महामारी से लड़ने की क्षमता पर भ्रष्टाचार का बुरा असर | दुनिया | DW | 28.01.2021

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दुनिया

महामारी से लड़ने की क्षमता पर भ्रष्टाचार का बुरा असर

भ्रष्टाचार विरोधी संगठन ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक जिन देशों में भ्रष्टाचार के उच्च स्तर है वे कोरोना वायरस महामारी की चुनौती से निपटने में कम सक्षम रहे.

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की चेयरपर्सन डेलिया फरेरिया रूबियो ने कहा, "कोविड-19 केवल एक स्वास्थ्य और आर्थिक संकट नहीं है. यह एक भ्रष्टाचार संकट है, जिसे हम मौजूदा समय में संभालने में विफल हो रहे हैं." ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने ताजा भ्रष्टाचार इंडेक्स जारी किया है. संगठन दुनिया के 180 देशों में सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार के आधार पर रैंकिंग देता है.

इस साल संगठन ने मापदंडों में कोविड-19 महामारी से निपटने के दौरान हुए भ्रष्टाचार पर खास जोर दिया है. संगठन ने पाया कि सबसे कम भ्रष्टाचार वाले देश कोरोना वायरस और आर्थिक चुनौतियों से निपटने में सर्वश्रेष्ठ रहे. संगठन ने निष्कर्ष निकाला कि जिन देशों ने स्वास्थ्य देखभाल में अधिक निवेश किया वे सार्वभौमिक स्वास्थ्य तक पहुंच मुहैया कराने में सक्षम रहे और वहां लोकतांत्रिक मानदंडों का उल्लंघन करने की संभावना कम है.

इस साल के सूचकांक में अमेरिका नई गिरावट के साथ 67वें पायदान पर है. डॉनल्ड ट्रंप के शासन में देश की रैंकिंग गिरी है. 100 में से शून्य अंक वाले देश ''बहुत भ्रष्ट'' हैं वहीं 100 में से 100 अंक पाने वाले देश ''बहुत स्वच्छ'' है. रिपोर्ट में पाया गया कि 26 अंक पाने वाला बांग्लादेश स्वास्थ्य देखभाल में बहुत कम निवेश करता है और इसलिए अब क्लीनिकों में इस तरह की रिश्वतखोरी, दवाई की खरीद में भ्रष्टाचार की समस्याओं का सामना कर रहा है.

इसके विपरीत 71 अंक हासिल करने वाले उरुग्वे को दक्षिण अमेरिका में कम भ्रष्ट देश माना गया है. उरुग्वे ने स्वास्थ्य देखभाल में भारी निवेश किया है. इसी वजह से वह कोरोना वायरस को लेकर तेज प्रतिक्रिया देने में सक्षम रहा.

Symbolbild Wirtschaftskriminalität

भ्रष्टाचार से मुकाबला करने के लिए संगठन ने कुछ सुझाव भी दिए.

कोरोना से निपटने में भ्रष्टाचार की कितनी भूमिका

बर्लिन स्थित संगठन के विश्लेषण के मुताबिक कोरोना वायरस को लेकर प्रतिक्रिया और भ्रष्टाचार के बीच रिश्ता दुनियाभर में व्यापक रूप में देखा सकता है. इस सूचकांक में 100 में से 88 अंक हासिल कर न्यूजीलैंड पहले पायदान पर है. न्यूजीलैंड की कोरोना महामारी से निपटने को लेकर संगठन ने तारीफ भी की है और कहा है कि वहां और बेहतरी की गुंजाइश है. 88 अंकों के साथ डेनमार्क भी शीर्ष पायदान पर न्यूजीलैंड के साथ है. सूचकांक में शीर्ष पर रहने वाले देश में स्वच्छ है, जबकि निचले पायदान वाले देशों में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार पाया गया.

फिनलैंड, सिंगापुर, स्विट्जरलैंड और स्वीडन ने 85 अंक हासिल किए, नॉर्वे को 84, नीदरलैंड्स 82, जर्मनी और लक्जेमबर्ग 80 अंकों के साथ शीर्ष दस देशों में शामिल है. एशियाई देशों की बात की जाए तो इस रैंकिंग में भारत 86वें पायदान पर है. चीन 78वें, पाकिस्तान 124वें जबकि नेपाल 117वें स्थान पर है. ट्रांसपेरेंसी ने 180 देशों का सर्वेक्षण किया, दो तिहाई देशों ने 100 में से 50 से कम अंक हासिल किए और औसतन अंक 43 रहा.

ट्रांसपेरेंसी ने सुझाव दिया है कि भ्रष्टाचार से मुकाबला करने और स्वास्थ्य पर इसके नकारात्मक प्रभाव से निपटने के लिए पारदर्शिता के साथ निरीक्षण संस्थानों को मजबूत किया जाना चाहिए. साथ ही खुला और पारदर्शी करार सुनिश्चित किया जाना चाहिए और सूचना तक पहुंच की गारंटी भी देनी चाहिए.

एए/सीके (डीपीए, एएफपी)

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