्रेक्जिट के बाद यूरोपीय संघ का पहला शिखर सम्मेलन स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा में हो रहा है. ब्रातिस्लावा से डीडब्ल्यू की बारबरा वेसेल का कहना है कि सदस्य देशों में एकता की कमी है.

शिखर सम्मेलन से पहले यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष डोनाल्ड टस्क ने कहा कि वह दोटूक अंदाज में विश्लेषण करेंगे कि यूरोपीय संघ से बाहर जाने के ब्रिटेन के फैसले की क्या वजह रहीं. उन्होंने कहा कि वह 'ब्रातिस्लावा रोडमैप ' भी तैयार करेंगे जो मौजूदा उदासीनता से निकलने का रास्ता दिखाएगा.

जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल ने भी माना है कि यूरोप इस समय अपने नाजुक दौर से गुजर रहा है. सम्मेलन के सिलसिले में गुरुवार को फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद से बैठक के बाद उन्होंने कहा कि सदस्य देश तेजी और कारगर तरीके से काम करेंगे. लेकिन ये बात जर्मनी और फ्रांस पर भी लागू होती है. यूक्रेन जैसे मुद्दों पर तो वे एक दिखते हैं, लेकिन अन्य मुद्दों पर उनके बीच कम ही सहमति दिखती है.

अब मैर्केल कुछ ऐसे ठोस कामों को उठा रही हैं जिनसे यूरोयीय संघ के नागरिकों को बताया जा सके कि एक साथ रहने का कितना फायदा होता है. वह प्रशासनों के बीच सहयोग बढ़ाना चाहती हैं, खर्चों में कटौती चाहती हैं और यूरोपीय संघ की रक्षा परियोजनाओं को व्यवस्थित करना चाहती हैं.

लेकिन ये काम आसान नहीं होगा. अपनी प्रवासी नीति को लेकर उन्हें अब भी विरोध झेलना पड़ रहा है. इस समस्या से निटपने के बारे में एकजुटता की कमी दिखाई देती है. पोलैंड, चेक रिपब्लिक, स्लोवाकिया और हंगरी जैसे देश मुसलमान देशों से प्रवासियों को लेने के बिल्कुल खिलाफ है और वे ईसाइयत को ही यूरोपीय संघ का इकलौता साझा मूल्य मानते हैं.

इस मुद्दे पर सबसे ज्यादा मुखर हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान हैं जिन्हें पोलिश प्रधानमंत्री का भी समर्थन हासिल है. यहां तक कि जिस ग्रीस को कर्ज संकट के दौरान यूरोपीय संघ के पैसे से बहुत फायदा हुआ है, वो भी भूमध्यसागरीय देशों से संघ के खिलाफ खड़े होने को कहा रहा है.

तस्वीरों में देखिए: टूटता संसार

इस सम्मेलन में ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरीजा मे को आमंत्रित नहीं किया गया है, लेकिन निश्चित तौर पर ब्रेक्जिट चर्चा का एक बड़ा मुद्दा होगा. 23 जून को ब्रेक्जिट जनमत संग्रह में ब्रिटेन ने जब से यूरोपीय संघ से बाहर जाने को हरी झंडी दिखाई है, तब से यूरोपीय संघ के सामने एकता का संकट खड़ा हो गया है. लेकिन जब तक ब्रिटेन संघ से औपचारिक तौर पर बाहर जाने के लिए आर्टिकल 50 का इस्तेमाल नहीं करेगा, तब तक कुछ नहीं होगा. बहरहाल अनिश्चितता के बीच भविष्य को लेकर आशंकाएं बनी हुई हैं.

बारबरा वेसेल/एके

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