डॉनल्ड ट्रंप ने सभी देशों पर आयात टैरिफ बढ़ाकर 15 फीसदी किया
२२ फ़रवरी २०२६
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने 21 फरवरी को घोषणा की कि वह सभी देशों से अमेरिकी आयात पर अस्थायी टैरिफ दर को 10 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर रहे हैं. यह कदम शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के ठीक बाद उठाया गया है, जिसमें अदालत ने 'इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट' (आईईईपीए) के तहत लगाए गए उनके पिछले टैरिफ को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि उन्होंने अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया है और इसके लिए अमेरिकी संसद कांग्रेस की मंजूरी ली जानी चाहिए थी.
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से नाराज ट्रंप ने फैसला सुनाने वाले जजों को 'देश के लिए कलंक' करार दिया और एक अलग कानून के तहत सभी आयातों पर तुरंत 10 फीसदी टैरिफ लगाने का आदेश दिया था, जिसे अब उन्होंने और बढ़ा दिया है.
"अमेरिका को लूटने वालों पर कार्रवाई"
डॉनल्ड ट्रंप ने शनिवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर इस बढ़ोत्तरी की घोषणा करते हुए कहा, "संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में, मैं तत्काल प्रभाव से उन देशों पर 10% वर्ल्डवाइड टैरिफ बढ़ा रहा हूं, जिनमें से कई बिना किसी सजा के दशकों से अमेरिका को 'लूट' रहे थे (जब तक मैं नहीं आया!), मैं इसे पूरी तरह कानूनी तौर पर जांच-परखकर 15 प्रतिशत के स्तर तक ले जा रहा हूं."
यह नया कदम 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत उठाया गया है, जिसका पहले कभी इस्तेमाल नहीं हुआ है. यह राष्ट्रपति को 150 दिनों के लिए 15 फीसदी तक का शुल्क लगाने की अनुमति देता है, हालांकि इसे भी कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. ट्रंप ने कहा कि 150 दिन की इस अवधि के दौरान, उनका प्रशासन नए और कानूनी रूप से स्वीकार्य टैरिफ जारी करने पर काम करेगा.
हालांकि ट्रंप ने इसे तत्काल लागू करने का दावा किया, लेकिन आधिकारिक समय को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है. शुक्रवार को व्हाइट हाउस की एक फैक्ट शीट में कहा गया था कि शुरुआती 10 फीसदी टैरिफ मंगलवार, 24 फरवरी को रात 12:01 बजे (ईटी) से लागू होंगे.
वैश्विक और व्यापारिक प्रतिक्रियाएं
इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज कर दी है. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने कहा कि वह एक समन्वित यूरोपीय रुख के साथ वॉशिंगटन की यात्रा करेंगे. उन्होंने अनिश्चितता को 'जहर' बताते हुए चेतावनी दी, "मैं अमेरिकी सरकार को यह स्पष्ट करने की कोशिश करना चाहता हूं कि टैरिफ सभी को नुकसान पहुंचाते हैं. यूरोप और अमेरिका की अर्थव्यवस्थाओं के लिए सबसे बड़ा जहर टैरिफ को लेकर यह निरंतर अनिश्चितता है और इस अनिश्चितता को खत्म होना चाहिए."
फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों ने पेरिस में पत्रकारों से कहा, "सुप्रीम कोर्ट और कानून का शासन होना कोई बुरी बात नहीं है. लोकतंत्र में सत्ता और सत्ता पर संतुलन होना अच्छी बात है." उन्होंने कहा कि फ्रांस ट्रंप के नए ग्लोबल टैरिफ के परिणामों पर विचार करेगा और सबसे उचित नियम पारस्परिकता है, न कि एकतरफा फैसलों के अधीन होना."
ब्रिटेन जैसे देशों के लिए भी यह दर चिंता का विषय है, जिन्होंने पहले 10 फीसदी टैरिफ पर सहमति जताई थी. ब्रिटिश चैंबर्स ऑफ कॉमर्स में व्यापार नीति के प्रमुख विलियम बेन ने कहा, "यह व्यापार, अमेरिकी उपभोक्ताओं और व्यवसायों के लिए बुरा होगा और वैश्विक आर्थिक विकास को कमजोर करेगा. उच्च टैरिफ स्पष्टता और निश्चितता हासिल करने का तरीका नहीं हैं."
छूट और अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
इस नए टैरिफ से कुछ चीजों को बाहर रखा गया है जिनमें क्रिटिकल मिनरल्स, धातुएं, और फार्मास्यूटिकल्स, कनाडा और मैक्सिको से आने वाले यूएसएमसीए-अनुपालित सामान, स्टील, एल्यूमीनियम, लकड़ी और ऑटो पर ट्रंप द्वारा पहले लगाए गए अलग-अलग टैरिफ सुप्रीम कोर्ट के फैसले से प्रभावित नहीं हुए हैं और वे लागू रहेंगे.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, आईईईपीए का उपयोग करके अमेरिका ने पहले ही टैरिफ में कम से कम 130 अरब डॉलर इकट्ठा कर लिए हैं. हालांकि, अध्ययनों से पता चलता है कि इस राशि का 90 फीसदी हिस्सा अमेरिकी व्यवसायों और उपभोक्ताओं ने चुकाया है. अमेरिकी व्यापारिक संघ पहले ही रिफंड की मांग कर रहे हैं, लेकिन ट्रंप ने साफ कर दिया है कि लंबी कानूनी लड़ाई के बिना कोई रिफंड नहीं मिलेगा.
डॉनल्ड ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के 6-3 के फैसले को "हास्यास्पद, खराब तरीके से लिखा गया और असाधारण रूप से अमेरिका-विरोधी" बताया. उन्होंने असहमति जताने वाले तीन जजों- ब्रेट कवानो, क्लेरेंस थॉमस और सैमुअल अलिटो की प्रशंसा की, लेकिन अपने ही द्वारा नियुक्त की गईं एमी कोनी बैरेट और नील गोरसच सहित अन्य जजों पर तीखा हमला बोला.
ट्रंप ने उन्हें 'रिनोस' (नाम मात्र के रिपब्लिकन) और कट्टर-वामपंथी डेमोक्रेट्स का "मूर्ख और पालतू कुत्ता" कहा. उन्होंने बैरेट और गोरसच को उनके परिवारों के लिए शर्मिंदगी बताते हुए कहा कि उन्हें अगले सप्ताह होने वाले स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन में "मुश्किल से" आमंत्रित किया गया है.