मेघालय में बीजेपी के मंत्री ने कहाः ज्यादा से ज्यादा बीफ खाएं | भारत | DW | 03.08.2021

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भारत

मेघालय में बीजेपी के मंत्री ने कहाः ज्यादा से ज्यादा बीफ खाएं

पूर्वोत्तर का स्कॉटलैंड कहे जाने वाले मेघालय में बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता और राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री ने लोगों को अधिक से अधिक बीफ यानी गोमांस का सेवन करने की सलाह देकर विवाद पैदा कर दिया है.

मेघालय के पशुपालन और पशु चिकित्सा मंत्री शुल्लई के अनुसार हर कोई अपनी पसंद का खाना खाने के लिए स्वतंत्र है.

मेघालय के पशुपालन और पशु चिकित्सा मंत्री शुल्लई के अनुसार हर कोई अपनी पसंद का खाना खाने के लिए स्वतंत्र है.

उनके बयान पर बढ़ते विवाद के बाद पार्टी ने जहां इस बयान से पल्ला झाड़ लिया है, वहीं संबंधित मंत्री ने भी सफाई देते हुए कहा है कि उनकी टिप्पणी को गलत संदर्भ में पेश किया गया. मंत्री सनबोर शुल्लई भले सफाई दे रहे हों, उनकी टिप्पणी ने भगवा पार्टी की नीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

ईसाई-बहुल मेघालय में पहले से ही बीफ का भारी खपत है और राज्य की जरूरत का 90 फीसदी हिस्सा दूसरे राज्यों से खरीदा जाता है. पड़ोसी असम की बीजेपी सरकार ने पशु संरक्षण अधिनियम के जरिए गोमांस की खरीद-फरोख्त और ढुलाई पर कई किस्म की पाबंदियां लगा दी हैं.

क्या कहा था मंत्री ने?

हाल में कैबिनेट में शामिल होने वाले मेघालय के पशुपालन और पशु चिकित्सा मंत्री शुल्लई ने पत्रकारों से बातचीत में कहा था, "मैं लोगों को चिकन, मटन या मछली की तुलना में अधिक गोमांस खाने के लिए प्रोत्साहित करता हूं. लोगों को अधिक गोमांस के सेवन के लिए प्रोत्साहित करके हम यह धारणा दूर करना चाहते हैं कि बीजेपी राज्य में गोहत्या पर पाबंदी लगाएगी.”

देखिएः सबसे खतरनाक है बीफ

उनकी दलील थी कि एक लोकतांत्रिक देश में हर कोई अपनी पसंद का खाना खाने के लिए स्वतंत्र है. यही नहीं, बीजेपी नेता ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से बात करने का भी भरोसा दिया था ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मेघालय में पड़ोसी राज्य के नए कानून से पशुओं की सप्लाई प्रभावित नहीं हो.

विवाद पर सफाई

अब इस टिप्पणी पर विवाद बढ़ने के बाद मंत्री ने सफाई देते हुए कहा है कि उनकी टिप्पणी को अतिरंजित और गलत समझा गया है. उनका कहना है, "चिकन, मटन और मछली के मुकाबले गोमांस के ज्यादा सेवन के बारे में मेरे बयान को बेहद अतिरंजित और गलत समझा गया है. पूरे बयान को एक नया आयाम दिया गया है और कुछ मीडिया समूहों ने वास्तविक बयान को संपादित करके मेरी टिप्पणी की अलग तरीके से व्याख्या की है."

शुल्लई का कहना है कि उन्होंने उक्त टिप्पणी असम के संदर्भ में की थी जहां बीफ पर पाबंदी ने राज्य के स्थानीय आदिवासी और अन्य समुदायों में दहशत पैदा कर दी है. उनकी दलील है कि मेघालय में बीफ लोगों का मुख्य आहार है.

तस्वीरों मेंः ये हैं भारत के बीफ खाने वाले

राज्य के लोगों को अंदेशा था कि बीजेपी को वोट देने की स्थिति में यहां भी गोमांस पर पाबंदी लागू कर दी जाएगी. बीजेपी नेता कहते हैं, "पार्टी स्थानीय समुदायों की अनूठी विरासत की रक्षा के लिए कृतसंकल्प है और उनके सामाजिक-सांस्कृतिक तौर-तरीकों में कभी हस्तक्षेप नहीं करेगी." शुल्लई ने इस मुद्दे पर प्रेस क्लब आफ इंडिया को पत्र भी भेजा है.

सीमा विवाद पर भी बयान

तीन बार विधायक रहे शुल्लई ने मेघालय और असम के बीच सीमा विवाद पर कहा था कि अब समय आ गया है कि राज्य सीमा और अपने लोगों की रक्षा के लिए पुलिस बल का इस्तेमाल करें. उन्होंने कहा था, "अगर असम के लोग सीमावर्ती इलाकों में हमारे लोगों को प्रताड़ित करते रहते हैं तो हमें भी मौके पर ही जवाब देना होगा.”

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह हिंसा के पक्ष में नहीं हैं. शुल्लई का कहना था कि वर्ष 2023 में बीजेपी के सत्ता में आने पर राज्य में पांच मिनट के भीतर इनर लाइन परमिट (आईएलपी) प्रणाली लागू कर दी जाएगी.

दूसरी ओर, पार्टी के महासचिव अर्जुन सिंह ने रविवार मेघालय की राजधानी शिलांग में कहा कि पार्टी गोमांस के सेवन को बढ़ावा देने के पक्ष में नहीं है. उन्होंने शुल्लई के आईएलपी वाले बयान पर टिप्पणी से इंकार करते हुए कहा कि राज्य का विकास ही बीजेपी की पहली प्राथमिकता है.

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सिंह ने कहा, "असम के पशु संरक्षण कानून के असर के बारे में प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष बेहतर बता सकते हैं. लेकिन अब तक जितने लोगों से बात हुई है, किसी ने इस पर कोई अंदेशा नहीं जताया है."

असम में पशु संरक्षण कानून

मेघालय के पड़ोसी असम की बीजेपी सरकार ने राज्य में मवेशियों की रक्षा के लिए नया कानून बनाया है. असम मवेशी संरक्षण विधेयक 2021 नामक इस कानून का मकसद वैसे तो पड़ोसी देश बांग्लादेश में गायों की तस्करी को रोकना है. 

लेकिन विधानसभा में उसे पेश करने के दौरान मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा था कि इस कानून का मकसद यह भी सुनिश्चित करना है कि उन क्षेत्रों में अनुमति नहीं दी जाए जहां मुख्य रूप से हिंदू, जैन, सिख और बीफ नहीं खाने वाले समुदाय रहते हैं. इसके साथ ही किसी मंदिर, धार्मिक स्थान या फिर अधिकारियों की ओर से तय किसी दूसरी संस्था के पांच किलोमीटर के दायरे में भी पशुओं की कटाई की अनुमति नहीं होगी. उन्होंने कहा कि कुछ धार्मिक अवसरों के लिए इसमें छूट दी जा सकती है.

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इस कानून में लाइसेंसी बूचड़खानों को ही पशुओं को काटने की अनुमति देने का प्रावधान है. साथ ही कहा गया है कि अगर जांच के दौरान वैध दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए तो राज्य के भीतर या उससे बाहर एक जगह से दूसरी जगह पशुओं की ढुलाई पर रोक लगा दी जाएगी.

नए कानून के तहत सभी अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होंगे. दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को कम से कम तीन साल की कैद या तीन से पांच लाख रुपए तक का जुर्माना या दोनों हो सकता है. अगर कोई दोषी दूसरी बार उसी या संबंधित अपराध का दोषी पाया जाता है तो नए कानून के तहत सजा दोगुनी हो जाएगी.

 

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