कोविड-19: डेंगू रोकथाम की कोशिश पर भी असर | दुनिया | DW | 13.07.2020
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दुनिया

कोविड-19: डेंगू रोकथाम की कोशिश पर भी असर

कोरोना वायरस को रोकने के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था पर अत्यधिक दबाव है लेकिन बारिश के मौसम में डेंगू का खतरा भी बढ़ गया है. सिंगापुर में लॉकडाउन के दौरान डेंगू के मामले तेजी से बढ़े हैं.

कोरोना वायरस के संक्रमण की रफ्तार को धीमा करने के लिए सरकारों ने लॉकडाउन लगाए ताकि लोग घरों में रहे. प्रशासन ने कचरा संग्रहण जैसी सेवाओं को प्रभावित करने वाली सभी गतिविधियां सीमित कर दीं. सरकारों ने अस्पतालों में मरीजों की भारी संख्या को घटाने के प्रयास किए. लेकिन इन कदमों का असर डेंगू जैसी बीमारी के खिलाफ लड़ाई पर भी पड़ा है.

बारिश के मौसम में एशियाई देशों में डेंगू का कहर देखने को मिलता है. एइडेस एगिप्टी मच्छरों से फैलने वाली यह बीमारी अक्सर शहरों में पलने वाले मच्छरों से होती है. दूसरे मच्छरों से अलग एइडेस एगिप्टी मच्छर दिन में काटते हैं और उसके बाद शरीर में दर्द और बुखार रहता है. यह ऐसी बीमारी है जो समय-समय पर होती है और इसे कभी-कभी महामारी के रूप में भी देखा जाता है.

दक्षिणपू्र्व एशियाई देश जैसे सिंगापुर और इंडोनेशिया को इस साल डेंगू के साथ-साथ कोरोना वायरस का भी सामना करना पड़ रहा है. पैन अमेरिकन हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक ब्राजील में जहां कोविड-19 के 16 लाख से भी अधिक मामले हैं वहीं डेंगू के कम से कम 11 लाख मामले हैं और इस वजह से करीब 400 लोगों की मौत हो चुकी है. बरसात का मौसम शुरू होने के साथ लातिन अमेरिकी देश जैसे क्यूबा, चिली और कोस्टा रिका के साथ ही दक्षिण एशिया में स्थित भारत और पाकिस्तान में डेंगू के मामले बढ़ेंगे.

डेंगू जानलेवा नहीं होता है लेकिन गंभीर मामलों में मरीज को अस्पताल में दाखिल होने की जरूत पड़ती है. डेंगू के मच्छर को पलने से रोकना ही सबसे उपयुक्त कदम है. जैसे कि कूड़ा-कचरा हटाना, पानी को जमा होने से रोकना आदि. कई देशों में कोरोना वायरस के कारण लगे लॉकडाउन और अन्य पाबंदियों से इस दिशा में कोशिशें कम हो गईं हैं और कई देशों में पूरी तरह से रुक गईं हैं.

यंग डॉक्टर्स एसोशिएशन के डॉ. रिजवान कुंडी के मुताबिक उत्तर पश्चिम पाकिस्तान में बाजार और टायर की दुकानों को डिसइंफेक्ट करने की योजना फंड की कमी की वजह से टाल दी गई. पिछले साल यहां डेंगू के बहुत मामले सामने आए थे. भारत की राजधानी दिल्ली में मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करने वाले स्वास्थ्य कार्यकर्ता कोरोना वायरस संक्रमण की भी जांच कर रहे हैं.

इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस और रेड क्रीसेंट सोसायटीज के अमेरिकी क्षेत्रीय कार्यालय में स्वास्थ्य प्रमुख डॉ. मारिया फ्रांका तालारिको के मुताबिक लातिन अमेरिकी देशों में कोरोना के मामले के सामने आने के कारण डेंगू पर निगरानी प्रभावित हुई है.

जानकारों का कहना है कि इस तरह की कोशिशों का बाधित होना डेंगू के खिलाफ वैश्विक लड़ाई के लिए अच्छे संकेत नहीं है.

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक 2019 का साल डेंगू के लिए रिकॉर्ड स्तर पर सबसे खराब साल रहा. डेंगू से हर क्षेत्र प्रभावित हुआ और कुछ देश बुरी तरह से प्रभावित हुए थे. इस साल सिंगापुर में मच्छर के लार्वा पाए जाने के मामले पांच गुना अधिक दर्ज किए गए. यह लॉकडाउन के दौरान घरों और आवासीय परिसरों में पाए गए. जबकि दो महीने पहले संख्या इतनी नहीं थी.

सिंगापुर नेशनल एनवॉयरमेंट एजेंसी के मुताबिक 6 जुलाई तक सिंगापुर में डेंगू के मामले 15,500 से अधिक थे. उसको आशंका है कि मामला 22,170 के आंकड़े को पार कर सकता है. साल 2013 में करीब इतने ही मामले सामने आए थे और यह अब तक के रिकॉर्ड मामले है.

एए/सीके (एपी)

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