फेसबुक पर फैली अफवाह के बाद शिकागो में लूटपाट | दुनिया | DW | 11.08.2020
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दुनिया

फेसबुक पर फैली अफवाह के बाद शिकागो में लूटपाट

"पुलिस की गोली से 15 साल के एक किशोर की मौत हो गई." सोशल मीडिया के जरिए फैली इस अफवाह के बाद अमेरिकी शहर शिकागो में खूब लूटपाट हुई है. अमेरिका में आए दिन ऐसी हिंसा क्यों हो रही है?

शिकागो के मेयर लॉरी लाइटफुट के मुताबिक फेसबुक पर फैली अफवाह के बाद इंगलवुड इलाके के लोगों और पुलिस के बीच झड़प शुरू हो गई. अफवाह पुलिस फायरिंग के एक वीडियो के जरिए फैली. पहली बार शाम छह बजकर तीन मिनट पर पोस्ट हुए इस वीडियो के बाद रविवार रात लोगों और पुलिस अधिकारियों के बीच झड़प शुरू हो गई. इसी दौरान लोगों ने शिकागो शहर के सिटी सेंटर जाने का एलान किया.

पैदल आगे बढ़ती भीड़ ने फायरिंग की, शोरूमों के कांच तोड़े और सामान लूटा. महंगे स्टोरों को सबसे ज्यादा निशाना बनाया गया. स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक कुछ लोग तो लूट का सामान गाड़ियों में लादकर भागे. सोमवार दोपहर तक शहर के मुख्य शॉपिंग सेंटर में बर्बादी का नजारा था. जगह जगह कांच बिखरा पड़ा था. दुकानों की रैकें और सामान अस्त व्यस्त थे.

शिकागो में लूटपाट के बाद सफाई करते स्थानीय लोग

लूटपाट के बाद सफाई करते स्थानीय लोग

पुलिस के खिलाफ हिंसा

शिकागो के पुलिस सुप्रीटेंडेंट डेविड ब्राउन के मुताबिक, "यह कोई आयोजित प्रदर्शन नहीं था. बल्कि यह खालिस आपराधिक घटना है. यह हमारे पुलिस अधिकारियों और हमारे शहर के विरुद्ध हिंसा की कार्रवाई थी." शिकागो पुलिस ने 100 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है. पुलिस का कहना है कि हिंसक लूट के दौरान उसके 13 अधिकारी घायल हुए हैं.

ब्राउन के मुताबिक रविवार को पुलिस के साथ फायरिंग में 20 साल का एक युवक घायल हुआ. युवक की हालत खतरे से बाहर है. अफवाह इसी फायरिंग के बाद फैली. अकादमिक जगत में अच्छी खासी प्रतिष्ठा रखने वाला शिकागो अमेरिका के सबसे बड़े शहरों में से एक है. 2020 में शिकागो में नरहत्या के मामलों में 50 फीसदी इजाफा हुआ है.

शिकागो में लूटपाट के दौरान महंगे शोरूमों को सबसे ज्यादा निशाना बनाया गया

महंगे शोरूमों को सबसे ज्यादा निशाना बनाया गया

व्हाइट हाउस के बाहर फायरिंग

शिकागो में हुई हिंसा के बीच सोमवार को वॉशिंगटन स्थित अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय व्हाइट हाउस के बाहर फायरिंग हुई. फायरिंग के दौरान राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप प्रेस को संबोधित कर रहे थे. फायरिंग के चलते प्रेस ब्रीफिंग बीच में ही रद्द कर राष्ट्रपति को सुरक्षित जगह पर ले जाया गया. बाद में पता चला कि व्हाइट हाउस के एक गेट पर सीक्रेट सर्विस ने संदेह के आधार पर एक व्यक्ति पर गोली चलाई थी.

अमेरिका में बीते कुछ बरसों में नस्लीय तनाव चरम पर है. पुलिस की गोली से काले लोगों की मौत के बाद बीच बीच में तनाव भड़क रहे हैं. मई 2020 में पुलिस कार्रवाई में जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद दुनिया भर में "ब्लैक लाइव्स मैटर" नाम का आंदोलन शुरू हुआ. कई अमेरिकी प्रांतों में पुलिस पर नस्लीय घृणा से प्रेरित होने के आरोप लग रहे हैं.

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