आईएस ने दी चीन में ″खून की नदियां″ बहाने की धमकी | दुनिया | DW | 01.03.2017
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दुनिया

आईएस ने दी चीन में "खून की नदियां" बहाने की धमकी

आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट से जुड़े चीन के अल्पसंख्यक उइगुर समुदाय के चरमपंथियों ने कहा है कि वह वापस लौटेंगे और खून की नदियां बहा देंगे. जानकार इसे चीन को लेकर आईएस की पहली धमकी मान रहे हैं.

यह धमकी सोमवार को जारी आधे घंटे के एक वीडियो में दी गई है. इस वीडियो का विश्लेषण करने वाली अमेरिकी संस्था साइट ने कहा है कि वीडियो पश्चिमी इराक में आईएस की एक शाखा ने जारी किया है और इसमें उइगुर समुदाय के चरमपंथियों को दिखाया गया है.

चीन अपने पश्चिमी शिनचियांग प्रांत में होने वाली हिंसा के लिए बरसों से निर्वासन में रह रहे उइगुर अलगाववादियों को जिम्मेदार ठहराता है. उइगुर लोग मुख्यतः शिनचियांग में रहते हैं. उनका आरोप है कि चीन की सरकार उनका सामाजिक और सांस्कृतिक दमन करती है और हर स्तर पर उनके साथ भेदभाव होता है. हालांकि चीन ऐसे आरोपों से इनकार करता है, लेकिन शिनचियांग में मुसलमानों पर कई तरह की पाबंदियां लगाई गई हैं.

वीडियो में एक उइगुर लड़ाके को एक कथित मुखबिर का सिर कलम करने से पहले चीन को धमकी देते देखा जा सकता है. साइट की तरफ से मुहैया कराए गए अनुवाद के मुताबिक यह चरमपंथी कहता है, "ओ, चीनियों तुम नहीं समझते कि लोग क्या कहते हैं! हम खिलाफत के सैनिक हैं और हम तुम्हारे यहां आएंगे और तुम्हें बताएंगे कि हथियारों की भाषा क्या होती है. हम खून की नदियां बहाएंगे और दमन का बदला लेंगे.”

ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी के नेशनल सिक्योरिटी कॉलेज में शिनचियांग पर विशेषज्ञ डॉ माइकल क्लार्क का कहना है कि यह शायद चीन को आईएस की तरफ से पहली स्पष्ट धमकी है. उन्होंने कहा, "यह पहला मौका है जब उइगुर भाषी चरमपंथियों ने दावा किया है कि वह आईएस से जुड़े हैं.”

क्लार्क कहते हैं कि वीडियो से पता चलता है कि चीन भी अब जिहादियों की बयानबाजी के निशाने पर आ गया है जबकि कुछ साल पहले तक जिहादियों की जुबान से चीन का नाम शायद ही कभी सुनने को मिलता था. लेकिन वह यह भी कहते हैं कि यह वीडियो उइगुर चरमपंथियों के बीच फूट का भी संकेत देता है क्योंकि वीडियो में अल कायदा और सीरिया में तुर्किस्तानी इस्लामिक पार्टी के लिए लड़ रहे उइगुर लोगों को भी चेतावनी दी गई है.

क्लार्क कहते हैं कि उइगुर चरमपंथियों में फूट चीन के लिए ज्यादा चुनौतीपूर्ण होगी. इससे दोनों आतंकवादी गुटों आईएस और अल कायदा की क्षमता चीन के खिलाफ इस्तेमाल हो सकती हैं. कितने उइगुर चरमपंथी विदेशों में है, इस बारे में कोई स्पष्ट आंकड़ा नहीं है. हालांकि एक अमेरिकी थिंक टैंक ने जुलाई में कहा था कि मुसलमानों पर चीन की पाबंदियों के कारण 100 से ज्यादा उइगुर लोग आईएस में भर्ती हुए हैं. चीन शिनचियांग में कड़ी सुरक्षा रखता है लेकिन वहां लगातार अशांति जारी है. पिछले हफ्ते वहां हुए एक चाकू हमले में आठ लोग मारे गए. पुलिस के मुताबिक मरने वालों में तीन हमलावर भी शामिल हैं.

एके/एमजे (एएफपी)

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