अमेरिकी आपत्ति के बावजूद रूसी मिसाइलों की पहली खेप भारत रवाना | भारत | DW | 15.11.2021
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भारत

अमेरिकी आपत्ति के बावजूद रूसी मिसाइलों की पहली खेप भारत रवाना

भारत पर अमेरिका के प्रतिबंधों के खतरे के बावजूद रूस ने भारत को एस-400 मिसाइलों की सप्लाई शुरू कर दी है. पहली खेप इस साल के आखिर तक भारत पहुंच जाएगी. अमेरिका इस समझौते से नाखुश है.

रूस ने भारत को एस-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम की सप्लाई शुरू कर दी है. रूसी समाचार एजेंसियों ने रविवार को रूसी सैन्य सहयोग एजेंसी के प्रमुख दिमित्री शुगायेव के हवाले से यह खबर दी. हालांकि भारत सरकार ने अभी कोई टिप्पणी नहीं की है.

हथियारों की रूस से होने वाली यह सप्लाई भारत पर अमेरिकी प्रतिबंध का खतरा बढ़ा देती है. अमेरिका ने 2017 में एक कानून पास किया था जिसके तहत रूस से सैन्य हथियार खरीदने से देशों को हतोत्साहित करने के लिए प्रतिबंधों का प्रावधान है.

55 अरब डॉलर का समझौता

रूसी समाचार एजेंसी इंटरफैक्स को शुगायेव ने दुबई के एयरशो के दौरान कहा, "पहली सप्लाई पहले ही शुरू हो चुकी है." शुगायेव ने कहा कि एस-400 सिस्टम की पहली खेप इस साल के आखिर तक भारत पहुंच जाएगी.

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भारत और रूस के बीच इन हथियारों को खरीदने का समझौता 2018 में हुआ था. 55 अरब डॉलर के इस समझौते के तहत लंबी दूरी की जमीन से हवा में मार करने वालीं पांच मिसाइल खरीदे गए थे, जिन्हें भारत ने चीन से खतरे के मद्देनजर जरूरी बताया था.

रूस से ये सिस्टम खरीदने के कारण भारत पर कड़े अमेरिकी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं. काट्सा - काउंटरिंग अमेरिकाज अडवर्सरीज थ्रू सैंक्शंस ऐक्ट (CAATSA) में रूस को उत्तर कोरिया और ईरान के साथ उन देशों की सूची में रखा गया है जिन्हें अमेरिका ने अपना बैरी बताया है. इसकी वजह यूक्रेन में रूस की कार्रवाई, 2016 के अमेरिकी चुनावों में दखलअंदाजी और सीरिया की मदद जैसी रूसी गतिविधियां बताई गईं.

साझेदारी मुश्किल में

भारत का कहना है कि उसकी रूस और अमेरिका दोनों के साथ रणनीतिक साझेदारी है. इस आधार पर उसने अमेरिका से काट्सा कानून से राहत की अपील भी की थी. हालांकि अमेरिका ने भारत को बता दिया था कि राहत मिलने की संभावना कम ही है.

पिछले साल इसी कानून के तहत अमेरिका ने तुर्की पर भी प्रतिबंध लगा दिए थे जब उसने रूस से एस-400 मिसाइल सिस्टम खरीदा था. ये प्रतिबंध तुर्की की हथियार खरीदने और विकसित करने वाली संस्था प्रेजीडेंसी ऑफ डिफेंस इंडस्ट्रीज के खिलाफ लगाए गए थे.

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साथ ही, अमेरिका ने तुर्की को अपने एफ-35 फाइटर जेट प्रोग्राम से भी बाहर कर दिया था. एफ-35 अमेरिका के बेड़े में सबसे आधुनिक फाइटर जेट है जो सिर्फ नाटो देशों और अमेरिका के साथियों के लिए ही उपलब्ध है.

इन प्रतिबंधों के जवाब में रूस ने कहा था कि वह आधुनिक फाइटर जेट विकसित करने में तुर्की की मदद करेगा. हालांकि इस बारे में अभी कोई समझौता नहीं हुआ है. दिमित्री शुगायेव ने आरआईए न्यूज एजेंसी को बताया, "उस योजना में अभी भी हम मोलभाव के चरण में हैं."

वीके/एए (रॉयटर्स)

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