भारत: हंसने-हंसाने पर भी नफरत भारी? | भारत | DW | 02.12.2021
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भारत

भारत: हंसने-हंसाने पर भी नफरत भारी?

भारत में स्टैंड-अप कॉमेडियन इन दिनों दक्षिणपंथी विचारधारा वाले समूहों और व्यक्तियों के निशाने पर हैं. उनके शो कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए रद्द कर दिए जा रहे हैं.

कानून और व्यवस्था की समस्याओं का हवाला देते हुए मुनव्वर फारूकी के स्टैंड-अप कॉमेडी शो की अनुमति से इनकार करने के बाद अब कर्नाटक पुलिस ने एक और स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा को बेंगलुरु में शो की इजाजत देने से इनकार किया है. कामरा ने अपने शो रद्द होने की सूचना ट्विटर पर दी है. साथ ही उन्होंने शो रद्द होने पर भी कटाक्ष किया है. उन्होंने अपने ट्वीट में दो कारण बताए हैं. पहला-आयोजन स्थल पर 45 लोगों के बैठने की इजाजत से इनकार और दूसरा- शो को लेकर मिल रही धमकियों की वजह से. कामरा आगे अपने ट्वीट में लिखते हैं, "मेरा शो होने पर आयोजन स्थल को बंद करवा देने की धमकी ने भी काम खराब किया. मुझे लगता है यह भी कोविड प्रोटोकॉल और नई गाइडलाइंस का हिस्सा है. मुझे लगता है मुझे वायरस के वेरिएंट की तरह देखा जा रहा है."

कामरा ने कहा, "ट्विटर पर उन लोगों के लिए जो सोच रहे हैं कि कामरा कैसे कॉमेडी करता है, जबकि एक फारूकी को कॉमेडी छोड़नी पड़ती है. हम इस तथ्य से सांत्वना पा सकते हैं कि शासक वर्ग कम से कम समानता के साथ अत्याचार करने की कोशिश कर रहा है."

कामरा आगे कहते हैं, "हो सकता है कि अगर हम ऐसे ही समान उत्पीड़न की राह पर चलें तो, जलवायु परिवर्तन के बाद के युग में कभी समान आजादी के मुकाम तक पहुंच सके."

बोलने से दिक्कत

कामरा के शो रद्द करने के कुछ दिनों पहले एक और स्टैंड-अप कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी ने अपने शो रद्द होने के बाद कॉमेडी छोड़ने को लेकर एक पोस्ट सोशल मीडिया पर डाली थी. फारूकी लंबे समय से दक्षिणपंथी संगठनों के निशाने पर रहे हैं. उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा था, "नफरत जीत गई, आर्टिस्ट हार गया, अब बस, अलविदा! अन्याय."

फारूकी का यह बारहवां शो था जिसे पिछले दो महीनों में रद्द कर दिया गया था. बेंगलुरू पुलिस ने एक बयान में उन्हें "विवादास्पद व्यक्ति" करार दिया और कहा कि कानून और व्यवस्था के उल्लंघन और सांप्रदायिक सद्भाव खराब होने के डर से मुनव्वर फारूकी का शो रद्द कर दिया गया था. इससे पहले स्थानीय दक्षिणपंथी समूहों ने फारूकी और शो के आयोजकों को धमकी दी थी.

आवाज चुप कराने की कोशिश

फारूकी की घोषणा पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और शशि थरूर के अलावा विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक और फिल्मी हस्तियों ने 29 वर्षीय कॉमेडियन के साथ एकजुटता व्यक्त की. राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में लिखा था, "नफरत नहीं जीतेगी, मेरा विश्वास रखिए. हार नहीं माननी, रुकना नहीं है." हालांकि राहुल ने अपने ट्वीट में किसी का जिक्र नहीं किया, लेकिन माना जा रहा है कि उन्होंने यह ट्वीट फारूकी के सिलसिले में किया था.

फारूकी को जनवरी में मध्य प्रदेश के इंदौर में गिरफ्तार किया गया था. उन्हें अपने शो पर "आपत्तिजनक चुटकुले" बनाने के संदेह में गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद उन्हें उन जोक्स के लिए 37 दिनों तक जेल में रहना पड़ा जो उन्होंने बोले नहीं थे. गुजरात के रहने वाले फारूकी अपने शो में सरकार, राजनीतिक नेताओं का मजाक उड़ाते हैं. कई बार वे अपने शो में रूढ़िवादी प्रथाओं पर भी निशाना साधते हैं.

वीर दास भी आ गए थे निशाने पर

फारूकी को जनवरी में गिरफ्तार किया गया था और अब दिसंबर आ गया है लेकिन उस मामले पर चार्जशीट तक दायर नहीं की गई है. मामला अदालत में है और यह तय नहीं हो पाया है कि कौन दोषी है और कौन बेगुनाह. राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि कानून व्यवस्था बनाए रखे लेकिन सिर्फ इस वजह से किसी कॉमेडियन का शो रद्द कर देना अनुचित है कि कलाकर कुछ गलत बोल देगा. ऐसे में यह उसके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन माना जाता है.

पिछले महीने भारतीय कलाकार वीर दास ने अमेरिका में स्टैंड-अप कॉमेडी के दौरान टू इंडियाज मोनोलॉग पढ़ा था. जिसको लेकर भारत में काफी बवाल मचा. दास ने दो भारत के बारे में बात की थी. एक अच्छे और एक बुरे. इसके बाद उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत भी की गई. समाज के एक वर्ग के लोगों का कहना था कि भारत के बारे में विदेशी धरती में ऐसी बातें नहीं करनी चाहिए थी.

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