चीन ने कड़े किए महामारी से जुड़े कानून | दुनिया | DW | 19.10.2020
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दुनिया

चीन ने कड़े किए महामारी से जुड़े कानून

चीन में बीमारियों के फैलने और उसके बारे में सबसे पहले ध्यान दिलाने वाले लोगों को सुरक्षा देने वाला नया कानून पास हुआ है. चीन को कोरोना महामारी की शुरुआती सूचनाओं को दबाने को लेकर विश्व भर की आलोचना झेलनी पड़ी है.

चीन के बीजिंग में स्थित एक वैक्सीन उत्पादन इकाई में वैक्सीन सैंपल के साथ एक रिसर्चर.

चीन के बीजिंग में स्थित एक वैक्सीन उत्पादन इकाई में वैक्सीन सैंपल के साथ एक रिसर्चर.

चीन में बने नए बायोसिक्योरिटी कानून में लोगों को अधिकार दिया गया है कि वे "बायोसिक्योरिटी को खतरे में डालने वाली किसी भी गतिविधि" के बारे में सूचना दे सकते हैं. इसके अलावा कहा गया है कि समय रहते बचाव वाले कदम उठाए जाने चाहिए जैसे कि किसी जोखिम की सक्रिय तौर पर निगरानी करना और उसके लिए पहले ही आपातकालीन योजनाएं बनाना. चीन में नया कानून अगले साल 15 अप्रैल से लागू हो जाएगा.

संक्रामक बीमारियों और महामारियों के बारे में कानून में लिखा है, "कानून के अनुसार, जब भी इस बारे में रिपोर्ट किया जाना चाहिए, तो ना किसी कार्यालय और ना ही किसी व्यक्ति को इसे छुपाना चाहिए... और ना ही किसी और को ऐसी रिपोर्ट करने से रोकना चाहिए."

विश्व के तमाम देश चीन की आलोचना करते आए थे कि उसने अपने यहां कोरोना वायरस के शुरुआती संक्रमण और उससे जुड़े बड़े खतरे को छिपाया था और उस बारे में सूचना देने वाले चीनी स्वास्थ्यकर्मियों को चुप कराने की कोशिश की थी. वहीं चीन इसे सच नहीं मानता है. चीन का कहना है कि उनके देश का स्वास्थ्य प्रशासन महामारी के विरुद्ध लड़ाई में एक अग्रणी भूमिका निभाता आया है.  

पिछले साल दिसंबर में सबसे पहले अपने सहकर्मियों को नए कोरोना वायरस के बारे में सतर्क करने वाले चीनी डॉक्टर ली वेनलियांग को पहले तो आधिकारिक रूप से फटकार लगाई गई थी. फिर जब बीमारी के कारण उसी डॉक्टर की मौत हो गई तो उसके लिए देश भर से दुख भरे संदेशों में उसके साथ सरकारी बर्ताव पर गुस्सा जताया गया था. इसके बाद चीनी प्रशासन ने अपने रुख से पलटते हुए डॉक्टर की मौत के लिए स्थानीय स्वास्थ्य प्रशासन की निंदा की और ली को एक नायक का दर्जा दिया.

China Wuhan Augenarzt Li Wenliang gestorben

कोरोना वायरस के बारे में सतर्क करने वाले चीनी डॉक्टर ली वेनलियांग की फरवरी में मौत हो गई.

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने फरवरी में ही इस तरह का कानून बनाए जाने की मंशा जताई थी. उनका मकसद ऐसे सुधार किए जाना था जिनसे भविष्य में बड़े संक्रमणों और महामारियों को समय रहते रोका जा सके. नए कानून में ऐसी जानकारी छिपाने, उसकी रिपोर्ट ना करने या दूसरों को ऐसा करने से रोकने वालों को चेतावनी दिए जाने से लेकर बर्खास्त किए जाने तक की व्यवस्था है.

भविष्य में ऐसे किसी भी संक्रमण की सूचना मिलते ही उसके पैदा होने की जगह और स्थिति का पता लगाने के साथ साथ उससे जुड़े खतरों को नियमित निगरानी करना कानूनन अनिवार्य होगा. बीमारियों की रोकथाम के लिए काम करने वाली एजेंसियों को भी नई बामारियों के संक्रामक होने की संभावना को लेकर समय रहते भविष्यवाणी करनी होगी. इसके आधार पर प्रशासन कुछ चेतावनियां और बचाव के कुछ तरीके सुझा सकेगा.

सन 2002-2003 में सार्स के संक्रमण के बाद भी चीन ने एक सूचना तंत्र स्थापित किया था जिससे नए संक्रमणों की रियल-टाइम सूचना मिल सके. कोरोना वायरस को सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करने में हुई देरी के चलते प्रांतीय अधिकारियों की कथित अक्षमता पर चीन को बड़ी आलोचना झेलनी पड़ी थी.

आरपी/एनआर (एएफपी)

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