दुबई की ये 18 महिलाएं सबसे खास हैं | दुनिया | DW | 02.11.2016
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दुनिया

दुबई की ये 18 महिलाएं सबसे खास हैं

दुबई की 18 महिलाएं सबसे खास हैं. वे जब सड़कों पर घूम रही होती हैं तो लोग रुक रुक कर देखते हैं. ये विशेष महिला पुलिस यूनिट की सदस्य हैं.

अरबों के शहर दुबई में जब पुलिसवालियां दिखती हैं तो बाहर से आया हर कोई रुक कर देखता है. फर्राटा मोटरसाइकिलों पर चक्कर लगाती ये महिला पुलिसकर्मी एक ऐसे मुस्लिम देश में बहुत अनोखा नजारा होता है, जहां आप महिलाओं को बस बुर्के में देखने की उम्मीद कर रहे होते हैं.

दुबई पुलिस में इसी साल महिलाओं के लिए एक विशेष यूनिट बनाई गई है. एक स्पेशल गार्ड यूनिट जिसमें 18 सदस्य हैं. इन पुलिसकर्मियों का काम है महिला उद्यमियों, राज परिवार की महिला सदस्यों और बाहर से आने वाली महिला नेताओं की सुरक्षा करना. अब तक ऐसी यूनिट्स में सिर्फ पुरुष पुलिसकर्मियों को ही जगह दी जाती थी लेकिन पहली बार महिलाओं को जगह दी गई है. 20 साल से पुलिस फोर्स में काम कर रहीं ईमान सलेम कहती हैं कि इस काम से उन्हें मुश्किल हालात को संभालने का विश्वास मिला है. वह कहती हैं, "हर रोज मैं अपने काम से ज्यादा नजदीकी महसूस करती हूं और अपना फर्ज निभाने का मेरा जज्बा बढ़ता जाता है."

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सालेम मानती हैं कि फील्ड में काम करना आसान नहीं है. वह कहती हैं, "हमारे क्षेत्र में काम करना मुश्किल है. अपनी क्षमताओं को बढ़ाना होता है और खुद को फिट भी रखना पड़ता है. तभी आप अलग अलग तरह के हालात और आपातकालीन स्थितियों पर फौरी प्रतिक्रिया के लिए तैयार हो पाते हैं." दुबई की इस स्पेशल यूनिट को जिस तरह के हालात के लिए तैयार रहना पड़ता है उनमें बंधक संकट और अपहरण तक शामिल हैं. इन कामों के लिए सालेम और उनकी साथियों को विशेष हथियारों की ट्रेनिंग दी गई है. इसके अलावा उन्हें मार्शल आर्ट्स में भी प्रशिक्षित किया गया है. वे चलती तेज कारों से कूदना और ऊंची इमारतों से उतरना भी जानती हैं. पुलिस अकादमी में उनकी सख्त ट्रेनिंग हुई है.

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आयशा उबैद बताती हैं, "हमारी नियमित ट्रेनिंग और काम ने मुझे अपने डरों पर जीत पाने में मदद की है. मैंने सारी मुश्किलों का सामना करने के गुण हासिल कर लिए हैं." उबैद कहती हैं कि कुछ लोग तो अंदाजा भी नहीं लगा सकते कि हमारी ट्रेनिंग किस स्तर की होती है. उबैद ने 11 साल पहले पुलिस फोर्स में प्रवेश किया था. वह और उनकी बाकी साथी जानती हैं कि इस नौकरी का असर उनकी निजी जिंदगी पर पड़ता है. जाहरा इब्राहिम कहती हैं, "मुझे रोजाना 12 घंटे काम करना होता है. इस वजह से परिवार के कई अहम मौकों पर मैं मौजूद नहीं रह पाती. लेकिन मैं अपने परिवार वालों की आंखों में अपने लिए एक फख्र देखती हूं, एक सम्मान देखती हूं जो मुझे अपना काम करने के लिए उत्साहित करती है. इससे मुझे अपना काम सफलता से करने का हौसला मिलता है."

दुबई जैसी जगह पर महिलाओं के लिए इतनी हौसलाअफजाई बहुत बड़ी बात हो जाती है. जाहिर है, इससे पूरे समाज को ताकत मिलती है. औरतें खुश हैं.

वीके/एके (डीपीए)

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