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ईयू-चीन वर्चुअल सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईयू कमीशन की प्रेसीडेंट उर्सुला फोन डेय लायन
तस्वीर: Olivier Matthys/AFP

क्या चीन को पश्चिम की तरफ मोड़ सकेगा ईयू-चीन सम्मेलन

१ अप्रैल २०२२

यूरोपीय संघ के कई देश चीन को चेतावनियां दे चुके हैं तो बीजिंग ईयू के कुछ नेताओं को ब्लैकलिस्ट कर चुका है. ब्रसेल्स में ईयू-चीन सम्मेलन इसी कड़वाहट के बीच हो रहा है.

https://www.dw.com/hi/eu-china-summit-lure-beijing-toward-the-west/a-61332751

यूक्रेन पर रूस का हमला और इस हमले पर चीन की चुप्पी, मौजूदा दुनिया की इस तस्वीर में यूरोपीय संघ और बीजिंग के बीच बढ़ती कलह भी छुपी है. चीन ने यूक्रेन युद्ध के और ज्यादा भड़कने की आशंका पर चिंता जताई है. युद्ध की जड़ कहां है, इसे लेकर यूरोपीय संघ और चीन का रुख बिल्कुल उल्टा है. चीन भी रूस का समर्थन करते हुए युद्ध के लिए नाटो की विस्तारवादी नीतियों को जिम्मेदार ठहरा रहा है. वहीं यूरोपीय संघ और पश्चिमी देश रूस के आक्रामक रवैये को समस्या की जड़ मान रहे हैं.

ईयू-चीन सम्मेलन से ठीक पहले चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने जर्मनी के फ्योनिक्स टीवी चैनल से बात करते हुए कहा, "चीन और रूस के रिश्ते सफलता से आगे बढ़ते जा रहे हैं." लेकिन इस बयान से कुछ ही दिन पहले चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग कह चुके है कि उनका देश शांति के साथ खड़ा है और युद्ध का विरोध करता है.

सम्मेलन में यूरोपीय संघ के अधिकारी चीन के साथ यूक्रेन युद्ध पर बातचीत करेंगे. फिनलैंड की प्रधानमंत्री साना मारीन ने तो पहले ही कह दिया है कि, "हमें इस बात की पुष्टि करनी होगी कि चीन इतिहास में सही पक्ष के साथ रहे."

यूरोपीय काउंसिल ने एक बयान जारी कर कहा है कि ईयू, चीन के साथ मानवाधिकारों के मसले पर भी बातचीत जारी रखने की कोशिश करेगा. एशिया की सबसे बड़ी और दुनिया की दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्था चीन के साथ, जलवायु परिवर्तन और कोविड-19 महामारी जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी.

Virtueller EU-China-Gipfel in Brüssel
हाल के बरसों में चीन और यूरोपीय संघ के संबंध खराब हुए हैंतस्वीर: Olivier Matthys/REUTERS

एंड्रयू स्मॉल, बर्लिन में जर्मन मार्शल फंड ऑफ द यूएस के चीन मामलों के एक्सर्ट हैं. स्मॉल को लगता है कि इस सम्मेलन में यूरोपीय संघ चीन को चेतावनी देने की कोशिश करेगा, "पिछले कुछ हफ्तों में हमने यूरोपीय नेताओं के ऐसे कई बयान देखे हैं जो रूस के साथ चीन की गाढ़ी होती दोस्ती पर चिंता जताते हैं."

डीडब्ल्यू से बात करते हुए स्मॉल ने कहा, "ईयू के नेता इस बात को लेकर जागरुक हो चुके हैं कि चीन के साथ संबंधों को फिर से लंबे समय के मुताबिक साधने की जरूरत है. रूस के हमले ने ईयू देशों को पड़ोसियों के लिए सैन्य खतरा बनने वाले अधिकारवादी देशों पर निर्भरता के जोखिम दिखा दिए हैं."

इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप में चीन मामलों की वरिष्ठ समीक्षक अमांडा हसियाओ की राय अलग है. डीडब्ल्यू से बातचीत में वह कहती हैं, "चीन चाहेगा कि यूरोप के साथ इस सम्मेलन के बाद ईयू के नेता यूक्रेन मुद्दे पर उसके रुख को समझें और ईयू-चीन रिश्तों के भविष्य पर असर न पड़े."

चीन को लेकर असहज हो रहे हैं यूरोपीय देश
चीन को लेकर असहज हो रहे हैं यूरोपीय देशतस्वीर: Rainer Unkelimago images

यूरोपीय संघ-चीन के रिश्तों के सामने नई चुनौतियां

उईगुर मुसलमानों के प्रति चीन के दमनकारी व्यवहार की आलोचना करने के बाद से ही बीजिंग और यूरोपीय संघ के रिश्तों में खटास है. यूरोपीय संघ चीन की कारोबारी नीतियों की आलोचना कर चुका है. यूरोपीय संघ के देश लिथुएनिया के साथ कारोबार पर चीन प्रतिबंध लगा चुका है. 2021 में चीन ने यूरोपीय संघ के कुछ नेताओं पर भी प्रतिबंध लगाए थे. इन कदमों के बाद दोनों पक्षों के बीच कड़वाहट और बढ़ गई.

जर्मन राजनेता राइनहार्ड ब्यूटिकोफर यूरोपीय संसद के चीनी प्रतिनिधि मंडल के प्रमुख हैं. ब्यूटिकोफर को नहीं लगता कि इस सम्मेलन में चीन और यूरोपीय संघ विवादों को सुलझा सकेंगे. वह कहते हैं, "मुझे उम्मीद है कि यूरोप दो टूक अंदाज में बात करेगा और चीन के साथ सभी मसलों को स्पष्टता से सामने रखेगा, इनमें चीन अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी के तहत हांगकांगवासियों की आजादी का दमन और ताइवान के साथ चीन का व्यवहार भी शामिल है. लेकिन मैं यह उम्मीद नहीं करता कि इस सम्मेलन के आखिर में प्रतिबंधों को वापस लेने जैसे नतीजे सामने आएंगे."

राइनहार्ड ब्यूटिकोफर
राइनहार्ड ब्यूटिकोफरतस्वीर: Malte Ossowski/Sven Simon/imago images

चीन ने बीते साल यूरोपीय संघ के जिन पांच नेताओं को ब्लैकलिस्ट किया, उनमें ब्यूटिकोफर भी शामिल हैं. यह कदम ईयू द्वारा मानवाधिकारों को लेकर चीन की आलोचना करने के बाद उठाया गया. ब्यूटिकोफर कहते हैं, "उन प्रतिबंधों को लागू करने के बाद जो भी वार्ताएं हुई हैं, उनमें चीनियों ने कभी इस बात को स्वीकार ही नहीं किया कि अगल कदम उन्हें उठाना है."

हेग सेंटर फॉर स्ट्रैटजिक स्ट्डीज (HCSS) में चीन मामलों के समीक्षक जोरिस टीर, इस मामले को कहीं ज्यादा संवेदनशील बता रहे हैं. उनके मुताबिक, चीन का रूस के प्रति झुकाव यूरोपीय संघ के लिए नई चुनौती बन रहा है. टीस कहते हैं, "चीन के पास निर्यात के लिए ईयू जैसा अहम बाजार है, चीन इसका इस्तेमाल जारी रखना चाहेगा. इस सम्मेलन से पता चलेगा कि चीन इस दिशा में संतुलन साधने के लिए क्या करता है, वह कैसे यूरोपीय संघ को अमेरिका से अलग करने की कोशिश करता है."

बनते बनते क्या उलझ गई चीन अमेरिका की बात

क्या पश्चिम की तरफ झुक सकेगा चीन?

ईयू और नाटो के नेता साफ चेतावनी दे चुके हैं कि अगर चीन ने प्रतिबंधों से बचने में रूस की मदद की तो उसे नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं. टीर कहते हैं, "2022 में चीन, अमेरिका को साफ रूप से अपना प्रमुख शत्रु मानता है. अमेरिका चीन के अहम हितों को नुकसान पहुंचा रहा है, एक के बाद एक आए अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने कह दिया है कि उदारवादी लोकतंत्र ही अकेली कानूनसम्मत शासन प्रणाली है. ऐसे में ईयू की चीन को पश्चिम की तरफ झुकने की उम्मीद अधूरी रहेगी."

वहीं दूसरी तरफ रूस कई मामलों में चीन का पक्ष लेता रहा है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन न तो चीन का मानवाधिकार रिकॉर्ड देखते हैं, ना ही व ताइवान या हांगकांग का जिक्र करते हैं. इसके ऊपर से रूस, ऊर्जा के भूखे चीन को सस्ता ईंधन भी मुहैया कराता है. साम्यवादी समाजवाद का नाता भी उन्हें एक दूसरे के करीब लाता है.

चीन मामलों के एक्सपर्ट एंड्र्यू स्मॉल कहते हैं कि चीन आर्थिक और सामरिक कारणों से यूरोप की अहमियत समझता है. लेकिन चीन चाहता है कि यूरोपीय संघ अमेरिका से अलग अपनी नीतियां बनाए.

रिपोर्ट: प्रिया शंकर

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