हादसे का शिकार हुए एयर इंडिया विमान का ब्लैक बॉक्स मिला
प्रकाशित १३ जून २०२५आखिरी अपडेट १३ जून २०२५
हादसे का शिकार हुए एयर इंडिया विमान का ब्लैक बॉक्स मिला
भारत के विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) ने हादसे का शिकार हुए एयर इंडिया विमान का ब्लैक बॉक्स मिलने की पुष्टि कर दी है. यह उन इमारतों में से एक की छत पर मिला, जिनपर विमान गिरा था. ब्लैक बॉक्स को तकनीकी भाषा में डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर कहा जाता है, जिसमें फ्लाइट से जुड़ी जरूरी जानकारियां रिकॉर्ड होती हैं. दुर्घटना की वजह जानने के लिए इसका मिलना बेहद जरूरी होता है.
वहीं, भारत के नागरिक विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने शुक्रवार को एयर इंडिया के बोइंग 787-8 और 787-9 बेड़े की सुरक्षा जांचों में इजाफा करने का आदेश दिया है. एयर इंडिया को 15 जून से इन विमानों की फ्यूल पैरामीटर मॉनिटरिंग और संबंधित प्रणाली की जांच, केबिन एयर कंप्रेसर और संबंधित प्रणालियों का निरीक्षण करना होगा. इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक इंजन कंट्रोल सिस्टम टेस्ट, ऑयल सिस्टम चेक, हाइड्रोलिक सिस्टम टेस्ट और हाइड्रोलिक सिस्टम टेस्ट करने के लिए भी कहा गया है.
ईरान पर इस्राएली हमले को ट्रंप ने बताया 'एक्सीलेंट'
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि इस्राएल आने वाले दिनों में और हमले करने की तैयारी में है. शुक्रवार सुबह अपने ट्रूथ सोशल प्लेटफॉर्म पर ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ईरानी अधिकारियों से "बहुत ही कड़े शब्दों में" संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ अपने परमाणु कार्यक्रम पर एक समझौता करने के लिए कहा था, लेकिन कुछ ईरानी कट्टरपंथी सहमत नहीं हुए.
उन्होंने चेतावनी दी, "लोगों को बहुत नुकसान हुआ है और यह केवल बदतर होता जाएगा." ट्रंप ने कहा कि इस्राएल के पास अमेरिका के महत्वपूर्ण हथियार हैं, जिसे उन्होंने दुनिया में सबसे अच्छा और सबसे घातक सैन्य उपकरण बताया. उन्होंने तेहरान से एक समझौता करने की बात करते हुए कहा, "इससे पहले कि कुछ भी न बचे... कोई और मौत नहीं, कोई और विनाश नहीं, बस कर डालो, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए."
इससे पहले, अमेरिका ने कहा था कि उसे इस्राएली हमलों के बारे में पहले से सूचित किया गया था, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका इस हमले से कोई लेना-देना नहीं था. ट्रंप ने ईरान में इस्राएली हवाई हमलों के बारे में बात करते हुए उसे "एक्सीलेंट" बताया. ट्रंप ने एबीसी न्यूज से कहा, "हमने उन्हें एक मौका दिया और उन्होंने इसे नहीं लिया, उन्हें काफी नुकसान हुआ है, काफी ज्यादा…और भी बहुत कुछ होने वाला है, बहुत कुछ."
यह पूछे जाने पर कि क्या अमेरिका ने इस्राएली हवाई हमलों में हिस्सा लिया, ट्रंप ने कहा कि वह इस मामले पर टिप्पणी नहीं करना चाहते.
ईरान पर इस्राएली हमले ने बढ़ाया एयरलाइनों का संकट
13 जून को इस्राएल द्वारा ईरान पर हमला करने के बाद एयरलाइनों ने इस्राएल, ईरान, इराक और जॉर्डन के हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करना बंद कर दिया है. इसके चलते, एयरलाइनों को सैंकड़ों फ्लाइटों को रद्द करना पड़ा है या उनके उड़ान मार्गों को बदलना पड़ा है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने फ्लाइट रडार24 के डेटा के हवाले से यह जानकारी दी है.
यूरोकंट्रोल के मुताबिक, शुक्रवार को यूरोप आने-जाने वालीं करीब 1,800 फ्लाइट प्रभावित हुईं जिनमें से करीब 650 फ्लाइटों को रद्द करना पड़ा. दरअसल, युद्ध के चलते रूस और यूक्रेन का हवाई क्षेत्र पहले से ही बंद है. ऐसे में यूरोप और एशिया के बीच उड़ान भरने वालीं अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए मध्य-पूर्व क्षेत्र और अधिक जरूरी हो गया है.
भारतीय एयरलाइन एयर इंडिया की यूरोप और उत्तरी अमेरिका की ओर जाने वाली फ्लाइट ईरान के ऊपर से जाती हैं. ऐसे में एयर इंडिया ने भी कई फ्लाइटों का मार्ग बदला है या उन्हें वापस बुला लिया. जर्मनी की लुफ्थांसा एयरलाइन ने तेहरान जाने वाली फ्लाइट निलंबित कर दी हैं और कहा है कि वह फिलहाल ईरान, इराक और इस्राएल के हवाई क्षेत्र में जाने से बचेगी.
दुनियाभर में बढ़ते संघर्ष क्षेत्र एयरलाइनों के संचालन में मुश्किलें पैदा कर रहे हैं. इससे उनका मुनाफा कम हो रहा है और सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी बढ़ रही हैं. मार्ग बदलने से एयरलाइनों के ईंधन का खर्च बढ़ जाता है और यात्रा का समय लंबा हो जाता है.पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगने के बाद भारतीय एयरलाइन भी इससे प्रभावित हुई हैं.
जर्मनी में कुत्तों की अवैध ब्रीडिंग के लिए महिला पर लगा करोड़ों का जुर्माना
जर्मन राज्य बाडेन-वुर्टेनबर्ग के एक शहर में 23 वर्षीय महिला पर कुत्तों की अवैध ब्रीडिंग के लिए 138,000 (1.37 करोड़ रुपये) यूरो का जुर्माना लगाया गया है. अदालती कार्यवाही के दौरान यह पता चला कि महिला ने कई कुत्तों को छोटे, गंदे बॉक्सों में रखा था. बंद किए जाने की वजह से न सिर्फ महिला का घर गंदगी से भरा था बल्कि कई जानवर कमजोर और बीमार थे और कुछ को बाहर निकलने से भी डर लग रहा था.
दो साल पहले बाडेनवाइलर जिले में घर की तलाशी के दौरान महिला के घर से ऐसी हालत में 66 कुत्तों को बरामद किया गया था. पशु कल्याण संगठन पेटा के अनुसार, इन कुत्तों को सोशल नेटवर्किंग साइटों के जरिए बेचा जाता था. महिला ने कुत्ते मुख्य रूप से स्विट्जरलैंड, फ्रांस और दूसरे यूरोपीय देशों में बेचे थे. पुलिस को इस घटना की जानकारी आसपास के आम लोगों से हुई थी.
मामला सामने आने के बाद से पिछले दो साल से 23 वर्षीय महिला और इसमें सह-अभियुक्त उसकी मां पर पशु कल्याण अधिनियम के उल्लंघन के लिए मुकदमा चलाया गया था. अदालत में दर्ज जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने 2016 से 2023 तक कुत्तों की अवैध ब्रीडिंग की घटना को अंजाम दिया था. फिलहाल आरोपी इस आदेश के खिलाफ अपील कर सकती हैं और इसलिए इस पर अंतिम फैसला आना बाकी है.
अमेरिकी अदालत ने संघीय न्यायाधीश के नेशनल गार्ड आदेश को रोका
अमेरिका की एक अपीलीय अदालत ने शुक्रवार को अस्थायी रूप से एक आदेश को रोक दिया, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूसम कोनेशनल गार्ड सैनिकों का नियंत्रण वापस करने के लिए कहा गया था, जिन्हें माइग्रेशन से संबंधित विरोध प्रदर्शनों को शांत करने के लिए तैनात किया गया था. नौवें अमेरिकी सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स ने ट्रंप प्रशासन की अपील के बाद न्यायाधीश चार्ल्स ब्रेयर के आदेश को रोक दिया. अदालत ने कहा कि इस मामले पर मंगलवार को सुनवाई होगी.
अपीलीय अदालत के फैसले से पहले गुरुवार को न्यायाधीश ब्रेयर ने फैसला सुनाया था कि नेशनल गार्ड की तैनाती कानून के खिलाफ थी और अधिकार का उल्लंघन करती थी. ब्रेयर ने अपने फैसले में लिखा, "उनके कार्य अवैध थे - दोनों उनके वैधानिक अधिकार के दायरे से अधिक थे और संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान के दसवें संशोधन का उल्लंघन करते थे."
गवर्नर न्यूसम ने इमिग्रेशन-विरोधी छापों को लेकर विरोध प्रदर्शनों के दौरान सैनिकों की तैनाती को रोकने के लिए एक आपातकालीन प्रस्ताव के लिए अदालत का रुख किया था. अपीलीय अदालत के फैसले से पहले, गवर्नर ने एक्स पर कहा था, "यह जीत सिर्फ कैलिफोर्निया के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र के लिए है. यह एक ऐसे व्यक्ति पर अंकुश है जिसकी सत्तावादी प्रवृत्तियां दिन-ब-दिन बढ़ रही हैं."
लॉस एंजेलेस ट्रंप प्रशासन के प्रवासियों पर नकेल कसने और इमिग्रेशन विरोधी छापों के खिलाफ लगातार कई दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहा है. ट्रंप ने जब 4,000 नेशनल गार्ड सैनिकों और 700 मरीन को प्रदर्शनों को शांत करने में मदद करने के लिए तैनात किया तो तनाव काफी बढ़ गया.
यूक्रेन युद्ध में रूसी सेना को दस लाख लोगों के हताहत होने का अनुमान
यूनाइटेड किंगडम (यूके) के रक्षा मंत्रालय ने अपनी नवीनतम खुफिया जानकारी में बताया है कि 2022 में यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर आक्रमण शुरू करने के बाद से रूस के लगभग 10 लाख लोगों के हताहत (मृत और घायल) होने की संभावना है.
रक्षा मंत्रालय ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि यह संभावना है कि इस संख्या में से 250,000 रूसी सैनिक मारे गए हैं या लापता हैं और और उन्हें मृत मान लिया गया है, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से रूस का सबसे बड़ा नुकसान है.
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि केवल 2025 में, रूस के दो लाख से ज्यादा लोगों के हताहत होने की संभावना है और यूक्रेन के जनरल स्टाफ ने प्रतिदिन औसतन 1,250 रूसी हताहतों की रिपोर्ट दी है. रक्षा मंत्रालय की खुफिया जानकारी के अनुसार, रूसी सेना से यह अपेक्षा की गई थी कि वे रक्षात्मक पदों पर हावी होने और सामरिक लाभ हासिल करने के लिए भारी संख्या का उपयोग करके यूक्रेनी सेनाओं को फैलाने का प्रयास जारी रखेंगे.
2024 में नौ देशों ने परमाणु हथियारों पर खर्च किए 100 अरब डॉलर
साल 2024 में परमाणु शक्ति वाले नौ देशों ने परमाणु हथियारों पर 100 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च किए. यह खर्च 2023 की तुलना में करीब दस फीसदी ज्यादा है. ‘इंटरनेशनल कैंपेन टू अबॉलिश न्यूक्लियर वैपन्स’ (आईसीएएन) द्वारा शुक्रवार को जारी की गई एक रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है.
रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में अमेरिका ने परमाणु हथियारों पर सबसे ज्यादा 56.8 अरब डॉलर खर्च किए जो बाकी आठ परमाणु शक्ति वाले देशों के कुल खर्च से भी ज्यादा है. अमेरिका के बाद चीन ने 12.5 अरब डॉलर और ब्रिटेन ने 10.4 अरब डॉलर खर्च किए. परमाणु शक्ति वाले अन्य देश- फ्रांस, भारत, इस्राएल, उत्तर कोरिया, पाकिस्तान और रूस हैं.
न्यूज एजेंसी डीपीए के मुताबिक, आईसीएएन गैर-सरकारी संगठनों का एक गठबंधन है, जो परमाणु हथियारों के निषेध पर हुई संधि के पालन और कार्यान्वयन को बढ़ावा देता है. इस संधि को 2017 में संयुक्त राष्ट्र में 122 देशों द्वारा अपनाया गया था और यह 2021 में लागू हुई थी. इसके लिए आईसीएएन को 2017 में ही नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.
दिल्ली विश्वविद्यालय के किसी भी कोर्स में नहीं पढ़ाई जाएगी 'मनुस्मृति'
दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) ने स्पष्ट किया है कि 'मनुस्मृति' उसके किसी भी पाठ्यक्रम में नहीं पढ़ाई जाएगी. विश्वविद्यालय ने एक्स पर एक आधिकारिक पोस्ट में कहा कि संस्कृत विभाग के चार-क्रेडिट वाले कोर्स 'धर्मशास्त्र अध्ययन' में सूचीबद्ध इस ग्रंथ को पूरी तरह से हटा दिया गया है. इस कोर्स को अब पाठ्यक्रम से हटा दिया गया है.
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप स्नातक पाठ्यक्रम फ्रेमवर्क (यूजीसीएफ) के तहत शुरू किए गए धर्मशास्त्र अध्ययन पेपर में रामायण, महाभारत, पुराण और अर्थशास्त्र जैसे ग्रंथ भी शामिल थे.
यह निर्णय अकादमिक पाठ्यक्रमों में मनुस्मृति को शामिल करने को लेकर बार-बार होने वाली बहसों के बीच आया है. इससे पहले मार्च में, दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति योगेश सिंह ने कहा था कि इतिहास विभाग के एक पैनल द्वारा इसे इतिहास (ऑनर्स) पाठ्यक्रम में शामिल करने की मंजूरी के बाद, यह ग्रंथ डीयू में किसी भी अध्ययन सामग्री का हिस्सा नहीं होगा.
इसी तरह का विवाद पिछले साल भी उठा था जब लॉ फैकल्टी ने कानून के छात्रों को मनुस्मृति पढ़ाने का प्रस्ताव दिया था, जिसे बाद में संकाय सदस्यों के विरोध के बाद वापस ले लिया गया था. विश्वविद्यालय के रुख की पुष्टि करते हुए कुलपति योगेश सिंह ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया, "हमारा रुख वही रहेगा. मनुस्मृति डीयू के किसी भी पाठ्यक्रम में नहीं पढ़ाई जाएगी. विश्वविद्यालय ने अतीत में भी यह स्पष्ट कर दिया था. इस ग्रंथ को संस्कृत विभाग के धर्मशास्त्र अध्ययन से हटा दिया गया है. भविष्य में भी, जब भी हमारे संज्ञान में आएगा कि इस ग्रंथ को अध्ययन के लिए सुझाया गया है, प्रशासन इसे हटा देगा."
इस्राएली हमले में ईरान के छह परमाणु वैज्ञानिकों की मौत: रिपोर्ट
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शुक्रवार सुबह ईरान पर इस्राएल के हमले में कम से कम छह ईरानी परमाणु वैज्ञानिक मारे गए हैं. ईरानी राज्य समाचार एजेंसी तस्नीम ने हमले में मारे गए अब्दुलहमीद मिनोचेहर, अहमद्रेजा जोल्फाघारी, अमीरहोसेन फेघी, मोताल्लेबलिजादेह, मोहम्मद मेहदी तेहरानची और फेरेइदौन अब्बासी के नामों की घोषणा की है.
समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार, तेहरानची इस्लामिक आजाद विश्वविद्यालय, ईरान के अध्यक्ष थे और अब्बासी ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन के पूर्व प्रमुख थे. इस्राएल ने कहा है कि उसके हमलों ने स्पष्ट रूप से ईरानी परमाणु स्थलों को निशाना बनाया था ताकि तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोका जा सके, जिसके बारे में इस्राएल का दावा है कि यह एक अस्तित्व का खतरा बनेगा.
इस्राएल और कई पश्चिमी देशों का मानना है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम का उपयोग परमाणु हथियार विकसित करने के लिए कर रहा है, जबकि ईरान हमेशा कहता रहा है कि उसका कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है.
ईरान के नतांज न्यूक्लियर प्लांट को बनाया गया निशाना, कोई रिसाव नहीं
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने शुक्रवार को पुष्टि की कि ईरान की नतांज परमाणु सुविधा को इस्राएली हमलों में निशाना बनाया गया, लेकिन ऐसी जानकारी है कि वहां कोई विकिरण रिसाव नहीं पाया गया है. आईएईए ने एक्स पर महानिदेशक राफेल ग्रॉसी के हवाले से कहा कि ईरानी अधिकारियों ने बताया था कि बुशेहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर हमला नहीं हुआ था और नतांज में विकिरण का स्तर सामान्य बना हुआ है.
ग्रॉसी ने कहा, "आईएईए ईरान में चिंताजनक स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है. एजेंसी विकिरण स्तरों के संबंध में ईरानी अधिकारियों के संपर्क में है. हम देश में अपने निरीक्षकों के भी संपर्क में हैं." यह बयान ईरान भर में इस्राएली हमलों की एक लहर के बाद बढ़े तनाव के बीच आया है, जिसमें सैन्य और परमाणु संबंधित स्थलों को निशाना बनाया था.
इस्राएली रक्षा अधिकारियों का मानना है कि नतांज परमाणु सुविधा को हवाई हमलों में महत्वपूर्ण नुकसान हुआ है, हालांकि ईरान ने अभी तक नुकसान की सीमा पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया जारी नहीं की है. नतांज ईरान का मुख्य यूरेनियम संवर्धन केंद्र है और इसे देश की परमाणु अवसंरचना का आधारशिला माना जाता है, जिसमें हजारों सेंट्रीफ्यूज हैं. यह सुविधा पहले भी साइबर हमलों और विस्फोटों सहित तोड़फोड़ के प्रयासों का केंद्र रही है.
मई में एक अरब डॉलर के आईफोन भारत से अमेरिका भेजे गए
भारत में आईफोन बनाने वाली कंपनी फॉक्सकॉन ने बीते मई महीने में करीब एक अरब डॉलर की कीमत के आईफोन भारत से अमेरिका निर्यात किए. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स द्वारा देखे गए डाटा के मुताबिक, साल 2025 के शुरुआती पांच महीनों में फॉक्सकॉन ने 4.4 अरब डॉलर के आईफोन भारत से अमेरिका भेजे हैं. माना जा रहा है कि एप्पल अमेरिका द्वारा चीन पर लगाए गए टैरिफों से बचने के लिए भारत से आईफोन का निर्यात बढ़ा रही है.
इस साल मार्च से मई तक भारत से जितने भी आईफोन निर्यात किए गए, उसमें से 97 फीसदी अमेरिका भेजे गए. पिछले साल यह आंकड़ा करीब 50 फीसदी था और पूरे साल में 3.7 अरब डॉलर के आईफोन भारत से अमेरिका भेजे गए थे. रॉयटर्स के मुताबिक, पहले भारत में बने आईफोनों को नीदरलैंड्स, चेक रिपब्लिक और ब्रिटेन समेत कई देशों में भेजा जाता था.
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने 11 जून को कहा कि दोनों देशों के एक योजना पर सहमत होने के बाद चीन को 55 फीसदी टैरिफ का सामना करना पड़ेगा. हालांकि, ट्रंप ने यह भी कहा कि दोनों नेताओं (ट्रंप और शी जिनपिंग) की सहमति मिलने के बाद ही ऐसा होगा. वहीं, भारत अभी 10 फीसदी टैरिफ का सामना कर रहा है और अमेरिका के साथ व्यापार समझौता करने के लिए बातचीत कर रहा है.
एयर इंडिया फ्लाइट में बम होने की धमकी मिली, थाईलैंड में हुई आपात लैंडिंग
शुक्रवार को थाईलैंड के फुकेट से नई दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट में बम होने की धमकी मिली, जिसके बाद फ्लाइट की थाईलैंड में ही आपात लैंडिंग करनी पड़ी. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, फुकेट एयरपोर्ट के अधिकारियों ने यह जानकारी दी है. अधिकारियों ने यह भी बताया है कि शुरुआती जांच में विमान में कोई बम नहीं मिला है.
एयरपोर्ट अधिकारियों ने बताया कि फ्लाइट एआई 379 पर सवार सभी 156 यात्रियों को आपातकालीन प्रोटोकॉल के तहत विमान से उतार लिया गया है. फ्लाइट रडार24 के मुताबिक, विमान ने फुकेट एयरपोर्ट से दिल्ली के लिए उड़ान भरी थी लेकिन अंडमान सागर के ऊपर एक बड़ा चक्कर लगाने के बाद थाईलैंड में ही आपात लैंडिंग की.
यह धमकी तब मिली है, जब गुरुवार को ही अहमदाबाद में एयर इंडिया का एक विमान हादसे का शिकार हुआ है. रॉयटर्स के मुताबिक, पिछले साल भारतीय एयरलाइन्स और हवाई अड्डों पर बम होने की बहुत सारी धमकियां मिली थीं. शुरुआती 10 महीनों में लगभग 1,000 फर्जी कॉल और मैसेज प्राप्त हुए थे. यह आंकड़ा साल 2023 की तुलना में दस गुना ज्यादा था.
विमान हादसे की जगह पर पहुंचे पीएम मोदी, घायलों से भी मिले
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार सुबह अहमदाबाद पहुंचे और दुर्घटना स्थल का जायजा लिया. अधिकारियों ने उन्हें स्थिति के बारे में जानकारी दी. इसके बाद वे सिविल अस्पताल गए और वहां उन्होंने विमान हादसे में घायल हुए लोगों से मुलाकात की. उन्होंने हादसे में बचे इकलौते जीवित व्यक्ति विश्वास कुमार रमेश से भी मुलाकात की.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरुवार शाम को ही अहमदाबाद पहुंच गए थे. उन्होंने एक बैठक में बचाव एवं राहत कार्यों की समीक्षा की और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए. न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, उन्होंने बताया कि करीब 1,000 डीएनए टेस्ट किए जाएंगे और मृतकों के शव जल्द से जल्द उनके परिवारों को सौंप दिए जाएंगे.
एनडीआरएफ की टीमें दुर्घटना स्थल पर खोजी कुत्तों के साथ तलाशी अभियान चला रही हैं. एनडीआरएफ के अधिकारी हरिओम गांधी ने बताया कि दुर्घटनास्थल पर छह टीमें काम कर रही हैं और घटनास्थल के पूरी तरह से साफ होने के बाद ही मृतकों की कुल संख्या की जानकारी दी जाएगी.
इस्राएल का ईरान पर हमला, परमाणु और सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना
शुक्रवार तड़के सुबह इस्राएल ने ईरान की राजधानी तेहरान पर हमला किया, जिसमें पूरे शहर में विस्फोटों की खबर है. इस्राएली अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों में ईरान के प्रमुख परमाणु और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया. यह हमला ईरान के तेजी से आगे बढ़ रहे परमाणु कार्यक्रम को लेकर बढ़ते तनाव के बाद हुआ है.
इस्राएल डिफेंस फोर्सेस (आईडीएफ) ने एक्स पर एक वीडियो बयान जारी कर कहा है, "सालों से ईरानी शासन इस्राएली राज्य के विनाश की बात कर रहा है और ऐसा करने के लिए ठोस सैन्य योजनाएं बना रहा है और उन्हें आगे बढ़ा रहा है." इस्राएली प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू ने इस ऑपरेशन को "राइजिंग लॉयन" नाम दिया है और कहा है कि यह ऑपरेशन तब तक जारी रहेगा जब तक ईरान से इस्राएल के अस्तित्व के लिए खतरा समाप्त नहीं हो जाता.
शुक्रवार को जारी कई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस हमले में ईरान के अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर मारे गए हैं. ईरानी राज्य टेलीविजन ने कहा कि होसेन सलामी के मारे जाने की आशंका है. ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई ने चेतावनी दी है कि हमले के बाद इस्राएल को "कठोर दंड" भुगतना होगा. उन्होंने एक बयान जारी कर कहा, "इस अपराध के साथ, यहूदी शासन ने अपने लिए एक कड़वी और दर्दनाक नियति तय कर ली है और इसे निश्चित रूप से प्राप्त करेगा."
इस हमले के बाद तेहरान के मुख्य अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उड़ानें निलंबित कर दी गई हैं और पड़ोसी इराक ने भी अपने हवाई क्षेत्र को पूरी तरह से बंद कर दिया है. यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने बुधवार को ही कहा था कि ईरान लगभग दो दशकों में पहली बार अपने परमाणु अप्रसार दायित्वों का उल्लंघन कर रहा है.
अमेरिका ने इस हमले में अपनी संलिप्तता से इनकार किया है और ईरान से अमेरिकी हितों या कर्मियों को निशाना न बनाने का आग्रह किया है. इस घटना से मध्य पूर्व में पहले से ही अस्थिर स्थिति में और वृद्धि होने की आशंका है.
एयर इंडिया फ्लाइट में सवार 241 लोगों की मौत, सिर्फ एक जीवित बचा
गुरुवार को अहमदाबाद में हादसे का शिकार हुए एयर इंडिया विमान में सवार 241 लोगों की मौत हो गई है. एयर इंडिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी पुष्टि की है. इस विमान में 230 यात्री और 12 चालक दल के सदस्य सवार थे. इनमें से सिर्फ एक व्यक्ति जीवित बचा है, जिसका अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में इलाज चल रहा है.
हादसे का शिकार हुए यात्रियों में 169 भारतीय नागरिक, 53 ब्रिटिश नागरिक, सात पुर्तगाली नागरिक और एक कनाडाई नागरिक शामिल था. हादसे में सिर्फ 40 वर्षीय विश्वास कुमार रमेश जीवित बचे, जो भारतीय मूल के ब्रिटिश नागरिक हैं. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने पुलिस के हवाले से बताया है कि रमेश आपातकालीन निकास के पास बैठे हुए थे और समय रहते हुए कूद गए थे, जिससे उनकी जान बच गई.
हादसे में जमीन पर मौजूद कई लोगों की भी मौत हुई है. न्यूज एजेंसी एएफपी के मुताबिक, अहमदाबाद की पुलिस उपायुक्त कनन देसाई ने बताया है कि अब तक 265 शवों की गिनती की गई है. यानी जमीन पर मौजूद कम से कम 24 लोगों की भी हादसे में मौत हुई है. हालांकि, अभी शरीर के और अंग भी मिल रहे हैं, जिससे मौत का आंकड़ा बढ़ सकता है.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि मृतकों की आधिकारिक संख्या डीएनए परीक्षण पूरा होने के बाद ही घोषित की जाएगी. उन्होंने कहा कि जिन परिवारों के रिश्तेदार विदेश में हैं, उन्हें सूचित कर दिया गया है और उनके डीएनए नमूने लिए जाएंगे.