इंडोनेशिया, मलेशिया और म्यांमार कोरोना से बेहाल | दुनिया | DW | 23.07.2021
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दुनिया

इंडोनेशिया, मलेशिया और म्यांमार कोरोना से बेहाल

सांस लेने के लिए संघर्ष कर रहे कोविड-19 मरीजों की मांग को पूरा करने के लिए इंडोनेशिया ने अपने लगभग पूरे ऑक्सीजन उत्पादन को चिकित्सा उपयोग की तरफ मोड़ दिया है.

मलेशिया के अस्पतालों में कोरोना मरीजों के लिए खाली बिस्तर नहीं बचे हैं. उनका इलाज फर्श पर हो रहा है. और म्यांमार के सबसे बड़े शहर में कब्रिस्तान के कर्मचारी दाह संस्कार और दफनाने की गंभीर मांग को पूरा करने के लिए दिन और रात मेहनत कर रहे हैं.

मई में भारत में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान खुले में जलती चिताओं ने पूरी दुनिया को सकते में डाल दिया था. लेकिन पिछले दो सप्ताह में तीन दक्षिण पूर्व एशियाई देश भारत की प्रति व्यक्ति मृत्यु दर की चरम सीमा को पार कर चुके हैं. इन देशों में कोरोना का डेल्टा वेरिएंट भारी तबाही के लिए जिम्मेदार है और क्षेत्र पर अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है.

गंभीर संकट से जूझते देश

क्षेत्र में कोरोना के रिकॉर्ड मामलों के बाद मौतों की संख्या तेजी से बढ़ी है. इन देशों में स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है. सरकारें संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए नए-नए प्रतिबंध लगा रही हैं.

मलेशिया के सेलांगर में जब एरिक लैम 17 जून को कोविड-19 के लिए पॉजिटिव पाए गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया तो अस्पताल में पहले से ही मरीजों की भीड़ थी. अस्पताल के गलियारे भी मरीजों से पटे पड़े थे. सेलांगर कोरोना के प्रकोप का केंद्र था.

कुछ अन्य अस्पतालों की तुलना में सेलांगर के इस अस्पताल की स्थिति अभी भी बेहतर थी. सेलांगोर, मलेशिया का सबसे अमीर और सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है. वहां के अस्पतालों में निशुल्क बिस्तर नहीं थे और मरीजों का इलाज फर्श या फिर स्ट्रेचर पर किया जा रहा था.

38 साल के लैम तीन हफ्ते तक अस्पताल में बिताए एक घटना का जिक्र करते हुए बताते है कि एक मशीन दो घंटे तक लगातार आवाज करती रही, जब नर्स उसे बंद करने आई तो उन्हें को मालूम चला कि मरीज मर चुका है.

कोरोना के मामलों में तेजी के कारण

मलेशिया में स्थित रेड क्रॉस के लिए एशिया-प्रशांत आपातकालीन स्वास्थ्य समन्वयक अभिषेक रिमल कहते हैं क्षेत्र में हाल के उछाल में कई कारकों ने योगदान दिया है, जिसमें महामारी से थके हुए लोग शामिल हैं और वे सावधानियों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं. क्षेत्र में कम टीकाकरण दर और डेल्टा वेरिएंट भी उछाल का मुख्य कारण बना है.

रिमल के मुताबिक, "जिस तरह से देश उपाय अपना रहा है. अगर लोग उसका पालन करते हैं, हाथ धोने, मास्क पहनने, दूरी बनाए रखने की मूल बातों को ध्यान में रखते हैं और टीका लगवाते हैं तो हम मामलों में गिरावट देखेंगे"

हालांकि अब तक मलेशिया के राष्ट्रीय लॉकडाउन ने रोजाना के संक्रमण दर को कम नहीं किया है. करीब 3.2 करोड़ की आबादी वाले देश में पहली बार 13 जुलाई को दैनिक मामले 10 हजार से अधिक पहुंच गए थे.

इंडोनेशिया और म्यांमार में क्या हाल

इंडोनेशिया, म्यांमार और मलेशिया में कोरोना के मामलों में तेज वृद्धि हुई है. जून के अंत से उनका सात दिन का औसत 4.37, 4.29 और 4.14 प्रति दस लाख पर पहुंच गया है. कंबोडिया और थाईलैंड में भी मामलों के साथ इससे होने वाली मौतों में भी इजाफा हुआ है.

रिमल कहते हैं देशों ने भारतीय अनुभव को एक सबक के रूप में लिया है और तेजी के साथ काम किया. अधिकांश देशों ने वायरस को धीमा करने के लिए नए प्रतिबंधों के साथ अपेक्षाकृत जल्दी प्रतिक्रिया दी और गंभीर रूप से बीमार लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया. इंडोनेशिया में लगभग 14 फीसदी आबादी को कम से कम वैक्सीन की एक खुराक लग चुकी है.

इंडोनेशिया में मुख्य रूप से चीन की सिनोवैक वैक्सीन लगी है. सैन्य शासन वाले म्यांमार में कोरोना जांच के बाद हाल के सप्ताहों में मामले तेजी से बढ़े हैं. अब यह स्पष्ट हो गया है कि मई के मध्य में एक नई लहर शुरू होने से मामले और मौत तेजी से बढ़ी हैं.

एए/सीके (एएफपी)

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