शोध: मस्तिष्क सिकुड़न का कारण बन सकता है कोविड | विज्ञान | DW | 14.03.2022

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विज्ञान

शोध: मस्तिष्क सिकुड़न का कारण बन सकता है कोविड

ब्रिटेन में किए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि कोविड-19 के परिणामस्वरूप मस्तिष्क सिकुड़ सकता है. इसके अलावा भावनाओं को नियंत्रित करने के लिए मस्तिष्क की प्राकृतिक प्रक्रियाएं और याददाश्त प्रभावित हो सकती है.

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों द्वारा किए गए एक नए अध्ययन में पाया गया है कि कोरोना वायरस संक्रमण से संक्रमित व्यक्ति का मस्तिष्क सिकुड़ सकता है. संक्रमण मस्तिष्क के कुछ हिस्से जो स्मृति और भावनाओं को नियंत्रित करने की क्षमता रखते हैं, उन्हें भी प्रभावित कर सकता है. इसके अलावा संक्रमण मस्तिष्क के उस अंग को क्षतिग्रस्त कर सकता है जो गंध को पहचानने में मदद करते हैं. 

इस नए अध्ययन के हाल ही में जारी निष्कर्षों के मुताबिक, विशेषज्ञों ने इन प्रभावों को उन रोगियों में देखा जो कोरोना वायरस से संक्रमित हुए लेकिन इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती नहीं हुए थे. विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रभाव आंशिक रूप से बना रहेगा या यह लंबे समय तक रहेगा इसके लिए आगे और जांच की जरूरत है.

विशेषज्ञों के मुताबिक, "कोविड-19 में मस्तिष्क संबंधी असामान्यताओं के पुख्ता सबूत हैं." शोध के मुताबिक चिकित्सा शोधकर्ताओं ने देखा कि कोविड-19 के रोगियों में औसत मानव मस्तिष्क औसतन 0.2 फीसदी से 2 फीसदी तक सिकुड़ जाता है. अध्ययन के नतीजे वैज्ञानिक पत्रिका नेचर में प्रकाशित हुए हैं. शोध ऐसे समय में पूरा हुआ जब ब्रिटेन में अल्फा वेरिएंट का प्रसार बढ़ रहा था.

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अध्ययन के दौरान विशेषज्ञों ने 51 से 81 साल के बीच के 785 लोगों के दिमाग को दो बार स्कैन किया. इनमें से 401 मरीज ऐसे थे जिन्हें ब्रेन स्कैन के बीच पहली बार और दूसरी बार कोरोना हुआ था. दूसरा ब्रेन स्कैन पहले स्कैन के औसतन 141 दिनों के बाद किया गया.

अध्ययन से पता चला है कि कुछ लोग जिन्हें कोविड हुआ था, वे लोग "ब्रेन फॉग" या मानसिक बादल से पीड़ित थे. जिसमें ध्यान, एकाग्रता, सूचना प्रसंस्करण की गति में हानि और याददाश्त कम होना शामिल है.

एए/सीके (रॉयटर्स)

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