दिल्ली में एससीओ की आतंकवाद विरोधी बैठक, अफगानिस्तान की स्थिति पर नजर | एशिया | DW | 16.05.2022

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एशिया

दिल्ली में एससीओ की आतंकवाद विरोधी बैठक, अफगानिस्तान की स्थिति पर नजर

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के तत्वावधान में क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी संरचना (आरएटीएस) वार्ता सोमवार को नई दिल्ली में शुरू हो गई. इस बैठक में पाकिस्तान का तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भी शामिल हो रहा है.

भारत इस वार्ता की मेजबानी कर रहा है और यह 19 मई तक चलेगी. शंघाई सहयोग संगठन की क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना (SCO-RATS) की बैठक में सभी सदस्य देश शामिल हो रहे हैं. बैठक में पाकिस्तान से तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल शामिल हो रहा है. 2020 में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन के साथ गतिरोध के बाद और इस साल यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद यह भारत में होने वाली ऐसी पहली आधिकारिक चर्चा है. मीडिया में सूत्रों के हवाले से कहा गया कि कोविड-19 नियमों की वजह से चीनी प्रतिनिधिमंडल वर्तमान में भारत की यात्रा करने में सक्षम नहीं है और उसके बदले में चीनी दूतावास की एक टीम वार्ता में शामिल हो रही है.

बैठक के बारे में जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि चर्चाओं का एक प्रमुख केंद्र अफगानिस्तान की स्थिति पर होगा, विशेष रूप से तालिबान शासित देश में सक्रिय आतंकवादी समूहों से खतरे से निपटने के लिए. भारत अफगानिस्तान के घटनाक्रम को लेकर चिंतित नजर आता है. भारत ने अफगानिस्तान में तालिबान सरकार को मान्यता नहीं दी है और वह काबुल में एक समावेशी सरकार के गठन के लिए जोर दे रहा है.

इसके अलावा भारत चाहता है कि किसी भी देश के खिलाफ किसी भी आतंकवादी गतिविधियों के लिए अफगान की जमीन का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. अफगानिस्तान एससीओ के पर्यवेक्षक देशों में से एक है.

भारत में अफगानिस्तान के राजदूत फरीद मामुन्दजई ने इस बैठक पर ट्वीट किया, "मैं आज नई दिल्ली में शंघाई सहयोग संगठन के क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी संरचना की महत्वपूर्ण बैठक की मेजबानी करने के लिए भारत को धन्यवाद देता हूं. अफगानिस्तान में सुरक्षा और मानवीय स्थिति पिछले 9 महीनों में खराब हुई है."

उन्होंने आगे लिखा, "हम उम्मीद करते हैं कि यह बैठक अफगानिस्तान में सुरक्षा स्थिति से संबंधित सभी महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाएगी और समाधान का प्रस्ताव देगी. विशेष रूप से पड़ोसी देशों से गंभीर क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग अफगानिस्तान और क्षेत्र में शांति और विकास के लिए एकमात्र रास्ता है."

इससे पहले नवंबर में अफगानिस्तान पर तीसरी क्षेत्रीय सुरक्षा वार्ता एक विस्तारित प्रारूप में दिल्ली आयोजित की गई थी. उस वार्ता में भारत, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस, तजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषदों के सुरक्षा सलाहकारों ने हिस्सा लिया था.

भारत ने 28 अक्टूबर को एक वर्ष की अवधि के लिए एससीओ के क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी संरचना की परिषद की अध्यक्षता का पद संभाला था.

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उज्बेकिस्तान में स्थित आरएटीएसएक स्थायी आतंकवाद विरोधी इकाई है जो शंघाई सहयोग संगठन देशों के दायरे में आता है. इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आतंकवाद के खिलाफ सभी सदस्य देशों के बीच संबंध को बढ़ावा देना है ताकि सब साथ में आतंकवाद के खिलाफ खड़े हो सके.

एससीओ की 2001 में स्थापना हुई थी और 2002 में इसके चार्टर पर दस्तखत हुए और 19 सितंबर 2003 से यह संस्था काम करने लगी. इसके बाद जुलाई 2005 में कजाकिस्तान की राजधानी अस्ताना में हुए एससीओ सम्मेलन में भारत, ईरान और पाकिस्तान के राष्ट्र प्रमुख पहली बार शामिल हुए. भारत और पाकिस्तान 2017 में संस्था के सदस्य बने. एससीओ के सदस्य देशों में दुनिया की आधी आबादी रहती है.

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