ओलंपिक खेलों से नहीं हटता कोविड, स्कैंडल और विवादों का साया | दुनिया | DW | 23.07.2021

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दुनिया

ओलंपिक खेलों से नहीं हटता कोविड, स्कैंडल और विवादों का साया

जापान के टोक्यो में ओलंपिक खेल शुरू हो गए हैं लेकिन विवाम खत्म नहीं हो रहे हैं. कोविड और गर्मी तो थी ही, लोगों की हरकतों ने भी आग में घी डाला है.

जापान की सरकार, ओलंपिक कमेटी और स्थानीय आयोजक इन दिनों इसी उम्मीद में हैं कि अगले दो सप्ताह बस किसी तरह गुज़र जाएं, प्रचार अभियान में कोई और बड़ी गड़बड़ न होने पाए और एथलीटों में कोविड के नये मामले न आएं.

बृहस्पतिवार को टोक्यो के नये नेशनल स्टेडियम में उद्घाटन समारोह से कुछ ही घंटों पहले ओलंपिक खेल समिति एक नये स्कैंडल में उलझ गयी. इवेंट का एक सीनियर आयोजक होलोकॉस्ट को लेकर मजाक उड़ा चुका था. जिसका उसने फौरन खंडन तो कर दिया लेकिन ओलंपिक के ऐन मौके पर इतना शायद काफी नहीं था.

आयोजन की साख पर बट्टा

शुक्रवार की शाम के उद्घाटन समारोह के क्रिएटिव डायरेक्टरों में से एक, कॉम़ेडियन केन्टारो कोबायाशी को हटा दिया गया. बताया जाता है कि 1998 की अपनी एक हास्य प्रस्तुति में कोबायाशी ने यहूदियों का मजाक उड़ाते हुए एक शब्दावली इस्तेमाल की थी- "चलो होलोकॉस्ट होलोकोस्ट खेलें.”

अपने ताजा माफीनामे में कोबायाशी ने कहा, "मैं जानता हूं कि उस समय गलत शब्दों का बेवकूफी भरा चयन मेरी गलती थी और मुझे उसका अफसोस है. मेरी वजह से जिन्हें असुविधा हुई, मैं उनसे माफ़ी मांगता हूं.”

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आयोजकों ने तत्काल ही मामले को रफादफा करने की कोशिश की लेकिन ये तो  टोक्यो के ओलंपिक आयोजन की एक के बाद एक आती तमाम मुश्किलों में से सिर्फ सबसे नयी है.

कोरोना वायरस महामारी का अंदाजा लगा पाना बेशक असंभव था और उसका बचाव कोई करेगा भी क्यों लेकिन दूसरी और भी समस्याओं ने जापान के इतिहास में दुनिया के सबसे बड़े खेल आयोजन की साख पर बट्टा तो लगा ही दिया है. माना जा रहा है कि कुछ लोगों के कमजोर और गलत फैसलों की वजह से ऐसा हुआ है.

‘शापित हैं' टोक्यो ओलंपिक खेल

कुल मिलाकर खेल आयोजन में इधर आए दिन जो बखेड़ा हो जाता है, उससे पूर्व प्रधानमंत्री तारो आसो की पिछले साल कही एक बात सही लगने लगती है कि 2020 के ओलंपिक खेलों पर ‘शाप' लगा है.

टेंपल यूनिवर्सिटी के टोक्यो कैंपस में इन्स्टीट्यूट ऑफ कन्टम्पररी एशियन स्टडीज में सह निदेशक रॉबर्ट दुजारिख कहते हैं, "मुझे ये बात बड़ी अविश्वसनीय सी लगती है कि आयोजकों को भव्य उद्घाटन समारोह से बस एक दिन पहले ही ये पता चल पाया कि इस शख्स ने होलोकॉस्ट के बारे में क्या कहा था.” उन्होंने डीडब्लू को बताया कि "यूट्यूब सर्च में पता चल जाता, तो भी उनकी ठीक से जांच क्यों नहीं की गयी? जनसंपर्क के लिहाज से देखे तो ये कतई दुस्वप्न सरीखा है, लेकिन इसे और खराब बना दिया गया है क्योंकि ओलंपिक खेल आयोजन से जुड़े लोगों के साथ और भी ऐसी कई समस्याएं हैं.”

ओलंपिक और उसके बाद होने वाले पैरालम्पिक्स के उद्घाटन समारोह में कोबायाशी संगीत के क्रिएटिव डायरेक्टर बनाए गए थे. लेकिन सोमवार को उन्हें इस्तीफा देना पड़ा. अपने माफीनामे के बावजूद वो तीखी सार्वजनिक आलोचना से नहीं बच पाए. कोबायाशी पर अपनी किशोरावस्था में मानसिक रूप से विकलांग बच्चों को तंग करने के आरोप भी हैं.  

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ओपनिंग सेरेमनी में जब दूसरा कॉमेडियन बुलाया गया तो उसे भी बाहर का रास्ता देखना पड़ा. वो ये कह गुजरा था कि प्लस साइज वाली मॉडल को किसी कार्यक्रम में सुअर जैसी पोशाक पहनानी चाहिए जिसे दुनिया भर में अरबों लोग देख रहे होंगे. स्थानीय आयोजन समिति के प्रमुख रह चुके पूर्व जापानी प्रधानमंत्री योशिरो मोरी को भी इस्तीफा देना पड़ा था. उनका कहना ये था कि जिन कमेटी बैठकों में महिलाएं होती हैं वे हमेशा बहुत लंबी चलती हैं.

दो एथलीट कोरोना पॉजिटिव

बृहस्पतिवार को ये बताया गया कि दो और एथलीट- नीदरलैंड्स की स्केटबॉर्डर कैंडी जैकब्स और चेक गणराज्य के टेबलटेनिस खिलाड़ी पावेल सिरुसेक और साथ में 10 सपोर्ट स्टाफ कोरोना से पीड़ित हैं. इस तरह अभी तक ओलंपिक खेलों से जुड़े 87 लोग कोरोना से पीड़ित पाए गए हैं. इनमें से कम से कम तीन मामले ओलंपिक विलेज के ही हैं.

वायरस जापानी लोगों में भी फैल रहा है. टोक्यों में वायरस के घातक डेल्टा वेरिएंट के नये मामले आ रहे हैं. बुधवार को स्वास्थ्य अधिकारियों ने राजधानी में 1832 नये मामलों की गिनती की थी. मध्य जनवरी से एक दिन का ये सबसे बड़ा आंकड़ा था. सात दिन में 683 केस बढ़ चुके थे.

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जानकारों ने आगाह किया है कि कुछ ही समय में हालात और खराब होंगे. विशेषज्ञों के एक पैनल ने टोक्यो महानगर प्रशासन को भेजे अपने अनुमान में कहा है कि अगले सप्ताह के अंत तक "स्थिति तीसरी लहर की अपेक्षा और गंभीर हो जाएगी.” नये मामले हर रोज 2600 का आंकड़ा छू सकते हैं जिस समय खेल चल रहे होंगे और देश की चिकित्सा सुविधाओं पर बहुत भारी दबाव आ जाएगा.  

औसत से ज्यादा गर्मी

स्वास्थ्य का गहराता संकट और प्रचार अभियानों की शर्मनाक नाकामी तो थी ही, ऊपर से तापमान और उमस में बढ़ोत्तरी की चिंताएं भी सर उठा रही हैं. जापान में साल के इन दिनों में आमतौर पर तापमान ऐसा नहीं होता था. एथलीटों, आयोजकों और वॉलन्टियरों के लिए ऐसा मौसम एक अलग मुसीबत बन सकता है. 

इस सप्ताह के शुरू में बीच वॉलीबॉल के लिए ट्रेनिंग सत्र को आगे बढ़ाना पड़ा क्योंकि रेत बहुत गरम थी, खिलाड़ियों के पांव जल रहे थे. तापमान मंगलावर को राजधानी टोक्यो में 34 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था. बृहस्पतिवार दोपहर टोक्यो का तापमान 33 डिग्री सेल्सियस था. उमस 60 प्रतिशत थी और उस स्थिति में तापमान 39 डिग्री के करीब पहुंच गया लगता था.

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दो साल पहले, मैराथन और पैदल दौड़ को टोक्यो से कोई 800 किलोमीटर दूर साप्पोरो शहर में आयोजित कराने का फैसला किया गया था. वहां मौसम थोड़ा ठंडा रहता था लेकिन  20 साल से भी ज्यादा समय में पहली बार शहर में इस सप्ताह भीषण गर्मी पड़ रही थी. होकाइडो की हेल्थ साइन्सेस यूनिवर्सिटी में इंफेक्शन कंट्रोल की प्रोफेसर योको सुकामोटो कहती हैं, "मैं कई साल साप्पोरो में रही हूं और मुझे याद नहीं पड़ता कि शुरुआती गर्मी में ही तापमान 35 के आसपास रहा हो.”

उन्होंने डीडब्लू को बताया, "शहर के अधिकारी हर रोज गर्मी की चेतावनी जारी कर रहे हैं और लोगों को खूब पानी पीते रहने की ताकीद भी कर रहे हैं, लेकिन मैराथन के धावकों के लिए इस गरमी में दौड़ना आसान नहीं.” वो कहती हैं, "मुझे नहीं लगता कि इस बार के ओलंपिक खेलों में बहुत सारे नये रिकॉर्ड बन पाएंगे.”

रिपोर्टः जुलियन रयाल (टोक्यो)

 

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