बीएचयू में गरीब स्टूडेंट्स के लिए ब्याज मुक्त कर्ज योजना पर अब भी कई सवाल | भारत | DW | 27.04.2022

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भारत

बीएचयू में गरीब स्टूडेंट्स के लिए ब्याज मुक्त कर्ज योजना पर अब भी कई सवाल

छात्र-छात्राएं योजना को लेकर कुछ असमंजस में हैं क्योंकि पढ़ाई के तुरंत बाद ज्यादातर को नौकरियां नहीं मिलतीं. कुछ स्टूडेंट्स ने डर जताया है कि भविष्य में इस सब्सिडी का हवाला देकर सामान्य फीस बढ़ाई जा सकती है.

बीएचयू में स्टूडेंट्स को मिलेगा ब्याज-मुक्त कर्ज

बीएचयू में स्टूडेंट्स को मिलेगा ब्याज-मुक्त कर्ज

वाराणसी स्थित काशी हिन्दू विश्वविद्यालय यानी बीएचयू ने गरीब विद्यार्थियों के लिए एक नई योजना शुरू की है जिससे छात्रों को विपरीत परिस्थितियों में भी पढ़ाई बीच में नहीं छोड़नी पड़ेगी. विश्वविद्यालय ने गरीब छात्रों के लिए ब्याज मुक्त ऋण योजना शुरू की है जिससे हर साल छात्रों को 12 हजार रुपये कर्ज के तौर पर दिए जाएंगे और उसका कोई ब्याज नहीं लगेगा. शिक्षा पूरी करने और फिर नौकरी करने के बाद छात्रों को यह पैसा लौटाना पड़ेगा.

विश्वविद्यालय ने एक बयान जारी कर कहा है कि इस योजना का लाभ उन छात्रों को मिलेगा जिनके परिवार बीपीएल कार्ड धारक यानी गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले हैं या फिर जिनके माता-पिता की मृत्यु कोविड-19 के कारण हुई है और बच्चा पढ़ाई से लेकर हर चीज के लिए अपने माता-पिता पर ही निर्भर हैं. ऐसे छात्रों को हर साल 12 हजार रुपये की वार्षिक सहायता दी जाएगी जो ब्याज मुक्त कर्ज के रूप में होगी. यह सहायता पांच साल तक मिलती रहेगी. यानी कुल साठ हजार रुपये की आर्थिक सहायता ऐसे छात्र पा सकेंगे.

अब तक मिले 200 आवेदन
विश्वविद्यालय के नवनियुक्त कुलपति प्रोफेसर सुधीर कुमार जैन के मुताबिक, इस योजना का मकसद ऐसे छात्र-छात्राओं को आर्थिक सहायता पहुंचाना है जो गरीब हैं या फिर जिनकी फीस भरने वाला कोई नहीं है, ताकि वे विश्वविद्यालय में निर्बाध रूप से अपनी शिक्षा पूरी कर सकें. वीसी प्रोफेसर जैन ने एक बयान में बताया कि बीएचयू में शिक्षा पाने वाले हर छात्र के लिए कोशिश यह होगी कि वह अपनी शिक्षा पूरी करे और आर्थिक विपन्नता के कारण किसी की पढ़ाई अधूरी न रह पाए. इस योजना के तहत आवेदन करने वाले छात्रों के लिए विश्वविद्यालय के दो संकाय सदस्यों की अनुशंसा भी जरुरी होगी.

विश्वविद्यालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, कर्ज लेने वाला छात्र जैसे ही अपनी पढ़ाई पूरी करके रोजगार पाएगा, उसके दो वर्ष के भीतर उसे किश्तों में कर्ज की राशि लौटानी होगी, जो मूलधन के बराबर ही होगी, उस पर कोई ब्याज नहीं लगेगा. विश्वविद्यालय में डीन, विद्यार्थी कल्याण के पद पर कार्यरत प्रोफेसर केके सिंह के मुताबिक, योजना की शुरुआत 25 मार्च से हुई है और शुरुआती दौर में 1,000 विद्यार्थियों को इस योजना का लाभ दिया जाएगा. उनके मुताबिक, अब तक करीब 200 आवेदन आ चुके हैं जिनमें सौ से ज्यादा आवेदनों को मंजूरी भी दे दी गई है.

लाभ पाने की कुछ शर्तें भी
कुलपति प्रोफेसर जैन का कहना है कि योजना के तहत भले ही यह आर्थिक सहायता कर्ज के रूप में छात्र-छात्राओं को दी जा रही है लेकिन इसका उद्देश्य यही है कि छात्रों को पढ़ाई पूरी करने में मदद की जा सके और उन्हें इसके लिए प्रोत्साहन मिल सके.

वीसी ने बताया कि इस योजना का लाभ ज्यादा से ज्यादा छात्रों को मिल सके, इसके लिए जल्दी ही एक और आवेदन प्रक्रिया शुरू की जाएगी. हालांकि इस योजना के तहत ऐसे छात्र-छात्राएं लाभ नहीं पा सकेंगे जो पहले से ही किसी बैंक, एजेंसी या संस्था से आर्थिक लाभ पा रहे हैं. योजना का लाभ पाने वाले छात्र-छात्राओं को मिलने वाली वित्तीय सहायता को उनकी फीस के साथ संबद्ध नहीं किया जाएगा बल्कि यह उन्हें कर्ज के तौर पर दी जाएगी, जिससे वो अपनी फीस भी भर सकते हैं.

बीते सालों में बीएचयू में फीस की बढ़ोत्तरी के खिलाफ छात्र आंदोलन हुए हैं

बीते सालों में बीएचयू में फीस की बढ़ोत्तरी के खिलाफ छात्र आंदोलन हुए हैं

दो किश्तों में वापस करनी होगी राशि
कर्ज के भुगतान की जिम्मेदारी सिर्फ लाभ पाने वाले छात्र-छात्राओं की ही होगी, उनके मां-बाप या फिर आवेदन की अनुशंसा करने वाले प्राध्यापकों की नहीं होगी. डीन, छात्र कल्याण, प्रोफेसर सिंह ने बताया कि छात्रों को पैसे वापस के करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई दबाव नहीं बनाया जाएगा लेकिन पढ़ाई पूरी करने और फिर नौकरी या रोजगार मिलने के बाद उन्हें दो किश्त में यह राशि वापस करनी होगी.

विश्वविद्यालय की इस योजना से गरीब छात्र जरूर लाभान्वित होंगे लेकिन कुछ छात्रों ने सवाल किया है कि योजना सिर्फ एक हजार छात्रों के लिए ही क्यों चलाई जा रही है. बीएचयू से एलएलबी कर रहे छात्र दुर्गेश सिंह कहते हैं कि जब मानक बीपीएल कार्ड धारक रखा गया है तो लोन पाने वालों की संख्या को सीमित क्यों रखा गया है. हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि अगले सत्र से इसे बढ़ाकर दो हजार कर दिया जाएगा.

फीस वृद्धि पर हुए आंदोलन
विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र ऑनर्स के छात्र रघुवर कुमार कहते हैं, "यह अच्छी पहल है. बीएचयू में बहुत से गरीब छात्र पढ़ते हैं और कई बार कमजोर आर्थिक स्थिति के चलते कुछ स्टूडेंट्स को पढ़ाई भी छोड़नी पड़ जाती है. यूनिवर्सिटी में फीस और हॉस्टल की भी काफी ज्यादा हो गई है इससे गरीब छात्रों को बहुत दिक्कतें होती हैं. लोन वाली व्यवस्था से कुछ हद तक राहत मिलेगी.”

इससे पहले बीएचयू में विदेशी स्टूडेंट्स को लुभाने के लिए भी एक छात्रवृत्ति योजना शुरु की गई थी जिसके तहत हर विदेशी छात्र को 6 हजार रुपए महीने छात्रवृत्ति के तौर पर दिया जाएगा. बीएचयू प्रशासन ने यह फैसला उस वक्त लिया था जब हॉस्टल और परीक्षा में फीस बढ़ोत्तरी को लेकर छात्र आंदोलित थे और लगातार कई दिनों तक प्रदर्शन किया था.