डोपिंग से जुड़ा मैच फिक्सिंग | खेल | DW | 29.03.2013
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खेल

डोपिंग से जुड़ा मैच फिक्सिंग

अद्भुत नतीजे और रोमांचक मुकाबलों ने पूरी दुनिया में खेल को महामनोरंजन में बदल दिया है. बेशुमार पैसे और आलीशान रुतबा तो है लेकिन सारी चमक एक डोपिंग से खत्म भी हो जाती है.

अमेरिकी साइकिल रेसर लांस आर्मस्ट्रांग ने जनवरी में यह खुलासा करके सबको चौंका दिया कि उनका शानदार करियर पाबंदी वाली दवाइयों के बल पर बना था. सात बार टूअर डी फ्रांस जीतने वाले आर्मस्ट्रांग का कहना है कि हर बार उन्होंने डोपिंग की थी.

इसके बाद ऑस्ट्रेलिया की खुफिया विभाग की एक रिपोर्ट में कहा गया कि खेलों में डोपिंग और मैच फिक्सिंग और मनी लाउंड्रिंग जैसी चीजें एक दूसरे से जुड़ी हैं. एक साल की तहकीकात के बाद देश की छह अहम रग्बी टीमों के बारे में पता चला, जिन पर नजर रखी जा रही थी.

स्पेन के डॉक्टर यूफेमियानो फ्यूएंटस पर आरोप है कि उन्होंने साइकिल सवारों के लिए डोपिंग का इंतजाम किया. डॉक्टर का दावा है कि फुटबॉल, टेनिस, एथलेटिक्स और बॉक्सिंग में भी उनके ग्राहक हैं.

दुनिया की डोपिंग निरोधी एजेंसी वाडा का दावा है कि जो लोग डोपिंग में लगे हैं, वही लोग मैच फिक्सिंग भी कराते हैं. महासचिव डेविड होमन का कहना है, "मनी लाउंड्रिंग, रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार भी मैच फिक्सिंग और स्पॉट फिक्सिंग से जुड़े हैं."

Doping, Urinproben

अंडरवर्ल्ड का नियंत्रण

वाडा ने फरवरी में चौंकाने वाली बात कही थी कि दुनिया भर का 25 फीसदी खेल अंडरवर्ल्ड नियंत्रित करता है. होमन का कहना है, "काला बाजार कई दवाइयों के बाजार में आने से पहले ही उन्हें खिलाड़ियों तक पहुंचा देता है. यह अंडरवर्ल्ड का काम है."

वाडा में शिक्षा और कार्यक्रम विकास से जुड़े रॉब कोलर का कहना है कि खेल में डोपिंग की समस्या समाज की समस्या को दर्शाता है, "हम हमेशा सीमा को आगे बढ़ाना चाहते हैं. वयस्क चीटिंग कर रहे हैं, छात्र चीटिंग कर रहे हैं और उन्हें लगता है कि अगर वे पकड़े नहीं गए, तो बड़े सयाने हैं." उन्होंने समस्या की तरफ इशारा करते हुए कहा कि एक फीसदी आबादी बहुत धनी है, मध्य वर्ग सिकुड़ रहा है और निचला तबका तेजी से बढ़ रहा है. उनका कहना है कि इसी तरह खेल में "टॉप एथलीट करोड़ों कमा रहे हैं, कुछ एथलीट कामचलाऊ पैसे कमा रहे हैं लेकिन ज्यादातर को कुछ नहीं मिलता. कई एथलीट तो जीवन भर में जितना कमाते थे, अब एक ही साल में कमा लेते हैं."

आम तौर पर डोपिंग को एथलेटिक्स, भारोत्तोलन और साइक्लिंग से जोड़ा जाता है लेकिन वक्त के साथ इसका चलन बदल रहा है, मिसाल के तौर पर बेसबॉल. बेसबॉल ट्वेन्टी 20 क्रिकेट की तरह है, जहां ताकत और तकनीक की जरूरत पड़ती है.

बायोलॉजिकल पासपोर्ट

टेनिस में खिलाड़ियों को बहुत दम खम की जरूरत होती है और आज कल पुरुष वर्ग के बड़े मैचों का पांच सेट में जाना आम बात हो गई है. मुकाबला जीतने के लिए तकनीक के साथ ताकत भी चाहिए. 17 बार ग्रैंड स्लैम मुकाबले जीत चुके स्विट्जरलैंड के रोजर फेडरर का कहना है कि खिलाड़ियों का बायोलॉजिकल पासपोर्ट बनना चाहिए, जिसमें उनके खून के नमूनों में हुए अचानक बदलाव पर नजर रखी जा सके. उनका कहना है, "लेकिन इसके साथ खून के ज्यादा परीक्षण किए जाने चाहिए और खेल नहीं होने वाले दिनों में भी नियंत्रण के तरीके अपनाए जाने चाहिए."

वाडा इस मुश्किल से निजात पाने के लिए पूरी कोशिश कर रहा है. इसके अध्यक्ष जॉन फाहे के छह साल के कार्यकाल का आखिरी साल है और उनके लिए सबसे व्यस्त मौका. उनका कहना है, "जब तक खेल की प्रतियोगिताएं होंगी, खिलाड़ी बेईमानी करने की कोशिश करेंगे." इस वजह से डोपिंग के खिलाफ लंबी जंग की जरूरत है.

एजेए/एमजे (रॉयटर्स)

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