फेसबुक को तोड़ना आसान नहीं, पर अभी रोकने की जरूरतः मार्गरेटे वेस्टागेर | दुनिया | DW | 27.10.2021
  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages
विज्ञापन

दुनिया

फेसबुक को तोड़ना आसान नहीं, पर अभी रोकने की जरूरतः मार्गरेटे वेस्टागेर

सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक के बारे में एक के बाद एक हो रहे खुलासों से विभिन्न देशों के नेताओं में चिंता है और अब इस कंपनी को रोके जाने पर चर्चा शुरू हो गई है.

यूरोपीय कॉम्पीटिशन कमीशनर मार्गरेटे वेस्टागेर ने डॉयचे वेले को दिए एक इंटरव्यू में कहा है कि फेसबुक के खिलाफ फौरन कार्रवाई करने की जरूरत है. मंगलवार को दिए इस इंटरव्यू में वेस्टागेर ने कहा कि फेसबुक को तोड़ने में तो सालों लग सकते हैं इसलिए फौरन कार्रवाई करनी चाहिए ताकि यह सोशल मीडिया कंपनी और नुकसान ना कर सके.

जब वेस्टागेर से पूछा गया कि क्या फेसबुक इतनी बड़ी और ताकतवर हो चुकी है कि बाहर से उसे बदलने की कोशिशें व्यर्थ हैं, तो उन्होंने कहा, "हमारे लोकतंत्र के लिए नहीं." उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक ताकतें अगर साथ मिलकर काम करें तो यह सुनिश्चित कर सकती हैं कि फेसबुक को कैसे काम करना चाहिए.

Belgien I Margrethe Vestager I EU

यूरोपीय कॉम्पीटिशन कमीशनर मार्गरेटे वेस्टागेर

वेस्टागेर ने कहा कि जब बात ऐसी कंपनियों की हो रही हो, जो लोकतंत्र पर गहरा असर डाल सकती हैं, लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं, तो सख्त नियम बनाए जाने की जरूरत है. वेस्टागेर ने कहा, "फेसबुक जिस तरह के खतरे युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य के लिए खड़े कर रही है, उनका आंकलन करने के लिए उसे तैयार करना और इस बात के लिए तैयार करना कि बाहरी लोग जांच करें और देखें कि चीजें ठीक की जा सकती हैं या नहीं, यह भी एक अहम कदम होगा."

अभी कार्रवाई की जरूरत

पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक पर इस तरह के इल्जाम लग रहे हैं कि उसने अपने फायदे के लिए नफरती संदेशों को बढ़ावा दिया और ऐसी सामग्री को फैलाने में मदद की, जिससे सामाजिक और लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंचता है. हाल ही में समाचार एजेंसी एपी ने लीक हुए दस्तावेजों के हवाले से लिखा था कि फेसबुक के एल्गोरिदम ने ही हेट स्पीच को बढ़ावा दिया और खतरों को जानते हुए भी कार्रवाई नहीं की.

फेसबुक की पूर्व कर्मचारी फ्रांसिस हॉगन ने भी कई गंभीर आरोप लगाए हैं जिनमें शामिल है कि फेसबुक जानती थी कि उसकी नीतियों से बच्चों की मानसिक स्थिति प्रभावित हो सकती है. वेस्टागेर कहती हैं कि यूरोपीय आयोग ने ऐसे कानून का मसौदा तैयार किया है जो अभिव्यक्ति की आजादी के साथ-साथ इस बात का संतुलन बनाने की कोशिश करता है कि वे चीजें दफा की जाएं जो ऑफलाइन अवैध हैं, जैसे कि हिंसा भड़काने की कोशिश.

वेस्टागेर कहती हैं, "अगर हम किसी ऐसे के बारे में बात कर रहे हैं जो मानसिक स्वास्थ्य और हमारे लोकतांत्रिक विकास दोनों को प्रभावित कर रहा है तो हमें बहुत सख्ती बरतने की जरूरत है." उन्होंने माना कि फेसबुक के खिलाफ किसी तरह की कानूनी लड़ाई का कोई अंत नहीं होगा और यह सोशल मीडिया कंपनी सालों तक अदालतों में लड़ सकती है.

वीडियो देखें 03:53

कितने स्मार्ट हैं फेसबुक के ग्लासेज

डेनमार्क की राजनीतिज्ञ वेस्टागेर ने उम्मीद जताई है कि अगर यूरोपीय संघ अभी कार्रवाई करे तो चीजें बदल सकती हैं तब छोटे उद्योगों को बाजार तक पूरी पहुंच मिलेगी और फेसबुक जैसी विशालकाय कंपनियों को अपने किए नुकसान की जिम्मेदारी लेनी होगी.

भारत में फेसबुक पर विवाद

फेसबुक के कुछ लीक हुए दस्तावेजों से पता चला है कि यह वेबसाइट भारत में नफरती संदेश, झूठी सूचनाएं और भड़काऊ सामग्री को रोकने में भेदभाव बरतती रही है. खासकर मुसलमानों के खिलाफ प्रकाशित सामग्री को लेकर कंपनी ने भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया है.

समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (एपी) के हाथ लगे कुछ दस्तावेजों से पता चला है कि भारत में आपत्तिजनक सामग्री को रोकने में फेसबुक नाकाम रही है. इस बात के सामने आने के बाद विपक्षी कांग्रेस ने कंपनी पर भारत के चुनावों को "प्रभावित" करने और लोकतंत्र को "कमजोर" करने का आरोप लगाते हुए इसकी संयुक्त संसदीय समिति से जांच कराने की मांग की है.

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया साइट फेसबुक ने भारत में खुद को "फेकबुक" में तब्दील कर लिया है. कांग्रेस ने अपने आरोप को दोहराया कि बीजेपी से सहानुभूति रखने वालों ने फेसबुक में "घुसपैठ" की है और यह सोशल मीडिया दिग्गज बीजेपी की "सहयोगी" की तरह काम कर रही है.

कंपनी के शोधकर्ताओं ने बताया है कि इसके मंच पर "भड़काऊ और भ्रामक मुस्लिम विरोधी सामग्री" से भरे समूह और पेज हैं. भारत में सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक और भड़काऊ सामग्री एक बड़ी चिंता का विषय रहा है. फेसबुक या वॉट्सऐप पर साझा की गई सामग्री के कारण हिंसा तक हो चुकी है.

रिपोर्टः विवेक कुमार (एपी)

DW.COM