मोदी-पुतिन की मुलाकात: 2030 तक आर्थिक सहयोग का समझौता
प्रकाशित ५ दिसम्बर २०२५आखिरी अपडेट ५ दिसम्बर २०२५
आपके लिए अहम जानकारी
- अगर अमेरिका रूस से परमाणु ईंधन खरीद सकता है, तो भारत क्यों नहीं: पुतिन
-अपने ही धड़े में विरोध के बावजूद 'पेंशन विधेयक' पास करवाने में कामयाब रही जर्मन सरकार
-कैथोलिक ईसाई महिलाओं को नहीं मिला शादियां और बपतिस्मा करवाने का अधिकार
-'हैरी पॉटर' और 'गेम ऑफ थ्रोन्स' बनाने वाली कंपनी को 83 अरब डॉलर में खरीदेगा नेटफ्लिक्स
- आरबीआई ने रेपो रेट में की 25 बेसिस पॉइंट की कटौती, सस्ते हो सकते हैं कर्ज
- रिकॉर्ड स्तर पर कैंसिल हो रहीं इंडिगो की उड़नें
-पुतिन के आलोचक से कथित संबंध रखने वाले पत्रकारों की जेल की सजा बरकरार
- मोदी और पुतिन की वार्ता में ट्रेड, रक्षा और यूक्रेन पर चर्चा हुई
अपने ही धड़े में विरोध के बावजूद 'पेंशन विधेयक' पास करवाने में कामयाब रही जर्मन सरकार
चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स के नेतृत्व वाली जर्मन सरकार ने शुक्रवार (5 दिसंबर) को देश की संसद ‘बुंडेसटाग’ में अपने पेंशन विधेयक के लिए पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया. इस विधेयक के पास होने पर लगातार संशय बरकरार था क्योंकि चांसलर की कंजरवेटिव पार्टी सीडीयू के युवा सांसद इस मुद्दे पर वरिष्ठ नेतृत्व से एकमत नहीं थे.
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इस विधेयक के तहत, पेंशन के वर्तमान स्तरों को 2031 तक तय कर दिया गया है. 630 सदस्यों वाले बुंडेसटाग में यह विधेयक 318 वोटों से पारित हो गया. अगर यह विधेयक पूर्ण बहुमत हासिल ना कर पाता तो मैर्त्स के नेतृत्व के लिए एक बड़ा झटका होता.
सेंटर-लेफ्ट ‘सोशल डेमोक्रैटिक पार्टी’ के साथ गठबंधन में सरकार चला रहे मैर्त्स के पास संसद में बहुत सीमित बहुमत है. चांसलर, जर्मन अर्थव्यवस्था को दोबारा उठाने और लंबे समय से फंड की कमी से जूझती जर्मन सेना को दोबारा सशक्त करने वाले एजेंडे पर आगे बढ़ रहे हैं.
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ऐसे में अपनी ही पार्टी पर ढीली पकड़ उनके लिए राजनीतिक तौर पर अंदरूनी चुनौती बन सकती थी. हालांकि, 64 सदस्यों वाली वामपंथी पार्टी ‘डी लिंके’ के मतदान से किनारा करने के बाद मैर्त्स की मुश्किलें थोड़ी घट गई थीं.
कैथोलिक ईसाई महिलाओं को नहीं मिला शादियां और बपतिस्मा करवाने का अधिकार
वेटिकन के एक अध्ययन आयोग ने कहा है कि महिलाओं को डीकन के रूप में नियुक्त नहीं किया जाएगा. यह उन कैथोलिक महिलाओं के लिए एक और झटका है जो शादियों, बपतिस्मा और मृत्यु-उपरांत होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों की अध्यक्षता करने की उम्मीद में थीं. गुरुवार (4 दिसंबर) को कैथोलिक ईसाई चर्च के केंद्र वेटिकन ने असामान्य कदम उठाते हुए आयोग के निष्कर्षों का सार प्रकाशित किया, जिसमें सदस्यों के विशिष्ट धर्मशास्त्रीय प्रश्नों पर मत भी शामिल हैं.
इस रिपोर्ट में, भविष्य में फिर से अध्ययन की संभावना खुली है लेकिन मौजूदा ढांचे से बाहर महिलाओं के लिए नई व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया गया है. यानी फिलहाल के लिए यह मुद्दा ठंडे बस्ते में चला गया है. डीकन उन अभिषेकित मिनिस्टरों को कहा जाता है जो कैथोलिक ईसाई धर्म में पादरियों के समान शादी, बपतिस्मा और अंतिम संस्कार जैसे धार्मिक कार्यों की अध्यक्षता करते हैं. वे उपदेश दे सकते हैं लेकिन सामूहिक प्रार्थना का आयोजन नहीं कर सकते.
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पुरुष सेमिनारियों के लिए डीकन बनना, पादरी बनने के क्रम में एक पद है. विवाहित पुरुषों का भी स्थायी डीकन के तौर पर अभिषेक किया जा सकता है. लेकिन महिलाओं के लिए यह व्यवस्था नहीं है. हालांकि इतिहासकार मानते हैं कि प्रारंभिक ईसाई चर्च में महिलाएं डीकन के रूप में सेवा दिया करती थीं. पोप फ्रांसिस ने 2016 में इस मुद्दे पर पहले अध्ययन आयोग के गठन का आदेश दिया था. उस आयोग के सहमति न बना पाने के बाद, पोप फ्रांसिस ने 2020 में दूसरे अध्ययन आयोग का गठन किया, जिसने गुरुवार को अपनी रिपोर्ट जारी की.
'हैरी पॉटर' और 'गेम ऑफ थ्रोन्स' बनाने वाली कंपनी को 83 अरब डॉलर में खरीदेगा नेटफ्लिक्स
स्ट्रीमिंग दिग्गज नेटफ्लिक्स, फिल्म और टेलीविजन स्टूडियो कंपनी वॉर्नर ब्रदर्स डिस्कवरी का लगभग 83 अरब डॉलर चुकाकर अधिग्रहण करेगी. दोनों अमेरिकी कंपनियों ने शुक्रवार (5 दिसंबर) को यह घोषणा की. इस तरह यह अधिग्रहण, 2019 में डिज्नी के फॉक्स कॉर्प को 71 अरब डॉलर में खरीदने के बाद इंटरटेनमेंट इंडस्ट्री का सबसे बड़ा सौदा है.
इस लेन-देन में वॉर्नर ब्रदर्स की कुल इक्विटी कीमत लगभग 72 अरब डॉलर आंकी गई और कर्ज समेत व्यवसाय की कुल कीमत 82.7 अरब डॉलर लगाई गई. चर्चित स्ट्रीमिंग सर्विस एचबीओ मैक्स की मालिक वॉर्नर ब्रदर्स कंपनी ने कई क्लासिक्स समेत हाल के दशकों में "गेम ऑफ थ्रोन्स" जैसी सीरीज और "हैरी पॉटर" जैसी फिल्में बनाई हैं.
वॉर्नर ब्रदर्स डिस्कवरी के अध्यक्ष और सीईओ डेविड जैस्लेव ने बयान में कहा, "आज की यह घोषणा कहानियां सुनाने वालीं दुनिया की सबसे महान कंपनियों में से दो को जोड़ रही है." उन्होंने बताया कि दोनों कंपनियों के बोर्डों द्वारा मंजूर यह लेन-देन 12 से 18 महीनों के अंदर पूरा हो जाएगा.
चक्रवात "दित्वाह" के बाद घरों को लौटने से डर रहे हैं लोग
श्रीलंका के मध्य क्षेत्र के किथुलबड्डे गांव के निवासी पिछले हफ्ते आए भीषण चक्रवात "दित्वाह" के बाद अब भी राहत केंद्रों में रह रहे हैं. तूफान से तबाह हुईं सड़कों और घरों की हालत देखकर लोग अपनी रिहाइश की ओर लौटने से डर रहे हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस आपदा में अब तक 479 लोगों की मौत हो चुकी है और 350 लोग लापता हैं. करीब 12 लाख लोग प्रभावित हुए हैं. इस तरह यह पिछले दस वर्षों की सबसे बड़ी बाढ़ और तूफानी तबाही है.
श्रीलंका में सामूहिक कब्रों की खुदाई से क्या चाहते हैं तमिल
चक्रवात के कारण भारी बारिश से जमीन में गहरी दरारें पड़ गई हैं और कई घरों की दीवारें टूट गई हैं. सरकार के अनुसार, देशभर में 1,289 घर पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, जबकि 44,500 घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हैं. सरकार ने कहा है कि वह उच्च जोखिम वाले इलाकों में रहने वालों के लिए "लंबे समय के लिए समाधान" पर काम कर रही है.
इस बीच अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने गुरुवार (4 दिसंबर) को कहा कि वह श्रीलंका की आर्थिक जरूरतों का आकलन कर रहा है. आईएमएफ की प्रवक्ता यूली कोजाक ने बताया कि संस्था 15 दिसंबर को मौजूदा ऋण कार्यक्रम की समीक्षा पर बोर्ड बैठक करेगी और देश की पुनर्वास प्रक्रिया में अतिरिक्त मदद के विकल्प तलाश रही है.
ट्रंप प्रशासन ने सख्त की इमिग्रेशन नीति
अमेरिका के डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन ने गुरुवार (4 दिसंबर) को घोषणा की कि शरणार्थियों, आश्रय चाहने वालों और अन्य प्रवासियों के लिए काम करने की अनुमति अवधि को पांच साल से घटाकर 18 महीने कर दिया जाएगा. यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (यूएससीआईएस) का कहना है कि इस बदलाव से विदेशी नागरिकों की अधिक बार जांच संभव होगी.
अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, यह कदम कई लाख लोगों को प्रभावित करेगा और उन कंपनियों पर भी असर डालेगा जो वर्क परमिट के साथ आश्रय चाहने वालों पर निर्भर हैं, जैसे मीटपैकिंग उद्योग. ट्रंप प्रशासन ने इमिग्रेशन को अपनी नीतियों का केंद्र बनाया है और इस साल के अंत तक 6 लाख लोगों को निर्वासित करने का लक्ष्य रखा है. अब तक लगभग 20 लाख लोग अमेरिका छोड़ चुके हैं, जिनमें 5.3 लाख निर्वासन और 16 लाख स्वेच्छा से लौटने वाले शामिल हैं.
अमेरिका से भारत भेजे गए प्रवासियों ने कही आपबीती
कई डेमोक्रेट शासित शहरों में संघीय इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (आईसीई) एजेंट कथित आपराधिक प्रवासियों को निशाना बना रहे हैं. वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, राजधानी वॉशिंगटन में गिरफ्तार किए गए 80 फीसदी लोगों के खिलाफ पहले कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था. 11 अगस्त को ट्रंप ने वॉशिंगटन में सार्वजनिक सुरक्षा आपातकाल घोषित किया था, जिसके बाद आईसीई टीमों ने लगभग 1,100 लोगों को हिरासत में लिया है.
ताइवान और जापान ने चीन की सैन्य गतिविधियों पर जताई चिंता
ताइवान और जापान ने शुक्रवार (5 दिसंबर) को पूर्वी एशिया में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों पर गहरी चिंता जाहिर की. समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने इस सप्ताह पूर्वी एशियाई जलक्षेत्र में 100 से अधिक नौसैनिक और तटरक्षक जहाजों की तैनाती की है, जो अब तक का सबसे बड़ा समुद्री शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है.
सैन्य अभ्यास में चीन ने ताइवान को फिर घेरा
ताइवानी राष्ट्रपति के प्रवक्ता करेन कुओ ने कहा कि यह गतिविधि केवल ताइवान जलडमरूमध्य तक सीमित नहीं है, बल्कि येलो-सी से लेकर पूर्वी चीन सागर के विवादित सेनकाकू द्वीपों, दक्षिण चीन सागर और पश्चिमी प्रशांत तक फैली हुई है. उन्होंने चेतावनी दी कि यह कदम इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की शांति और स्थिरता के लिए खतरा है. लाई चिंग-ते ने सुरक्षा बलों को सतर्क रहने और मित्र देशों के साथ सहयोग बढ़ाने के निर्देश दिए हैं.
वहीं जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी ने कहा कि सरकार चीन की गतिविधियों पर "गहरी नजर" रख रही है और सूचना जुटाने के प्रयास तेज कर रही है. यह तैनाती ऐसे समय में हुई है जब चीन और जापान के बीच तनाव बढ़ा है. हाल ही में जापान की प्रधानमंत्री ने कहा था कि ताइवान पर चीनी हमले की स्थिति में टोक्यो सैन्य प्रतिक्रिया दे सकता है.
मलेरिया से 2024 में 6.10 लाख मौतें, बढ़ते खतरे पर डब्ल्यूएचओ ने चेताया
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने गुरुवार (4 दिसंबर) को बताया कि 2024 में से लगभग 6.10 लाख लोगों की मौत हुई, जिनमें अधिकांश छोटे बच्चे थे. ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मलेरिया के मामलों में भी वृद्धि हुई है. साल 2023 में मलेरिया के मामले 27.3 करोड़ से बढ़कर 2024 में अनुमानित 28.2 करोड़ दर्ज किए गए.
डब्ल्यूएचओ ने कहा कि 2000 के शुरुआती दशक में हुई बड़ी प्रगति के बाद पिछले दस वर्षों में मलेरिया नियंत्रण की गति धीमी पड़ गई है. दवा और कीटनाशक प्रतिरोध, जलवायु परिवर्तन, संघर्ष और जनसंख्या वृद्धि जैसे कारक बीमारी के खिलाफ प्रयासों को चुनौती दे रहे हैं. 2015 से 2024 के बीच प्रति एक लाख जोखिमग्रस्त लोगों पर मामलों की दर 59 से बढ़कर 64 हो गई है.
मलेरिया के खिलाफ लड़ाई को बड़ा झटका
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि मलेरिया नियंत्रण के लिए 2024 में कुल निवेश 3.9 अरब डॉलर रहा, जो 9 अरब डॉलर के लक्ष्य से काफी कम है. अंतरराष्ट्रीय सहायता में कटौती से स्थिति और बिगड़ सकती है. हालांकि डब्ल्यूएचओ ने कहा कि नए उपकरण, बेहतर उपचार, डायग्नोस्टिक्स और मलेरिया वैक्सीन उम्मीद जगाते हैं, लेकिन इनका प्रभाव तभी होगा जब वे जोखिमग्रस्त लोगों तक पहुंचें.
कथित ड्रग तस्कर नाव पर अमेरिका ने हमला किया, 4 लोगों की मौत
अमेरिकी सेना ने गुरुवार (4 दिसंबर) को पूर्वी प्रशांत महासागर के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में कथित तौर पर ड्रग तस्करी करने वाली संदिग्ध नाव पर हमला कर चार लोगों को मार गिराने की बात कही है. अमेरिकी सेना के इस अभियान में अब तक कम से कम 87 लोगों की मौत हो चुकी है. यूएस सदर्न कमांड ने बयान में कहा, "खुफिया जानकारी ने जहाज में अवैध ड्रग्स लदे होने और पूर्वी प्रशांत क्षेत्र में एक ज्ञात नार्को-तस्करी मार्ग से गुजरने की पुष्टि की थी."
सेना ने कहा कि यह हमला "युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ के निर्देश पर किया गया", जो अमेरिकी रक्षा मंत्री के लिए नया पदनाम है.
यह ताजा हमला तब हुआ है जब हेगसेथ और ट्रंप प्रशासन सितंबर महीने की शुरुआत में हुए एक हमले को लेकर विवादों में घिरे हुए हैं. उस हमले में शुरुआती धमाके के बाद जिंदा बच गए लोगों को दोबारा किए हमले में मार दिया गया. कानूनी विशेषज्ञों मानते हैं कि ऐसे "डबल टैप स्ट्राइक" सैन्य युद्ध के कानूनों का उल्लंघन हो सकते हैं.
ट्रंप प्रशासन ने इस व्यापक अभियान को ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई बताकर बचाव किया है. वे दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला को अमेरिका पहुंच रहे नशे का स्रोत बताते हैं. वहीं वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने अमेरिकी सैन्य अभियान को दक्षिण अमेरिकी देश में सत्ता परिवर्तन की कोशिशों का हिस्सा करार दिया है.
रूसी पनडुब्बियों पर कार्रवाई के लिए ब्रिटेन और नॉर्वे साथ आए, युद्धपोत तैनात होंगे
ब्रिटेन और नॉर्वे ने गुरुवार, 4 दिसंबर को एक नए रक्षा समझौते की घोषणा की. इसके तहत दोनों देशों की नौसेनाएं उत्तरी अटलांटिक महासागर में "रूसी पनडुब्बियों का पता लगाने" के लिए साझा तौर पर एक युद्धपोत बेड़ा संचालित करेंगी. दोनों देश नाटो के सदस्य हैं और यह समझौता समुद्री क्षेत्र में मौजूद संवेदनशील बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के मकसद से किया गया है. पश्चिमी देश मानते हैं कि जलक्षेत्र में मौजूद समुद्री केबलों, गैस और तेल पाइपलाइनों को मॉस्को से खतरा है.
इस समझौते के लिए नॉर्वे के प्रधानमंत्री योनास गार स्टोर अपने ब्रिटिश समकक्ष प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर के दफ्तर में मौजूद थे. स्टोर ने इसे "रक्षा सहयोग और एकीकरण पर एक बहुत महत्वपूर्ण समझौता" बताया. नए समझौते के तहत दोनों देश कम से कम 13 ब्रिटिश निर्मित युद्धपोतों को आपस में बारी-बारी बदलकर संचालित करने के लिए रजामंद हुए हैं.
ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय के बयान में कहा गया कि यह बेड़ा "उत्तर अटलांटिक में रूसी पनडुब्बियों का पता लगाएगा और संवेदनशील बुनियादी ढांचे की रक्षा करेगा." बयान के मुताबिक, यह ग्रीनलैंड, आइसलैंड और ब्रिटेन के बीच के जलक्षेत्रों में रूस की नौसैनिक गतिविधियों पर नजर रखेगा.
प्रधानमंत्री स्टार्मर ने कहा, "गहरी वैश्विक अस्थिरता के समय में, जब हमारे जलक्षेत्रों में अधिक रूसी जहाज पाए जा रहे हैं, हमें राष्ट्रीय सुरक्षा की हिफाजत के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर काम करना होगा."
भारत को 'बिना रुकावट' ईंधन सप्लाई जारी रहेगी: पुतिन
भारत-रूस शिखर सम्मेलन के बाद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि दोनों देशों ने सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, व्यापार और सांस्कृतिक क्षेत्रों में सहयोग को प्राथमिकता देने का संकल्प लिया है. उन्होंने वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य भी रखा.
पुतिन ने बताया कि भारत और रूस धीरे-धीरे द्विपक्षीय भुगतान निपटाने के लिए राष्ट्रीय मुद्राओं के इस्तेमाल की ओर बढ़ रहे हैं. बातचीत में ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को विस्तार देने पर भी जोर दिया गया. पुतिन ने भरोसा दिया कि रूस, भारत को ईंधन की निर्बाध आपूर्ति के लिए तैयार है.
पुतिन ने कहा कि रूस, भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए तेल, गैस और कोयले की "निरंतर आपूर्ति" करने को तैयार है. उन्होंने भारत-रूस साझेदारी को ऊर्जा सुरक्षा का मजबूत स्तंभ बताया.
दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने अगस्त में भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया था. ट्रंप का कहना है कि नई दिल्ली द्वारा रूसी तेल की खरीद यूक्रेन युद्ध को वित्तीय मदद देती है.
भारत-रूस ने 2030 तक आर्थिक सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए
नई दिल्ली में 23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रेस को साझा बयान दिया. मोदी ने कहा कि भारत-रूस की दोस्ती पिछले आठ दशकों से ध्रुवतारे की तरह दृढ़ रही है. उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों देशों के संबंध आपसी सम्मान और गहरे विश्वास पर आधारित हैं और समय की हर कसौटी पर खरे उतरे हैं.
मोदी ने आगे बताया कि भारत-रूस आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाना दोनों देशों की साझा प्राथमिकता है. इसी दिशा में दोनों नेताओं ने 2030 तक के लिए भारत-रूस आर्थिक सहयोग कार्यक्रम पर सहमति जताई. बैठक में रक्षा, ऊर्जा और व्यापार समेत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर भी चर्चा हुई.
मोदी ने कहा, "मेरे मित्र राष्ट्रपति पुतिन और दोनों देशों के प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए मुझे खुशी हो रही है. 25 साल पहले राष्ट्रपति पुतिन ने हमारी रणनीतिक साझेदारी की नींव रखी थी. आज हमने आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए विजन 2030 दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए हैं. मुझे विश्वास है कि यह मंच हमारे व्यापारिक संबंधों को मजबूत करेगा और सह-उत्पादन व सह-नवाचार के नए रास्ते खोलेगा."
मोदी ने बताया कि दोनों देशों ने ई-टूरिस्ट वीजा और ग्रुप टूरिस्ट वीजा को लेकर दो महत्वपूर्ण समझौते भी किए हैं. उन्होंने कहा अब रूसी नागरिकों को भारत आने के लिए 30 दिन का मुफ्त ई-टूरिस्ट वीजा और ग्रुप टूरिस्ट वीजा मिलेगा. मोदी ने कहा कि यह कदम दोनों देशों के बीच मानव संसाधन की आवाजाही को बढ़ावा देगा.
प्रधानमंत्री मोदी ने यूक्रेन में चल रहे युद्ध का जिक्र करते हुए पुतिन से कहा कि भारत शांति के साथ है और दुनिया को शांति की ओर लौटना चाहिए. उन्होंने कहा, "यह संघर्ष बातचीत और डिप्लोमेसी के जरिए खत्म होना चाहिए." मोदी ने कहा, "हम संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करते हैं."
पुतिन के आलोचक से कथित संबंध रखने वाले पत्रकारों की जेल की सजा बरकरार
रूस की राजधानी मॉस्को की एक अदालत ने गुरुवार (4 दिसंबर) को चार रूसी पत्रकारों के लिए घोषित- साढ़े पांच साल जेल की सजाएं बरकरार रखी हैं. सजा पाने वालों में डॉयचे वेले के दो पूर्व संवाददाता भी शामिल हैं जो पहले कंपनी के मॉस्को ब्यूरो के लिए काम कर चुके हैं.
पत्रकार अंतोनिना फवोर्स्काया, आर्त्योम क्रीगर, कॉन्स्टेंटिन गाबोव और सर्गेई कारेलिन को इस साल अप्रैल में "चरमपंथी संगठन" का हिस्सा होने का दोषी ठहराया गया था. यह गैर-सरकारी संगठन ‘एंटी-करप्शन फाउंडेशन (एफबीके)’ है, जिसकी स्थापना रूस के दिवंगत विपक्षी नेता ऐलेक्सी नावाल्नी ने की थी.
नावाल्नी, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रमुख आलोचक थे. 2024 की शुरुआत में सुदूर आर्कटिक सर्कल की एक रूसी जेल में नावाल्नी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. इससे पहले 2021 में रूसी प्रशासन ने फाउंडेशन को ‘चरमपंथी’ बताकर प्रतिबंधित कर दिया था. अभियोजकों ने इन पत्रकारों पर फाउंडेशन के यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट तैयार करने का आरोप लगाया. हालांकि, चारों पत्रकार इन आरोपों से इनकार करते हैं और तर्क देते हैं कि वे फाउंडेशन के लिए काम नहीं कर रहे थे, बल्कि स्वतंत्र रूप से इस पर रिपोर्टिंग कर रहे थे.
पढ़ें: यूलिया नवालन्या को 2024 का डीडब्ल्यू फ्रीडम ऑफ स्पीच अवॉर्ड
एनजीओ के ‘चरमपंथी’ वर्गीकरण का इस्तेमाल नावाल्नी के आंदोलन से जुड़े पत्रकारों, एक्टिविस्टों और विपक्षी नेताओं के खिलाफ मुकदमे चलाने के लिए किया जा रहा है. गुरुवार के फैसले के बाद चारों पत्रकारों को अब प्री-ट्रायल हिरासत से पीनल कॉलोनियों (सुदूर क्षेत्रों की कठोर जेलें) में सजाएं भुगतने के लिए ट्रांसफर कर दिया जाएगा.
मोदी और पुतिन की वार्ता में ट्रेड, रक्षा और यूक्रेन पर चर्चा हुई
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (5 दिसंबर) को नई दिल्ली में शिखर वार्ता की शुरुआत की. मोदी ने पुतिन से कहा कि भारत यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने के हर प्रयास का समर्थन करता है. पुतिन ने भी भारत की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच भरोसेमंद संबंध हैं और वे शांतिपूर्ण समाधान के लिए अन्य साझेदारों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं.
मैर्त्स ने दी चेतावनी, 'यूक्रेन की संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं'
पुतिन का यह चार साल में भारत का पहला दौरा है, जिसका उद्देश्य पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच व्यापार को बढ़ावा देना है. रूस लंबे समय से भारत का सबसे बड़ा हथियार सप्लायर रहा है और अब वह भारतीय वस्तुओं का आयात बढ़ाकर व्यापार को संतुलित करना चाहता है.
पुतिन ने कहा कि जैसे-जैसे दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं बढ़ रही हैं, सहयोग के नए अवसर खुल रहे हैं. उन्होंने उच्च तकनीक, विमानन, अंतरिक्ष और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने की बात कही.
इससे पहले पुतिन को राष्ट्रपति भवन में 21 तोपों की सलामी के साथ औपचारिक स्वागत दिया गया. गुरुवार को मोदी ने हवाई अड्डे पर पुतिन के पहुंचने पर उनका स्वागत किया और प्राइवेट डिनर की मेजबानी की. दोनों नेताओं के बीच वार्ता के बाद कई समझौतों की घोषणा होने की उम्मीद है.
यूक्रेनी सेना पीछे नहीं हटी तो सैन्य बल से डोनबास पर पूरा नियंत्रण करेगा रूस: पुतिन
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार (4 दिसंबर) को प्रकाशित एक इंटरव्यू में कहा है कि अगर यूक्रेनी सेना पीछे नहीं हटती, तो रूस सैन्य बल के दम पर यूक्रेन के डोनबास क्षेत्र पर पूरी तरह से नियंत्रण कर लेगा. डोनबास क्षेत्र में रूस-समर्थित अलगाववादियों और यूक्रेनी सेनाओं के बीच आठ साल तक चली लड़ाई के बाद पुतिन ने फरवरी 2022 में कई हजार सैनिक यूक्रेन में भेज दिए थे. डोनबास, दोनेत्स्क और लुहांस्क क्षेत्रों से मिलकर बना है.
रूस के सरकारी टीवी चैनल पर दिखाई गई एक क्लिप के अनुसार, पुतिन ने नई दिल्ली की दो-दिवसीय यात्रा से पहले इंडिया टुडे से कहा, "या तो यह हम इन क्षेत्रों को हथियारों की ताकत से आजाद करवाएंगे, या फिर यूक्रेनी सैनिक इन क्षेत्रों को छोड़ कर चले जाएं." राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के नेतृत्व वाला यूक्रेन ऐसी किसी संभावना का पुरजोर विरोध करता है.
फिलहाल, यूक्रेन के 19.2% हिस्से पर रूस का कब्जा है. इसमें 2014 में कब्जाया गया क्रीमिया भी शामिल है. उसके साथ ही पूरा लुहांस्क, दोनेत्सक का 80 फीसदी से ज्यादा इलाका और खेरसोन व जापोरिज्जिया के लगभग 75 फीसदी क्षेत्र पर रूस का नियंत्रण है. दोनेत्स्क का लगभग 5,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र अब भी यूक्रेन के नियंत्रण में है.
रूस ने 2022 में एक जनमत-संग्रह कराने की घोषणा की और फिर कहा कि लुहांस्क, दोनेत्स्क, खेरसोन और जापोरिज्जिया क्षेत्र अब रूस का हिस्सा हैं. लेकिन पश्चिमी देश और कीव इस कथित जनमत-संग्रह को खारिज करते हैं. अधिकांश देश इन क्षेत्रों और क्रीमिया को यूक्रेन का ही हिस्सा मानते हैं.
पुतिन बोले, अगर अमेरिका रूस से परमाणु ईंधन खरीद सकता है, तो भारत क्यों नहीं?
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में भारत पर अमेरिकी दबाव पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर अमेरिका रूस से परमाणु ईंधन खरीद सकता है, तो भारत को भी यह अधिकार होना चाहिए. उन्होंने कहा, "अगर अमेरिका को हमारा ईंधन खरीदने का अधिकार है, तो भारत को क्यों नहीं? इस पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए."
पुतिन ने कहा कि भारत के साथ तेल व्यापार सुचारू रूप से जारी है, भले ही पश्चिमी दबाव की चर्चाएं सामने आई हों. उन्होंने स्वीकार किया कि इस साल के पहले नौ महीनों में कुल व्यापारिक कारोबार में थोड़ी गिरावट आई है, लेकिन इसे उन्होंने "सिर्फ मामूली एडजस्टमेंट" बताया.
पुतिन ने स्पष्ट किया कि पेट्रोलियम उत्पादों और कच्चे तेल का व्यापार लगभग पहले जैसा ही स्तर बनाए हुए है. उनके अनुसार, "रूसी तेल का भारत में व्यापार सुचारू रूप से चल रहा है," जो यह संकेत देता है कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग पर पश्चिमी प्रतिबंधों का असर सीमित है.
हालांकि रूस-भारत व्यापार में फिलहाल गिरावट आई है. अप्रैल-अगस्त 2025 में द्विपक्षीय व्यापार घटकर 28.25 अरब डॉलर रह गया है, जबकि 2024-25 में यह करीब 69 अरब डॉलर था. गिरावट का कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 50 फीसदी टैरिफ और रूस पर कड़े प्रतिबंध हैं.
भारत और रूस ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है. भारत अपने निर्यात को बढ़ाने के लिए ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, टेक्सटाइल और खाद्य पदार्थों पर जोर दे रहा है, जबकि रूस भारतीय वस्तुओं का आयात बढ़ाकर व्यापार संतुलन चाहता है.