फंदों में फंसकर मरते सुमात्रा के दुर्लभ बाघ | पर्यावरण | DW | 25.04.2022

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पर्यावरण

फंदों में फंसकर मरते सुमात्रा के दुर्लभ बाघ

खेतों के पास जंगल में स्टील के फंदे सेट कर दिए गए. इंडोनेशिया में इन्हीं फंदों में फंसकर तीन दुर्लभ सुमात्रन बाघों की मौत हो गई. सुमात्रन टाइगर लुप्त होने का सबसे ज्यादा खतरा झेल रहे जीवों में शामिल हैं.

फंसे में फंसकर मारा गया सुमात्रन बाघ

फंसे में फंसकर मारा गया सुमात्रन बाघ

इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप में भारी पैसा खर्च कर सुमात्रन बाघों के संरक्षण का अभियान चल रहा है. लेकिन 24 अप्रैल 2022 को इस अभियान को एक और बड़ा झटका लगा. द्वीप के उत्तर में स्थित आचे में अधिकारियों को दो बाघों के शव मिले. स्टील के तार से बनाए गए फंदों में दोनों बाघों का पैर फंसा था. मुआयना करते हुए अधिकारियों को 500 मीटर दूर एक और बाघ का शव मिला. उसकी मौत भी फंदे की वजह से हुई.

आचे के पुलिस चीफ हेंद्रा सुकमना कहते हैं, "शुरुआती शक तो यही है कि ये बाघ, जंगली सूअर को फंसाने के लिए लगाए गए फंदों में उलझ गए. हमें उनके पैरों में स्टील के तार का फंदा मिला." जांच के दौरान अधिकारियों को इलाके में ऐसे कई और फंदे मिले.

जंगलों में अब 400 से कभी सुमात्रन टाइगर बचे हैं

जंगलों में अब 400 से कभी सुमात्रन टाइगर बचे हैं

दो बाघिनें और एक बाघ

संरक्षण अभियान से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, घोर निराशा की बात तो यह है कि मरने वाले बाघों में दो बाघिनें हैं. मौत के बाद उनके शावकों के जिंदा बचने की संभावनाएं भी बहुत कमजोर पड़ जाएंगी. शावक एक से डेढ़ साल तक अपनी मां के साथ रहते हैं. इस दौरान बाघिन शिकार पकड़कर लाती है और शावकों का पेट भरती है. करीब 18 महीने के हो जाने के बाद बच्चों को मां का साथ छोड़कर अपना इलाका खोजना होता है. प्रजजन चक्र के लिहाज से मारी गई बाघिनों के शावक अभी सात से आठ महीने के होंगे.

सुमात्रन टाइगर के संरक्षण की कोशिशें बहुत कारगर नहीं हो पा रही हैं

सुमात्रन टाइगर के संरक्षण की कोशिशें बहुत कारगर नहीं हो पा रही हैं

कितने खास सुमात्रा के बाघ

सुमात्रन बाघ, आकार में साइबेरियन टाइगर और रॉयर बंगाल टाइगर से छोटे होते हैं. वैज्ञानिक अभी तक पूरी तरह यह नहीं समझ पाए हैं कि बाघों की यह प्रजाति महासागर का बड़ा इलाका पार कर सुमात्रा तक कैसे पहुंच गई.  इंडोनेशिया के जंगलों में अब 400 से भी कम सुमात्रन टाइगर बचे हैं. इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर ने सुमात्रा के बाघों को लुप्त होने का गंभीर खतरा झेल रही प्रजातियों में रखा है.

इंडोनेशिया के वन मंत्रालय के मुताबिक संरक्षण की तमाम कोशिशों के बावजूद देश में हर साल 10 सुमात्रन टाइगर मारे जाते हैं. पारंपरिक चीनी दवाओं में बाघ के कई अंगों का इस्तेमाल होता है. तमाम वैज्ञानिक शोध साफ कर चुके हैं कि बाघ के अंगों से बनाई जाने वाली चीनी दवाओं का कोई भी फायदा नहीं होता है, लेकिन इसके बावजूद शिकारियों को चीनी बाजार में अच्छी कीमत मिलती है. आचे में ही पुलिस ने बीते साल चार लोगों को गिरफ्तार किया था. वे बाघ के अंग बेच रहे थे. 2021 में भी ऐसे दो मामले सामने आए जब दो सुमात्रन टाइगर फंदों की वजह से मारे गए.

एक दशक में सबसे ज्यादा बाघ 2021 में मरे

इंडोनेशिया के कंजर्वेशन ऑफ नेचुरल रिसोर्सेज एंड इकोसिस्टम्स कानून के तहत संरक्षित वन्य जीवों का शिकार करने पर पांच साल की जेल और एक करोड़ इंडोनेशियाई रुपये (7000 डॉलर) के जुर्माने का प्रावधान है.

ओएसजे/सीके (एएफपी, एपी)