अमेरिका में दम तोड़ते परिंदे लेकिन वजह नहीं मालूम | पर्यावरण | DW | 09.07.2021
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पर्यावरण

अमेरिका में दम तोड़ते परिंदे लेकिन वजह नहीं मालूम

एक नयी महामारी सामने आई है जिसकी चपेट में पक्षी आ रहे हैं. अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी और उसके आसपास के इलाकों में इस अज्ञात बीमारी से संक्रमित पक्षी मर रहे हैं. बीमारी ने विशेषज्ञों को भी चकरा दिया है.

एक ओर इंसान और जानवर कोविड-19 से जूझ रहे हैं, दूसरी ओर एक नयी महामारी ने उत्तरी अमेरिका में बहुत सी पक्षी प्रजातियों को जकड़ लिया है. पूरे अमेरिका में जगह जगह लोगों को मरे हुए परिंदे दिख रहे हैं. अप्रैल से ये रहस्मयी बीमारी पक्षियों पर कहर बरपा रही है. पक्षी विशेषज्ञों का कहना है कि मरे हुए या बीमार परिन्दों की आंखे सूज जाती हैं और उनमें स्नायुगत समस्याएं भी आ जाती हैं जिससे लगता है कि उनका संतुलन बिगड़ जाता है.

बीमारी के कारणों की तलाश

वॉशिंगटन डीसी में पशु बचाव केंद्र सिटी वाइल्डलाइफ के संस्थापक-निदेशक जिम मोन्स्मा कहते हैं, "पक्षियों में आंख की परेशानी असामान्य बात नहीं है.” मोन्स्मा शहरी इलाकों में जानवरों की हिफाजत और पुनर्वास के लिए 25 साल काम कर चुके हैं, खासकर राजधानी क्षेत्र में. वह कहते हैं, "हम शुरू में नहीं जानते थे कि हमारा सामना एक महामारी से है.”

उन्हें अब लगता है कि बहुत सारी पक्षी प्रजातियां करीब दो महीनों से एक अजीब सी बीमारी की चपेट में आई हैं. यह बीमारी राजधानी से 965 किलोमीटर के दायरे में फैल चुकी है. अमेरिका के मिडवेस्ट इलाकों से इंडियाना राज्य तक. द यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (यूएसजीएस) ने शुरुआती जून में पक्षियों की रहस्यमयी मौत पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी. इसके ब्यौरे तो अस्पष्ट हैं लेकिन जानकार महामारी का स्रोत ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं.

देखिएः अमेरिका में निकले अरबों झींगुर

मोन्स्मा कहते हैं, "पहला मामला हमें अप्रैल में दिखा था. जून की शुरुआत में, हमने पक्षियों को एक पशु केंद्र में भेजना शुरू किया, जहां हमारी बतायी संख्या सुनकर सबके कान खड़े हो गए. अब, हमारे पास 200 से कम संक्रमित पक्षी हैं.”

नहीं हो पाई बीमारी की पहचान

पशु केंद्रों में पक्षियों की मौत या बीमारी के संभावित कारणों की छानबीन जारी है. लेकिन अभी तक हुए टेस्ट  बेनतीजा रहे हैं. वाइल्डलाइफ की क्लिनिक डायरेक्टर चेरिल चूलजियान के परीक्षणों का हवाला देते हुए मोन्स्मा कहते हैं, "ये वेस्ट नाइल की बीमारी नहीं है. बाकी ज्ञात बीमारियों में से भी ये कोई नहीं है. आज की तारीख में हमें कुछ नहीं पता है.”

अमेरिका का भूगर्भीय सर्वे संस्थान (यूएसजीएस) भी अज्ञात महामारी को लेकर चकरा गया है. विभाग की प्रवक्ता मारिसा लुबेक कहती हैं, "इस मोड़ पर यूएसजीएस के पास, इंटरएजेंसी बयान के अलावा कोई अपडेट नहीं है.”

बीमारी को लेकर हैं कई सिद्धांत 

विशेषज्ञों के पास अपनी अपनी थ्योरियां हैं. उनमें से एक थ्योरी बीमारी को ब्रूड-एक्स सिकाडा यानी झींगुर की मौजूदगी से जोड़ती है. ये झींगुर अप्रैल के आखिर से मई के शुरू में प्रकट होते हैं- ये वही समय था जब लोगों ने मरे हुए पक्षी देखने शुरू किए थे. पक्षी विशेषज्ञों के मुताबिक यह भले ही एक थ्योरी है, लेकिन इस पर काम किया जा सकता है. निरंतर रिसर्च जरूरी है क्योंकि दूसरा बर्ड फ्लू, लोगों के लिए भी बहुत खतरनाक साबित हो सकता है.

तस्वीरों मेंः इन्सानों से छह गुना ज्यादा हैं परिंदे

मोन्स्मा कहते हैं कि "हम अपनी पक्षी आबादी खतरनाक तेजी से गंवाते जा रहे हैं.” गायब होती चिड़ियों में फ्लेजलिंग यूरोपियन स्टारलिंग, ब्लूजे और दूसरी चिड़ियां शामिल हैं. वह कहते हैं, "अमेरिका में हर तीसरी चिड़िया प्रजाति तेजी से घट रही है. बीमारी दूसरी प्रजातियों में फैल रही है. और इसके इंसानों में फैलने की आशंका से भी हम इंकार नहीं कर सकते हैं.”  उनके मुताबिक ऐतिहासिक रूप से और मौजूदा समय में "जब आप पशुओं में बीमारी को भड़कता देखते हैं, तो ये चिंता की बात है. इसे आप कतई खारिज नहीं करना चाहेंगे.”

चिड़िया को दाना मत दो

इन परिंदों के स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ उम्मीद भी है- सिटी वाइल्डलाइफ के पास आने वाले बीमार पक्षियों की संख्या पिछले दो सप्ताह में नीचे आई है. मोन्स्मा कहते हैं कि विभिन्न प्रजातियों में बीमारी का फैलाव खत्म करने के लिए, सिटी वाइल्डलाइफ ने वॉशिंगटन प्रशासन, मैरीलैंड और वर्जीनिया को सावधानी बरतने और बर्ड फीडर या बर्ड बाथ हटाने को कहा है. कुछ निवासियों ने तो चिड़िया को खाना खिलाने वाले फीडर पहले ही हटा लिए हैं. कुछ लोगों ने अलग रास्ता लिया है और नियमित आने वाले पक्षियों को डराने के लिए फीडर में चिड़िया के कंकाल लटका दिए हैं.

जियोलॉजिकल सर्वे की सलाह है कि महामारी खत्म होने तक चिड़िया को खाना न खिलाएं. अगर कोई फीडर या बर्ड बाथ रखता भी है तो उन्हें 10 प्रतिशत ब्लीच सॉल्युशन से साफ करने की जरूरत है. पालतु जानवरों को बीमारा या मरी हुई चिड़िया से अलग रखना चाहिए. संक्रमण की दर भले ही कम हो रही है, लेकिन बीमारी से फिलहाल निजात नहीं मिलती दिखती. जानकारों के मुताबिक, इससे पहले कि देर हो जाए, बीमारी पर काबू पाने के लिए जनता को भी अपने एहतियाती उपाय जारी रखने होंगे.

रिपोर्टः नेट स्वैनसन

देखेंः कौन से पक्षी निभाते हैं जीवनभर साथ

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